आधार पर फैसला: जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने क्यों ‘आधार’ को कहा पूरी तरह असंवैधानिक
नई दिल्ली। आधार की संवैधानिकता और अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार से पैन को जोड़ने का फैसला बरकरार रहेगा लेकिन साथ ही कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते से आधार को जोड़ना अब जरूरी नहीं है ना ही आधार को मोबाइल से लिंक करने की जरूरत है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला एकमत नहीं रहा है। आधार की संवैधानिकता को लेकर सभी जजों की एक राय नहीं थी। आधार बिल को मनी बिल के तौर पर पारित किये जाने को लेकर जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने अपनी अलग राय रखी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आधार की वैधता को 4: 1 से कायम रखा।

आधार पर फैसला सुनाते वक्त न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने भी अपना अलग फैसला पढ़ा लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वो चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस ए एम खानविलकर द्वारा बहुमत के फैसले के साथ व्यापक रूप से सहमत हैं। लेकिन जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने इस पर अपनी असहमति जताई।
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आधार एक्ट, मनी बिल नहीं
अपना असंतोष जताते हुए न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार की पूरी परियोजना में 200 9 से ही संवैधानिक तौर पर गड़बड़ी रही है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का आधार विधेयक को मनी बिल के रूप में वर्गीकृत करना गलत था। क्योंकि इसने आधार विधेयक में राज्यसभा की भूमिका को सीमित करके कानून बनाने की संघीय प्रक्रिया को खारिज कर दिया था। अपने फैसले में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि साधारण बिल को मनी बिल घोषित करना राज्यसभा को उसके अधिकारों से वंचित रखना है। लिहाजा आधार एक्ट को मनी बिल नहीं कहा जा सकता। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार एक्ट संविधान के अनुच्छेद 110 (1) के अनुरूप नहीं है इसलिए ये एक्ट गैर-संवैधानिक है।
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आधार से निगरानी का जोखिम
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार से निगरानी किए जाने का गंभीर जोखिम है और आधार के तहत स्टोर डेटा की सुरक्षा से भी समझौता हो सकता है। याचिकाकर्ताओं के लगभग सभी तर्कों से सहमत होते हुए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है क्योंकि इससे व्यक्तियों और मतदाताओं की प्रोफाइलिंग हो सकती है।

व्यक्ति की आजादी और गरिमा महत्वपूर्ण
अपने फैसले में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ आगे कहते हैं कि व्यक्ति की आजादी और गरिमा को किसी एल्गोरिथ्म या फॉर्मूले के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि स्वतंत्रता के 7 वें दशक में संविधान को औपनिवेशिक रंग से मुक्त किया जाना चाहिए। आधार पर फैसला सुनाने वाली प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए के सिकरी, जस्टिस ए एम खानविल्कर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल थे।
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