तालिबान ने पाकिस्तान बॉर्डर सील किया, भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते पर क्या पड़ेगा असर?

अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर रुके ट्रक
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अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर रुके ट्रक

काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद भारत के साथ व्यापार को लेकर सबसे अधिक आशंका जताई जा रही थी. अब यह हक़ीकत में होता दिख रहा है. भारत ने कहा है कि तालिबान ने उसके साथ सीमापार व्यापार बंद कर दिया है.

चारों ओर मैदानी हिस्से से घिरे अफ़ग़ानिस्तान के साथ भारत का व्यापारिक लेनदेन मुख्य रूप से पाकिस्तान के रास्ते होकर गुजरता है. दोनों देशों के बीच सड़क से होने वाला यह व्यापार अब ठप पड़ गया है.

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फ़ेडेरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइज़ेशन (एफ़आईईओ) ने कहा है कि गाड़ियों की आवाजाही अब रोक दी गई है जिस कारण लाखों डॉलर के सामान का आयात और निर्यात रुक गया है.

फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय ने बीबीसी से कहा "तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान बॉर्डर सील कर दिया है. अफ़ग़ानिस्तान से होने वाला ज़्यादातर आयात पाकिस्तान के ट्रांजिट रूट से होकर आता है. फिलहाल वो रूट बंद है. जब तक उस सीमा को खोला नहीं जाता है. उस सीमा से व्यापार बंद है. निर्यातक चिंतित हैं. वो असमंजस की स्थिति में हैं."

उन्होंने कहा, "फिलहाल स्थिति चिंताजनक है. हम स्थिति पर नज़र बनाए हैं."

ड्राई फ़्रूट
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अफ़ग़ानिस्तान के निर्यात में साझेदार

अफ़ग़ानिस्तान का निर्यात उसके सकल घरेलू उत्पाद का 20 फ़ीसद है. यानी अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था का पांचवा हिस्सा उसके निर्यात पर निर्भर है. उसके कुल निर्यात का 45 फ़ीसद हिस्सा कालीन और रग्स है. इसके बाद सूखे मेवे (31 प्रतिशत) और औषधीय पौधे (12 प्रतिशत) आते हैं.

अगर बात उन देशों की करें जो अफ़ग़ानिस्तान के सबसे बड़े निर्यात साझीदार हैं तो पाकिस्तान (कुल निर्यात का 48 प्रतिशत) का स्थान सबसे ऊपर है. इसके बाद भारत (19 प्रतिशत) दूसरे नंबर पर है और रूस (9 प्रतिशत) तीसरे नंबर. वहीं अन्य साझेदारों में ईरान, इराक और तुर्की शामिल हैं.

India-Afghanistan Trade, भारत-अफ़ग़ानिस्तान व्यापार
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India-Afghanistan Trade, भारत-अफ़ग़ानिस्तान व्यापार

10 हज़ार करोड़ से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार

भारत बीते 20 सालों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा सहयोगी रहा है. वहां बांध, स्कूल और सड़कों के विकास में भारत ने लाखों रुपये निवेश किए हैं. अफ़ग़ानिस्तान की संसद की इमारत भी भारत की ही देन है.

भारत निर्यात के मामले में भी अफ़ग़ानिस्तान का (पाकिस्तान के बाद) दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी है.

भारत-अफ़ग़ानिस्तान के बीच बीते वर्ष (2020-21) 1.4 बिलियन डॉलर यानी लगभग 10,387 करोड़ रुपये का द्विपक्षीय व्यापार किया गया जबकि 2019-20 के वित्त वर्ष में 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग 11,131 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था.

2020-21 में भारत ने लगभग 6,129 करोड़ रुपये का निर्यात किया था और लगभग 37,83 करोड़ रुपये के उत्पादों का आयात किया था.

वहीं वित्त वर्ष 2019-20 में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान से 7410 करोड़ रुपये का निर्यात किया था और 3936.87 करोड़ रुपये का आयात किया गया.

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2001 में तालिबान सरकार के पतन के बाद अफ़ग़ानिस्तान अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला.

इसके बाद बीते 20 वर्षों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान की अर्थव्यवस्था मूल रूप से अंतरराष्ट्रीय सहायता पर ही निर्भर रही और भारत उसका एक बड़ा साझेदार देश बना.

वहां कई परियोजनाओं में निवेश के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी भी बड़े पैमाने पर हुई.

दोनों देशों के बीच व्यापार में किस कदर इजाफ़ा हुआ इसे हम इन आंकड़ों से देख सकते हैं.

2015-16 और 2019-20 के बीच अफ़ग़ानिस्तान में भारत से निर्यात में 89 फ़ीसद का इजाफ़ा देखा गया तो इसी अवधि के दौरान भारत में आयात 72 फ़ीसद बढ़ा.

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अफ़ग़ानिस्तान से क्या ख़रीदता है भारत?

दुनिया भर में आयातित सूखे मेवों, अखरोट और बादाम का 80 फ़ीसद हिस्सा यूरोप और एशिया में जाता है. 2006 से 2016 के बीच सूखे मेवे, अखरोट, बादाम का वैश्विक आयात दोगुना हो गया.

एशिया में इसके सबसे बड़े आयातक चीन, भारत और वियतनाम हैं जहां बीते डेढ़ दशक के दौरान आर्थिक विकास में तेज़ी देखी गई है.

हालांकि अफ़ग़ानिस्तान ड्राई फ़्रूट के दुनिया से सबसे बड़े निर्यातक देशों में नहीं आता है. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के ड्राई फ़्रूट के सबसे बड़े आयातक देशों में भारत है.

एफ़आईईओ के महानिदेशक अयज सहाय कहते हैं, "हम अफ़ग़ानिस्तान से जो उत्पाद आयात करते हैं उसका आधे से अधिक हिस्सा ड्राइ फ्रूट का है. थोड़ा फ्रेश फ्रूट है. कुछ मसाले हैं, थोड़ा प्याज भी ख़रीदते हैं. सीमाएं बंद करने से अगर किसी उत्पाद पर असर पड़ सकता है तो वो ड्राइ फ़्रूट है.

अफ़ग़ानिस्तान से ख़रीदे जाने वाले ड्राई फ़्रूट्स की लिस्ट लंबी है. वहां से भारत बादाम, अखरोट, किशमिश, अंजीर (फिग), पिस्ता, पाइन नट, सूखी खुबानी का आयात करता है.

ताज़ा फलों में खुबानी, अनार, सेब, चेरी, खरबूजा, तरबूज और कई औषधीय जड़ी बूटियां अफ़ग़ानिस्तान से आयात की जाती हैं. इसके अलावा वहां से हींग, जीरा और केसर का भी आयात किया जाता है.

अफ़ग़ानिस्तान की निर्यात रणनीति पर इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में ड्राई फ़्रूट के बड़े आयातकों में भारत एक है.

ड्राई फ़्रूट आयात करने के मामले में अमेरिका, जर्मनी और हॉन्ग कॉन्ग के बाद भारत चौथे नंबर पर है. भारत में आयात किए जाने वाले ड्राई फ़्रूट की बड़ी मात्रा अफ़ग़ानिस्तान से आती है.

निर्यात पर असर

भारत जो चीज़ें अफ़ग़ानिस्तान को बेचता है, उनमें दवाइयां, चाय और कॉफी अफ़ग़ानिस्तान प्रमुख हैं. भारत से काली मिर्च और कपास निर्यात की जाती है.

अजय सहाय कहते हैं,, "हमारा ज़्यादातर निर्यात ईरान होकर जाता है कुछ दुबई से भी जाता है. निर्यातक चिंतित हैं. वो असमंजस की स्थिति में है. डिलिवरी के लिए थोड़ा ठहरने का जिनके पास वक़्त हैं वो थोड़ा विलंब कर रहे हैं. कुछ मामलों में अफ़ग़ानिस्तान के आयातकों ने भी उत्पादकों से शिपमेंट भेजने को लेकर थोड़ा ठहरने को कहा है."

उन्होंने कहा कि व्यापारियों को सलाह दी जा रही है कि वो क्रेडिट इंश्योरेंस ज़रूर लें क्योंकि आने वाले दिनों में इसका असर पड़ सकता है.

वे कहते हैं, "निर्यातकों को सलाह दी जा रही है कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में डिलिवरी करना है तो क्रेडिट इंश्योरेंस ज़रूर लें. अफ़ग़ानिस्तान की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पेमेंट पर किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, बैंकिंग सुविधाएं क्या होंगी, बिजनेस पर किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, ये मालूम नहीं हैं. लिहाजा फिलहाल हम इस पर नज़र बनाए हैं. लेकिन जब भी इस तरह की कोई स्थिति उत्पन्न होती है तो कुछ दिन तक व्यापार पर उसका असर ज़रूर पड़ता है."

वे कहते हैं, "चूंकि भारत से निर्यात का एक बहुत ही सूक्ष्म हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान को जाता है यानी ये मात्रा इतनी बड़ी नहीं है कि इससे बाज़ार प्रभावित हो सके. हां, इसका किसी व्यक्तिगत निर्यातक पर असर ज़रूर पड़ सकता है लेकिन भारत में किसी एक सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़े ये संभव नहीं है."

हालांकि सहाय ये भी कहते हैं कि जब भी किसी सोर्स से आयात रुकता है तो अटकलों में कीमतें बढ़ जाती हैं और अगर व्यापारिक रिश्ते बंद कर दिए जाएं तो निश्चित ही ड्राइ फ़्रूट की कीमतों पर असर पड़ेगा.

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