चीनी घुसपैठ होने तक नहीं था पता कि इलाका भारत का, फिर गूगल मैप की ली मदद
arunachal pradesh,china,india,अरुणाचल प्रदेश,भारत,चीन
नई दिल्ली। बीते साल 2017 के दिसंबर में अरुणाचल प्रदेश स्थित ऊपरी सियांग जिले के तूतिंग इलाके के बिशिंग गांव में चीनी सैनिकों की ओर से घुसपैठ करने का मामला सामने आया था। बताया गया था कि मैक मोहन लाइन से 1.25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र में चीनी सैनिक सड़के बनाने का सामान लेकर आए थे। यह देश के सबसे दूर इलाके में है। हालांकि इन सब के बीच हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि इलाके में तैनात अधिकारियों को भी यह नहीं पता था कि क्षेत्र भारत के हिस्से में है।

कोई नदी या नहर नहीं
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार तूतिंग सर्कल के अतिरिक्त उपायुक्त के अपांग ने कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान जिस इलाके में घुसे थे, वो पहुंच से दूर है। शिकारियों के अलावा कोई भी व्यक्ति इस इलाके में नहीं जाता है क्योंकि यहां पहुंचना बेहद मुश्किल है। अधिकारी ने कहा कि घुसपैठ से पहले तक यही माना जाता था कि क्षेत्र नोमेन्स लैंड है क्योंकि यहां सीमा स्पष्ट करने के लिए कोई नदी या नहर नहीं है।

भारत की ओर से कोई सड़क ही नहीं
चीनी सैनिकों के यहां पहुंचने के बाद हमने गूगल मैप देखा, जिससे यह पता चला कि क्षेत्र भारत का ही हिस्सा है।' अपांग ने कहा कि चीन 1.25 किलोमीटर लंबी सड़क बना चुकी है। चीन की PLA ने जिस क्षेत्र में सड़क बनाई है, वो सियांग नदी के पूर्वी हिस्से पर है। नदी तिब्बत के यारलुंग सांगपो से निकलती है। चीनी सैनिक इस क्षेत्र में में अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते घुस आते हैं। दूसरी ओर बिशिंग गांव के लिए भारत की ओर से कोई सड़क ही नहीं है।

कम से कम 100 लोगों की आबादी हो तब ही सड़क बन सकती है
लोगों को 4 किलोमीटर पैदल चलकर नदी पर बने एक पुल तक जाना पड़ता है । फिर वहां गांव के लोग गेलिंग पहुंचते हैं, जहां तक सड़क बनी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार अपांग ने बताया कि , 'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नियमानुसार गांव में कम से कम 100 लोगों की आबादी हो तब ही सड़क बनाई जा सकती है। बिशिंग में केवल 16 घर हैं और 54 लोग रहतेहैं। इसी वजह से कोई सड़क नहीं बन पाई है।












Click it and Unblock the Notifications