आइये मिलते हैं देश के सबसे गुस्सैल आंदोलनकारी से
नई दिल्ली। वे फ्रांस में सिखों के साथ होने वाले अन्याय से लेकर प्याज के बढ़े दामों और क्रिकेट में मैच फिक्सिंग के आरोपों से लेकर दूसरे तमाम मुद्दों पर लगातार प्रदर्शन से लेकर धरना देते हुए मिल जाएंगे। मिलिए परमजीत सिंह पम्मा से। आज राजधानी के एक बड़े अखबार ने उन्हें देश के सबसे गुस्सैल भारतीय होने का खिताब देकर अलंकृत किया।

कभी कांग्रेस में थे
पम्मा नेशनल अकाली दल का अपने को नेता बताते हैं। एक दौर में वे कांग्रेस में भी थे। पर अब तो उनका एकमात्र काम लगता है कि प्रदर्शन करना है। नारेबाजी करना है।
निकलते हैं
पम्मा ने एक बार वन इंडिया से कहा था कि वे रोज सुबह के अखबार पढ़ने के बाद प्रदर्शन करने के लिए निकल जाते हैं अपने कुछ मित्रों के साथ। हाथों में तख्तियां लेकर वे संबंधित विभाग या व्यक्ति के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने लगते हैं। उसके बाद शुरू होता है प्रेस रीलिज देने का क्रम।
बिजनेस परिवार
जानने वाले जानते हैं कि वे प्रदर्शन के दौरान इतनी तेज आवाज में नारे बाजी करते हैं कि लोग हैरान हो जाते हैं। पम्मा का परिवार बिजनेस करता है। धनी-संपन्न परिवार से वे नाता रखते हैं। वे कहते हैं कि वे अन्याय के किलाफ लड़ते रहेंगे। पम्मा वेस्ट दिल्ली की एक पॉश कालोनी में रहते हैं। उनको एक दौर में शीला दीक्षित का करीबी भी कहा जाता था।
हजारों प्रदर्शन
45 साल के पम्मा कहते हैं कि वे स्कूली दिनों से ही प्रदर्शन कर रहे हैं। अब तक करीब हजारों बार प्रदर्शन कर चुके होंगे। उनका आदर्श सरदार भगत सिंह हैं। वे कहते हैं कि भगत सिंह की शिक्षाओं पर चलकर देश विकास के रासते पर चल सकता है।
देश से करप्शन दूर हो सकती है। पम्मा कहते हैं कि वे अपने प्रदर्शन के मिशन में इसलिए ही सफल हैं क्योंकि उन्हें इस बाबत अपनी पत्नी का साथ मिलता है। उसने उहें कभी प्रदर्शन करने से नहीं रोका।












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