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आप-कांग्रेस गठबंधन को लेकर शीला दीक्षित-अजय माकन भिड़े, दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव को लेकर जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की लगातार कोशिश की, लेकिन इन कोशिशों के विफल होने के बाद भी गठबंधन के रास्ते पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं। दरअसल दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के दिल्ली अध्यक्ष पीसी चाको आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं थे, यही वजह है कि आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन से शीला दीक्षित ने साफ इनकार कर दिया है।

पार्टी के भीतर दो राय

पार्टी के भीतर दो राय

कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ता आप के साथ गठबंधन के बिल्कुल खिलाफ थे, लिहाजा पार्टी को इन कार्यकर्ताओं के दबाव के चलते इस गठबंधन से दूरी बनानी पड़ी। ना सिर्फ कार्यकर्ताओं बल्कि पार्टी के दो शीर्ष नेताओं के बीच भी गठबंधन को लेकर दो मत खुलकर सामने आ गए हैं। एक तरफ जहां शीला दीक्षित आप के साथ गठबंधन के खिलाफ हैं तो दूसरी तरफ पूर्व दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता अजय माकन आप के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं। हालांकि पहले अजय माकन आप के धुर विरोधी रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने गठबंधन को लेकर पार्टी से जुदा राय सामने रखी है।

माकन का शीला दीक्षित से बड़ा सवाल

माकन का शीला दीक्षित से बड़ा सवाल

अजय माकन का कहना है कि मौजूदा हालात में आप के साथ गठबंधन किए बिना चुनाव लड़ना ऐसा है जैसे दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों को भाजपा को तोहफे में देना। पार्टी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस कमेटी की बैठक में माकन ने कहा कि आप के खिलाफ जितने विरोध प्रदर्शन और मोर्चे मैंने निकाले हैं उतने किसी ने नहीं निकाले हैं। जानकारी के अनुसार शीला दीक्षित ने राहुल गांधी से कहा है कि दिल्ली में कांग्रेस पहले से बेहतर कर रही है, जिसपर पलटवार करते हुए अजय माकन ने कहा कि अगर ऐसा है तो क्या आपके बेटे संदीप दीक्षित इस बार पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे।

हमे जीतने के लिए लड़ना चाहिए

हमे जीतने के लिए लड़ना चाहिए

अजय माकन का तर्क है कि अगर हम चुनाव लड़ रहे हैं तो हमे चुनाव जीतने के लिए लड़ना चाहिए ना कि दूसरे पायदान पर रहने के लिए। अगर आप-कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो दोनों के वोटों का बंटवारा होगा और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। सूत्रों की मानें तो पीसी चाको ने अजय माकन की राय पर सहमति जाहिर की है। लेकिन गठबंधन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा यह है कि दिल्ली कांग्रेस के कई नेताओं ने इसके खिलाफ अपनी राय जाहिर की है।

दिल्ली कांग्रेस के नेता गठबंधन के खिलाफ

दिल्ली कांग्रेस के नेता गठबंधन के खिलाफ

दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद जेपी अग्रवाल का कहना है कि अगर कांग्रेस आप के साथ गठबंधन करती है तो उसे इसका नुकसान होगा, पर्टी को मजबूती के साथ चुनाव लड़ना चाहिए, हमारी मौजूदा स्थिति बेहतर है। हमे ना सिर्फ भाजपा बल्कि आप सरकार की असफलताओं को भी लोगों के सामने रखना चाहिए। पूर्व दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने भी गठबंधन का विरोध करते हुए कहा कि दिल्ली यूनिट अपने दम पर चुनाव लड़ने में सक्षम है, लिहाजा हमे आप को ऑक्सीजन नहीं देना चाहिए जबकि वह डूबती पार्टी है। मुझे केजरीवाल पर भरोसा नहीं है। पार्टी के वर्किंग प्रेसिडेंट हारून यूसुफ ने कहा कि आप के सिलेंडर का ऑक्सीजन खत्म हो गया है, ऐसे में अगर हम आप के साथ गठबंधन करते हैं तो अगले 20 साल तक दिल्ली में वापसी नहीं कर पाएंगे।

खुले हैं अभी दरवाजे

खुले हैं अभी दरवाजे

लेकिन सूत्रों की मानें तो दोनों ही पार्टियां लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन करना चाहती थीं। पार्टी के सूत्रों की मानें तो अभी तक दिल्ली में गठबंधन के मामले पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप नहीं किया है, माना जा रहा है कि कांग्रेस की गठजोड़ के मसले के लिए बनी एंडनी कमेटी के साथ दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद कुछ अहम फैसलो हो सकता है, लिहाजा यह मान लेना कि दिल्ली में गठबंधन के रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए हैं, कहना गलत है।

इसे भी पढ़ें- कांग्रेस से गठबंधन ना होने पर लाल पीले 'भगवा' क्यों हैं केजरीवाल?

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