'समलैंगिक होने की वजह से नहीं बन पा रहा हाईकोर्ट का जज', सौरभ कृपाल ने केंद्र पर फिर उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ कृपाल का नाम पिछले कुछ सालों से चर्चा में है। उनका चयन हाईकोर्ट के जज के रूप में होना था, लेकिन 2017 से ये प्रक्रिया रूकी हुई है। अब उन्होंने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए हैं। साथ ही साफतौर पर कहा कि उनके समलैंगिक होने की वजह से उनका जज के तौर पर प्रमोशन रुका हुआ है। अगर सौरभ कृपाल की नियुक्त होती है, तो वो देश के पहले समलैंगिक जज होंगे।

न्यूज चैनल NDTV को दिए इंटरव्यू में सौरभ कृपाल ने कहा कि मेरी नियुक्त रुकने का कारण मेरा समलैंगिक होना है। मुझे नहीं लगता कि सरकार अनिवार्य रूप से खुले तौर पर समलैंगिक व्यक्ति को बेंच में नियुक्त करना चाहती है। उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यही इस सिस्टम के साथ सबसे बड़ी समस्या है। वो ये कभी नहीं बताते कि वे अपना निर्णय क्यों लेते हैं। समस्या ये भी है कि सरकार कानून का पालन नहीं कर रही।
आईबी ने दी थी ये रिपोर्ट
सौरभ कृपाल की नियुक्ति की सिफारिश कई सालों पहले की गई थी, लेकिन करीब 5 साल से केंद्र ने उस पर विचार नहीं किया। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर स्वीकारा है कि वो समलैंगिक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका नाम दिल्ली हाईकोर्ट के जज के तौर पर प्रस्तावित था, लेकिन इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट ने समस्या खड़ी कर दी। जिसमें बताया गया कि कृपाल का पार्टनर एक यूरोपीय नागरिक है, जो सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर आईबी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 2019 और 2020 के बीच तीन बार सौरभ कृपाल से जुड़ी सिफारिश पर अंतिम निर्णय लेने में देरी की। फिर नवंबर 2021 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता में कॉलेजियम ने केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कृपाल की पदोन्नति को मंजूरी दी। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने उनके नाम की घोषणा नहीं की है।
कॉलेजियम पर कही ये बात
वहीं कॉलेजियम सिस्टम पर सौरभ कृपाल ने कहा कि मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो सोचते हैं कि कॉलेजियम एक अच्छी प्रणाली है। मुझे लगता है कि इसमें कई खामियां हैं। इसमें सुधार की जरूरत है। शायद नियुक्ति में सरकार की कुछ औपचारिक भूमिका होनी चाहिए।












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