मध्यप्रदेश के बाद क्या कांग्रेस के सामने राजस्थान का गढ़ बचाने की है चुनौती, जानें सच

बेंगलुरु। मध्‍यप्रदेश के बाद अब राजस्‍थान में कांग्रेस सरकार पर खतरा मंडराने की आशंका जताई जा रही हैं। मुश्किल भरी राहों से गुजर कर राजस्‍थान में अपनी जगह बनाने वाली कांग्रेस क्या सचमुच में इसे गवाने की राह पर हैं आइए जानते हैं?

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    दरअसल राजस्‍थान में मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्‍यमंत्री सचिन पायलट के बीच रिश्‍तें पहले ही दरक चुके हैं। उनके बीच की चल रही अनबन कई बार खुलकर सामने भी आ चुकी हैं। अब जब कि कांग्रेस से ज्योतिरादित्‍य सिंधिया बागवत कांग्रेस को ठेंगा दिखाते हुए भाजपा में शामिल हो गए हैं ऐसे में कांग्रेस से लंबे समय से नाराज चल रहे सचिन पायलट भी सिंधिया के दिखाए रास्‍ते पर कदम बढ़ा सकते हैं। सिंधिया के घटना के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या पायलट भी इसी रास्ते पर जाएंगे।

    पायलट क्या कर पाएंगे विस्‍फोट

    पायलट क्या कर पाएंगे विस्‍फोट

    ये कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि पायलट खेमे के लोगों का कहना हैं कि पायलट के पास फिलहाल 17 विधायक हैं जिसके दम पर पायलट बहुत जल्दी धमाका करने वाले हैं।बहुत जल्दी अमित शाह और नरेंद्र मोदी से मिलकर सचिन पायलट राजस्थान में गैर कांग्रेसी और गैर बीजेपी सरकार बना सकते हैं। पिछले दिनों से सचिन पायलट दिल्ली में थे तब ये कयास और तेज हो गए थे। माना जा रहा था कि दिल्ली में बैठकर वह राजस्थान में बड़ा राजनीतिक विस्फोट करने की तैयारी कर रहे थे। इसे भांपते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सुबह से विधायकों से संपर्क में है और अपने सारे सिपहसालारों को राजस्थान के एक एक विधायकों के पीछे लगा दिया था।

    पायलट को फुलप्रूफ नीति करनी होगी तैयार

    पायलट को फुलप्रूफ नीति करनी होगी तैयार

    सचिन पायलट को कोई भी कदम उठाने से पहले राजस्थान के इतिहास को भी समझना होगा। भैरों सिंह शेखावत ने चार बार अल्पमत की सरकार बनाई है और चारों बार विधायकों के समर्थन लेने की वजह सरकार नहीं गिरी हैं। दो बार अशोक गहलोत ने अल्पमत की सरकार बनाई है और आराम से सरकार चलाया है। पूरे उत्तर भारत में एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पर अल्पमत की सरकारें भी नहीं गिरी हैं जबकि उत्तर भारत के दूसरे राज्यों में दल बदल कानून लागू होने से पहले बहुमत की सरकारें गिरती रही है। यहां के लोगों के बारे में यह भी कहा जाता है कि पायलट अगर किसी विधायक को बुलाकर अपने पास कुछ बात करते हैं तो विधायक वहीं से गाड़ी स्टार्ट कर लेता है अशोक गहलोत को वह बात बताने के लिए। ऐसे में पायलट को फुलप्रूफ नीति या रणनीति तैयार करनी होगी।

    राजस्‍थान में भाजपा की मध्‍यप्रदेश जैसी स्थिाति में नही हैं

    राजस्‍थान में भाजपा की मध्‍यप्रदेश जैसी स्थिाति में नही हैं

    गौरतलब हैं कि राजस्‍थान में कांग्रेस की स्थिति फिलहाल मध्‍य प्रदेश जैसी नहीं हैं क्योंकि राजस्‍थान में कांग्रेस और भापजा की सीटों के बीच अंतर काफी अधिक हैं। 200 सीटों वाली राजस्‍थान विधानसभा में भाजपा के पास कुल 72 ही विधायक हैं और बहुमत हासिल कर सरकार बनाने के लिए भाजपा को कुल 101 विधायकों की जरुर होगी। बता दें राजस्थान में कांग्रेस के पास 101 विधायकों का समर्थन है इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों का कांग्रेसमें अशोक गहलोत ने विलय करवाया है और एक ग्यारह निर्दलीयों को कांग्रेस का एसोसिएट सदस्य बनाकर अपने साथ मिला लिया है। सरकार बनाने के लिए इस जादुई आंकड़े को पार करने के लिए भाजपा को 29 और विधायकों की जरुरत होगी।

    क्या पायलट कर पाएगे बगावत

    क्या पायलट कर पाएगे बगावत

    इतना ही नहीं राजनीति विशेषज्ञ का मानना है कि सिंधिया की तरह राजस्‍थान में पायलट वो कदम नहीं उठाएगे क्योंकि सिंधिया की तरह न ही पायलट अकेले दम पर इतनी अधिक संख्‍या में विधायकों को जुटा पाएगे। मुश्किल से वो 12 विधायक का समर्थन जुटा पाएंगे। पायलट के पास संख्‍याबल नहीं हैं इसका आप उससे लगा सकते है क्योंकि संख्‍याबल नहीं होने के कारण सीएम पद के लिए अड़े होने के बावजूद उन्‍हें सीएम की कुर्सी पर नही बैठाया गया था। ये बात और है कि इस मौके पर वो फायदा उठाते हुए माहौल बनाने की कोशिश करते हुए कांग्रेस अलाकमान पर अपने हित में फैसले लेने के लिए दबाव जरुर बना सकते हैं।

    राजस्‍थान में बीजेपी की राह में आएगा ये रोड़ा

    राजस्‍थान में बीजेपी की राह में आएगा ये रोड़ा

    राजस्थान में बीजेपी की राह इसलिए भी आसान नहीं है क्योंकि वहां उनके पास शिवराज सिंह चौहान जैसा कोई कद्दावर नेता नहीं है। वहीं भाजपा के पास सिंधिया का पायलट की तरह देने के लिए बहुत कुछ नहीं हैं। राजस्‍थान का सीएम तो उन्‍हें बनाएगी नहीं क्यों भाजपा में पहले ही कई इस पद के कद्दवार नेता मौजूद हैं। 30 सालों से ज्यादा समय तक राजस्थान में सक्रिय रहे अशोक गहलोत के पास ज्यादा अनुभव के साथ ज्यादा संबंध भी हैं लिहाजा उनके पास कुछ विधायक ज्यादा होना लाजमी है।

    कांग्रेस को इसलिए सतर्क रहने की है जरुरत

    कांग्रेस को इसलिए सतर्क रहने की है जरुरत

    पायलट के उलट सिंधिया ने कम उम्र में ही सत्ता का स्वाद चख चुके थे कई बार मंत्री बने वहीं सचिन पायलट के साथ ऐसा नहीं है। पांच साल पहले तक उनके पास कुछ नहीं था लेकिन आज वो उप मुख्यमंत्री हैं।और प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख भी हैं। ऐसे में बगावत करने से उनको कुछ हासिल होने वाला नही हैं। ये भी सच हैं कि राजनीति में कब क्या होगा इसका अंदाजा पहले से नही लगाया जा सकता इसलिए राजस्‍थान में भले ही अभी खतरा नजर नहीं आ रहा लेकिन कांग्रेस को मध्‍यप्रदेश और कर्नाटक से सबक लेते हुए बहुत सतर्क रहने की जरुरत हैं। इतना ही पायलट जैसे आए दिन बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं को लेकर काफी संजीदा हो जाने की जरुरत है।

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