नागपुर से 2 महीने पहले निकाला गया शख्स तालिबान में हुआ शामिल! बंदूक थामे सामने आई तस्वीर

नागपुर से 2 महीने पहले निकाला गया शख्स तालिबान में हुआ शामिल, बंदूक थामे सामने आई तस्वीर वायरल

नई दिल्ली, 21 अगस्त: अफगानिस्तान में अब तालिबान का कब्जा हो गया है। तालिबान का दावा है कि अब वो पहले की तरह नहीं है और उदारवाद हो गया है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में तालिबान की जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई है, वो तालिबान के दावे को झूठा साबित कर रही है। तालिबान ने रविवार (15 अगस्त) को राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद काबुल पहुंचकर अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया था। वहीं भारत में वैध रूप से रह रहे जिस अफगानी नागरिक को दो महीने पहले निकाला गया था वो अब तालिबान में शामिल हो गया है। उसकी बंदूक थामे हुई तस्वीर सामने आई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार (20 अगस्त) को यह जानकारी दी है।

नागपुर से 2 महीने पहले भेजा गया था अफगानिस्तान

नागपुर से 2 महीने पहले भेजा गया था अफगानिस्तान

नागपुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि अफगानी व्यक्ति नूर मोहम्मद को इस साल जून 2021 में नागपुर में गिरफ्तार कर अफगानिस्तान भेजा गया था। अब सोशल मीडिया पर एक राइफल लिए हुए शख्स की तस्वीर सामने आई है। जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि वह नूर मोहम्मद है। पुलिस ने कहा है कि संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बंदूक थामे सामने आई तस्वीर में दिख रहा शख्स नूर मोहम्मद है। नूर मोहम्मद की वायरल तस्वीर नागपुर में उसके दोस्तों के जरिए पुलिस तक पहुंची है।

पिछले 10 सालों से नागपुर में रह रहा था नूर मोहम्मद

पिछले 10 सालों से नागपुर में रह रहा था नूर मोहम्मद

पुलिस ने कहा है कि 30 वर्षीय नूर मोहम्मद अजीज बीते 10 सालों से अवैध रूप से नागपुर में रह रहा था। नूर मोहम्मद नागपुर के डिगोरी इलाके में किराए के एक मकान में रहता था। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी, उसके बाद ही नूर मोहम्मद की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकर पुलिस ने उसे 23 जून 2021 को गिरफ्तार कर अफगानिस्तान निर्वासित कर दिया था।

पर्यटक वीजा पर नूर मोहम्मद आया था नागपुर

पर्यटक वीजा पर नूर मोहम्मद आया था नागपुर

नागपुर पुलिस के मुताबिक ऐसा हो सकता है कि निर्वासन के बाद नूर मोहम्मद तालिबान में शामिल हो गया था। पुलिस को जांच के बाद पता चला था कि 2010 में नूर मोहम्मद 6 महीने के पर्यटक वीजा पर नागपुर आया था। उसके बाद नूर मोहम्मद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में शरणार्थी का दर्जा देने के लिए आवेदन किया था। लेकिन नूर का आवेदन खारिज हो गया था।

नूर मोहम्मद का भाई भी तालिबान में

नूर मोहम्मद का भाई भी तालिबान में

नागपुर पुलिस की पहले की जांच में पता चला था कि नूर मोहम्मद का असली नाम अब्दुल हक है और उसका भाई तालिबान के साथ काम करता था। पुलिस ने कहा है कि नूर मोहम्मद सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव था और उसने धारदार हथियार के साथ एक फोटो पोस्ट की थी। पुलिस का दावा है कि वह जिस अकाउंट को हैंडल करता था, वह कुछ आतंकियों का पीछा कर रहा था। इसलिए उसे निर्वासित करना एक बेहतर विकल्प था क्योंकि उसके खिलाफ अपराध दर्ज करने से वह भारत में लंबे समय तक रहता।

नूर मोहम्मद के कंधे पर गोली के थे निशान

नूर मोहम्मद के कंधे पर गोली के थे निशान

नागपुर पुलिस के मुताबिक नूर मोहम्मद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके बाएं कंधे के पास एक बंदूक की गोली के आर-पार होने के निशान और जख्म भी मिले थे। पुलिस ने कहा कि वह यहां कंबल बेचने का बिजनेस करता था। वह विवाहित था। पुलिस ने उसके किराए के आवास की तलाशी ली थी लेकिन वहां कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला था।

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