कोरोना: ऑक्सफोर्ड के बाद चीन की वैक्सीन ने दिए अच्छे परिणाम, भारत में ट्रायल जारी, जानिए इससे जुड़ी हर बात
नई दिल्ली: पूरी दुनिया कोरोना वायरस से परेशान है। इस बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक राहत भरी खबर दी है। जिसके मुताबिक उनकी वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा है। वैक्सीन के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं, साथ ही ये इम्यूनिटी सिस्टम को भी मजबूत कर रही है। ऑक्सफोर्ड के बाद अब चीन ने भी दावा किया है कि उसकी वैक्सीन ने बेहतर परिणाम दिए हैं। हालांकि भारत में हाल ही में वैक्सीन का ट्रायल शुरू हुआ है। आइए जानते हैं वैक्सीन से जुड़ी अहम बातें-

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- हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक और ICMR ने मिलकर भारत में ही स्वदेशी वैक्सीन तैयार की है। इसका देश के 12 संस्थानों में ट्रायल शुरू हो गया है, जिसमें दिल्ली एम्स भी शामिल है।
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की ओर से तैयार वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिए हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि वैक्सीन से पता चला है कि ये एंटीबॉडी और कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दोनों उत्पन्न कर सकता है। हालांकि, ऑक्सफोर्ड रिसर्च टीम ने कहा है कि अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
- ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को इस साल के अंत तक रोल आउट किया जा सकता है, लेकिन ये सुनिश्चित नहीं है। वैज्ञानिकों ने सोमवार को इससे संबंधित डेटा दिखाया था, जिसके मुताबिक 2020 के अंत तक वैक्सीन का उपयोग हो सकता है।
- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ऐलान के बाद भारत में स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ (SII) इंडिया ने कहा कि वो दिसंबर तक भारत में वैक्सीन की 300-400 खुराक का उत्पादन कर सकता है। इसमें आधा उत्पादन भारत को मिलेगा, आधा बाकी देशों को।
- SII के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के उत्पादन के लिए वो तैयार हैं। जल्द ही भारतीय नियामक से इस वैक्सीन के उत्पादन की मंजूरी के लिए आवेदन करेंगे।
- भारत में अब तक दो वैक्सीन को ट्रायल की अनुमति दी गई है। एक भारत बायोटेक ने विकसित की है, जबकि दूसरी Zydas Cadila ने। Zydas Cadila ने अगले साल तक वैक्सीन आने की उम्मीद जताई है।
- चीन में कोरोना वायरस की वैक्सीन CanSino Biologics और मिलेट्री रिसर्च ने मिलकर तैयार की है। इसके दूसरे चरण के ट्रायल में कई अहम बातें निकलकर सामने आई हैं। वैक्सीन प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अच्छा काम कर रही है। अभी तक इसे सुरक्षित बताया गया है।
- भारत, चीन, इंग्लैंड के अलावा ब्राजील में भी वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। वहां पर अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक के संयुक्त प्रयास से विकसित वैक्सीन के ट्रायल को मंजूरी दे दी गई है। ये वहां पर ट्रायल किए जाने वाला तीसरा टीका है।
- वहीं कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली मॉडर्न इंक ने अमेरिकी कांग्रेसी पैनल में कहा कि वो अपने टीके को लागत पर नहीं बेचेंगे, क्योंकि इसे बनाने और समझने में लंबा वक्त लगा है। उनके मुताबिक कंपनी ने अभी ह्यूमन ट्रायल नहीं शुरू किया है।












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