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Article 370: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले गुलाम नबी आजाद, हमारे लिए यह फैसला निराशाजनक

Article 370: जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने इसे बहारल रखने के पक्ष में फैसला दिया उससे गुलाम नबी आजादी खुश नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुझे निराशा हुई है, बहुत अफसोस हुआ है। मैं शुरू से ही कह रहा था कि इस मसले का फैसला संसद या फिर सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है। लेकिन मौजूदा सरकार तो इसका फैसला करती नहीं क्योंकि उन्होंने तो कानून बनाकर आर्टिकल 370 को खत्म किया है।

ghulam nabi azad

सुप्रीम कोर्ट हमारी आखिरी उम्मीद थी कि वह इसपर सुनवाई करके और फैसला सुनाए। तीन-चार महीने इसपर संसद में बहस हुई। इसमे अलग-अलग लोगों ने जम्मू कश्मीर का प्रतिनिधित्व किया। सुप्रीम कोर्ट का एक समग्र फैसला आया है जिससे जम्मू कश्मीर के लोग खुश नहीं है।

आर्टिकल 370 और 35ए से हमारे जज्बात जुड़े थे। 35ए को महाराजा हरि सिंह ने 1925, 1927 और 1928 में बनाया था कि बाहर वाला ना तो नौकरी कर सकता है और ना ही बाहर वाला जमीन खरीद सकता है।

जब हमारा संविधान बना तो उसे 35ए के तहत आगे बढ़ाया गया। इससे हमारे प्रदेश को बहुत नुकसान होगा। जमीनें महंगी हो जाएंगी। हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान होगा। पूरे हिंदुस्तान से लोग यहां आएंगे।

हमारे यहां बड़ी इंडस्ट्रियां नहीं हैं जहां हजारों और लाखों लोग नौकरी करें। हमारी सबसे बड़ी इंडस्ट्री सरकारी नौकरी है, उसमे भी अब बहुत कम नौकरी होगी क्योंकि राज्य छोटा है। अब पूरे मुल्क के लोग यहां आवेदन कर सकते हैं। लिहाजा हमारे नौजवान बच्चे जो पढ़े-लिखे हैं, उनकी बेकारी और बढ़ेगी, यह तीन गुना बढ़ेगी।

इन तमाम चीजों को ध्यान में रखते हुए आर्टिकल 35ए को बनाया गया था। यहां एक तरफ चीन, दूसरी तरफ पाकिस्तान है। यहां कोई बड़ी खदान आदि नहीं है, इसी वजह से आर्टिकल 35ए को बनाया गया था। लेकिन इसे खत्म कर दिया गया है।

मैं यह नहीं कह रहा कि सुप्रीम कोर्ट से भरोसा उठ गया, लेकिन हमे एक उम्मीद थी। हम कई समय से कहते आए हैं कि जो कोर्ट कहेगा वह आखिरी फैसला होगा। जैसा बाबरी मस्जिद के समय भी हमने कहा था।

सुप्रीम कोर्ट किसी दल से संबंध नहीं रखता है। आज का बेंच जो था वह बहुत ही अच्छा था। उन्होंने संविधान के लिहाज से फैसला दिया है। लेकिन बुनियादी तौर पर 5 अगस्त 2019 को इसे खत्म किया जाना गलत था।

जम्मू कश्मीर की सियासी पार्टियों से इस बारे में पूछा जाना चाहिए था। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि 30 सितंबर तक चुनाव होना चाहिए और जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए, उसके बाद तो कुछ बचा नहीं है।

लेकिन इससे हमे बहुत मायूसी है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर को चुनाव की जो तारीख तय की है हमारे हक में है। लेकिन दूसरी चीज से जो हमारी उम्मीद जुड़ी थी, वह हमे नहीं मिल पाई है।

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