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मणिपुर के 6 पुलिस थानों में फिर से लागू हुआ AFSPA, बिगड़ती कानून के बीच गृह मंत्रालय ने लिया फैसला

Manipur News: मणिपुर में बिगड़ती कानून व्यवस्था और हिंसा को देखत केंद्र सरकार ने गुरुवार को बड़ा कदम उठाया। केंद्र ने मणिपुर के हिंसा प्रभावित जिरीबाम सहित छह पुलिस थाना क्षेत्रों में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को फिर से लागू कर दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि जातीय हिंसा के कारण यहां "लगातार अस्थिर स्थिति" को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

पीटीआई की खबर के मुताबिक, AFSPA को पुनः लागू करने संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना उसी दिन आई जिस दिन मणिपुर पुलिस ने जिरीबाम और चुराचांदपुर जिलों से हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया है। पुलिस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बुधवार को जिरीबाम जिले के चंपानगर, नारायणपुर और थांगबोईपुंजरे इलाकों तलाशी अभियान चलाया गया था।

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तलाशी अभियान और घेराबंदी के दौरान एक 2 इंच का मोर्टार, 36 जिंदा बैरल कारतूस और पांच खाली बैरल कारतूस जब्त किए गए। इसके अलावा, चुराचांदपुर के एच कोटलियान गांव में उन्हें .303 राइफल, 9 एमएम पिस्तौल, स्थानीय रूप से निर्मित तोपें, पांच एके 47 राउंड और अन्य गोला-बारूद मिला।

AFSPA सशस्त्र बलों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए "अशांत" क्षेत्रों में व्यापक अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों में बिना वारंट के तलाशी लेना और यदि आवश्यक समझा जाए तो बल प्रयोग करना शामिल है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा कि जातीय हिंसा के कारण लगातार अस्थिर स्थिति को देखते हुए AFSPA को फिर से लागू करने का निर्णय लिया गया।

अधिसूचना के अनुसार, बिष्णुपुर-चुराचंदपुर, इंफाल ईस्ट-कांगपोकपी-इंफाल वेस्ट और जिरीबाम जिलों के सीमांत क्षेत्रों में हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है। जिन पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू किया गया है, वे हैं सेकमाई और लमसांग, इंफाल पूर्वी जिले में लमलाई, जिरीबाम जिले में जिरीबाम, कांगपोकपी में लीमाखोंग और बिष्णुपुर में मोइरांग।

इससे पहले 1 अक्टूबर को मणिपुर में 19 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर AFSPA लागू कर दिया गया था, जिसमें ये छह थाना क्षेत्र शामिल थे। हाल ही में, जिरीबाम जिले में एक पुलिस स्टेशन और सीआरपीएफ कैंप पर हमला करने के बाद सुरक्षा बलों के साथ झड़प के दौरान दस संदिग्ध आतंकवादी मारे गए।

हमलावरों ने कथित तौर पर उसी इलाके से छह नागरिकों का अपहरण कर लिया था। इस घटना के कारण इंफाल घाटी में छात्रों ने अपहृत लोगों की सुरक्षित रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने कथित अपहरण के विरोध में शैक्षणिक संस्थानों के बाहर मानव श्रृंखला बनाई और काले झंडे-काले बैज पहने।

अपहृत लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से तत्काल कार्रवाई की मांग की। विरोध प्रदर्शन का आयोजन मेइती समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले COCOMI छात्र मोर्चा द्वारा किया गया था। बता दें, पिछले साल मई से इम्फाल घाटी के मीतई और पास की पहाड़ियों के कुकी-ज़ो समूहों के बीच जातीय हिंसा के कारण 200 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

हज़ारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। हालांकि, शुरुआत में जिरीबाम ज़्यादातर अप्रभावित रहा, लेकिन इस साल जून में वहां एक किसान का क्षत-विक्षत शव मिलने के बाद हिंसा भड़क उठी। 2004 से 2022 की शुरुआत तक, मणिपुर के अधिकांश हिस्से को AFSPA के तहत अशांत क्षेत्र घोषित किया गया था, सिवाय इंफाल नगरपालिका क्षेत्र के।

हालांकि अप्रैल 2022 में कुछ पुलिस स्टेशनों को इस टैग से छूट दी गई थी, जिसमें इंफाल पश्चिम जिले के सात, इंफाल पूर्वी जिले के चार, थौबल बिष्णुपुर काकचिंग और जिरीबाम जिलों के एक-एक पुलिस स्टेशन शामिल हैं। पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर से भी AFSPA को पूरी तरह से हटाने की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मणिपुरी कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला ने सोलह साल तक भूख हड़ताल करके इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था, जो 9 अगस्त 2016 को समाप्त हुआ। मणिपुर राज्य की सीमाओं के भीतर प्रभावित क्षेत्रों में आज लागू किए गए सुरक्षा उपायों के संबंध में हाल ही में जारी आधिकारिक अधिसूचनाओं के अनुसार कई जिलों में रुक-रुक कर गोलीबारी की खबरें आने से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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