हार के बाद अब कांग्रेसी चला रहे सोनिया-राहुल पर छुरियां

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों की तरह इस बार कांग्रेस की हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में हुई हार के बाद पार्टी के कुछ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरने लगे हैं।

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खुद अपनी लोकसभा सीट ना जीत पाने वाले पूर्व वित मंत्री पी.चिदंबरम ने कहा है कि वक्त का ताकाजा है कि सोनिया गांधी पार्टी में नई जान फूंके। जानकार कहते हैं कि चिदंबरम की तरह कांग्रेस के कुछ और नेता भी अब सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर वार कर सकते हैं या उन्हें सलाह दे सकते हैं।

हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद देश के राजनीतिक परिदृश्य पर नजर रखने वाले बता सकते है कि कांग्रेस पार्टी अब खत्म हो रही है।

कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप

कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप इतने लंबे समय तक लगे कि जनता के बीच इसने अपनी छवि गंवा दी। जबकि अन्य पार्टियां विशेषकर भारतीय जनता पार्टी लोगों की पसंद बनने लगी।

वरिष्ठ पत्रकार शशि झा मानते हैं कि कांग्रेस कम से कम एक दशक तक केंद्र में दुबारा सत्तासीन नहीं हो पाएगी। वह तभी संभव होगा जब पार्टी नए नेतृत्व और जोश से चुनाव लड़े।

सोनिया गांधी परिवारवादी राजनीति के परे नहीं सोच पाती हैं, ऐसे में इस पार्टी के दोबारा उबरने की उम्मीदें बहुत कम है। वह इस तथ्य को नजरअंदाज कर रही हैं कि सालो-साल राहुल गांधी को बढ़ावा देने के बावजूद वह इस काबिल नहीं बन पाए कि उनकी छवि को भुनाया जा सके।

नेताओं की कमी से जूझती कांग्रेस

कुल मिलाकर कांग्रेस में अब जन नेताओं की साफतौर पर कमी दिख रही है। इससे पार्टी को उबरना होगा। कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए यह ईमानदारी से मंथन करने का वक्त है।

इस बीच, कई राजनीतिक चिंतकों को यह हैरान कर रहा है कि हरियाणा और महाराष्ट्र से बहुत कम संख्या में महिला प्रत्याशी जीत कर आ सकी हैं। यह प्रमाण है कि वोटर की सोच नहीं बदल रही।

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