नेट-जीरो की मंजिल पर अडानी समूह की बड़ी छलांग, SBTi की मुहर के साथ अम्बुजा-एसीसी सीमेंट बने नेट-जीरो चैंपियन
अडानी पोर्टफोलियो की प्रमुख सीमेंट और निर्माण सामग्री कंपनी अम्बुजा सीमेंट्स और एसीस ने निरंतर विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ये दोनों कंपनियाँ भारत की पहली अग्रणी सीमेंट कंपनियाँ बन गई हैं, जिनके नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को सायंस बेस्ड टार्गेट इनिशिएटिव (SBTi) द्वारा मान्यता प्राप्त हुई है। SBTi का कॉरपोरेट नेट-जीरो स्टैंडर्ड वैश्विक स्तर पर जलवायु विज्ञान के अनुरूप कॉरपोरेट नेट-जीरो लक्ष्यों को तय करने का एकमात्र मान्यता प्राप्त ढांचा है।
इस वैलिडेशन ने अम्बुजा सीमेंट्स और एसीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाया है कि ये कंपनियां आसान नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए आवश्यक कदम उठा रही हैं और भारत में कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इससे ये कंपनियाँ पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक गति और पैमाने पर उत्सर्जन में कटौती के प्रति प्रतिबद्ध दिखती हैं।

अडानी समूह के सीईओ (सीमेंट व्यवसाय) विनोद बहेटी ने कहा, "अम्बुजा सीमेंट्स और एसीसी की सतत विकास की पहल में अग्रणी भूमिका पर हमें गर्व है। SBTi द्वारा हमारे नेट-जीरो लक्ष्यों की मान्यता हमारे उस संकल्प को मजबूत करती है कि हम विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ लेकर चलें। हम दुनिया के 9वें सबसे बड़े सीमेंट निर्माता हैं और Cemex, Heidelberg और Holcim के बाद इतने बड़े पैमाने पर नेट-जीरो लक्ष्य की मान्यता प्राप्त करने वाली एकमात्र कंपनी हैं। यह हमारा अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक और मजबूत कदम है, एक स्वच्छ और सतत भविष्य की दिशा में।"
अम्बुजा और एसीसी ने औद्योगिक अकार्बनिकरण की दिशा में कई अग्रणी कदम उठाए हैं। ये कंपनियाँ डायरेक्ट डिकार्बोनाइजेशन को प्राथमिकता देंगी और SBTi के मानकों के अनुसार शेष उत्सर्जन को न्यूट्रल करने के लिए काम करेंगी। हरित ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधन, ऊर्जा दक्षता, तकनीकी विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उठाए गए कदमों ने इन लक्ष्यों को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि अम्बुजा सीमेंट्स वैश्विक स्तर पर अलायंस फॉर इंडस्ट्री डिकार्बोनाइजेशन (AFID) का हिस्सा बनने वाली पहली सीमेंट कंपनी है, जिसे इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) संचालित करती है। साथ ही, यह वर्ल्ड एनर्जी फेडेरेशन की ट्रांजिशनिंग इंडस्ट्रियल कलस्टर पहल की सदस्य भी है।
अडानी समूह का भारत की हरित ऊर्जा क्रांति में $100 बिलियन का निवेश है, जिसके तहत 2030 तक 14.2 गीगावाट से बढ़ाकर 50 गीगावाट तक अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा रही है। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत अम्बुजा सीमेंट्स वित्त वर्ष 2028 तक अपनी 60% ऊर्जा जरूरतें नवीकरणीय और हरित स्रोतों से पूरी करने का लक्ष्य रखती है-जिसमें 1 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा तथा 376 मेगावाट WHRS शामिल हैं। इनमें से 299 मेगावाट और 186 मेगावाट की क्षमताएं पहले ही स्थापित हो चुकी हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य में नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। समूह के साझा संसाधन और क्षमताएं अम्बुजा सीमेंट्स और एसीसी को उत्सर्जन में तेज कटौती करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने में मदद करेंगी। एसबीटी-आई की यह मान्यता महज़ एक उपलब्धि ही नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संकेत है। अम्बुजा सीमेंट्स और एसीसी ने यह सिद्ध कर दिया है कि जलवायु के लिए साहसिक कदम न केवल संभव हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं।












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