डोकलाम के बाद से ही तैयारी में जुटा था चीन, LAC पर बना चुका है कई सैन्य शिविर
नई दिल्ली। चीन और भारत के बीच गलवन घाटी में विवाध भले ही इस साल जून में हुआ है लेकिन चीन ने डोकलाम में भारतीय सेना से जोरदार टक्कर मिलने के बाद से ही योजना बनानी शुरू कर थी। सूत्रों के मुताबिक 2017 में डोकलाम संकट के बाद अब चीन ने लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक लगी एलएसी के गहराई वाले इलाकों में सैन्य शिविर बना लिए हैं।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच अप्रैल-मई से ही एलएसी पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इस कड़ाके की सर्दी में भी 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लद्दाख के रेतीले पहाड़ों पर दोनों सेनाएं आमने-सामने डटी हुई हैं।
लेकिन ऐसा लगता है कि डोकलाम के बाद से ही चीन ने किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी शुरू कर दी थी। सरकार के एक सूत्र ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि चीन डोकलाम विवाद के बाद से ही एलएसी के साथ अपने निचले क्षेत्रों में सैन्य शिविर विकसित करने में लगा हुआ है। एलएसी के आस-पास स्थानीय नागरिकों ने कम से कम ऐसे 20 शिविर देखे हैं।
इन शिविरों को बना लेने से चीनी सेना को ये फायदा हुआ है कि वह अपने क्षेत्र में ज्यादा बेहतर तरीके से गश्त कर सकती है। साथ ही सीमा पर तनाव की स्थिति में चीनी सेना को मूवमेंट में भी तेजी मिलेगी।
डोकलाम में आमने-सामने थीं सेनाएं
2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं उस समय आमने-सामने आ गई थीं जब भारत ने भूटान के क्षेत्र में चीनी सेना द्वारा किए जा रहे निर्माण को रोक दिया था। इस निर्माण के चलते चीन भारत के उस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्से के बेहद पास आ जाता जिसे चिकन नेक कहा जाता है। चिकननेक वह हिस्सा है जो भारत के मुख्य हिस्से और उत्तर पूर्वी क्षेत्र को आपस में जोड़ता है। इस हिस्से पर अगर चीन नियंत्रण कर ले तो भारत के लिए उत्तर पूर्व से जमीनी संपर्क टूट जाएगा।
भारत के इस रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई थी क्योंकि ये पहली बार था जब सीमा के मुद्दे पर किसी ने चीन की आंख में आंख डालकर बात की थी। वहीं इस बीच पूर्वी लद्दाख में चल रहे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव के दौरान भी भारत की सेनाएं मजबूती से चीन के सामने खड़ी हुई हैं।












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