दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में से 63 भारत के, क्या आपका शहर भी है शामिल? देखें लिस्ट
स्विस फर्म IQAir द्वारा जारी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत में वायु प्रदूषण में वृद्धि देखी गई है।
नई दिल्ली, 22 मार्च। स्विस फर्म IQAir द्वारा जारी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में भारत में वायु प्रदूषण में वृद्धि देखी गई है। हालांकि पिछले तीन सालों की बात करें तो भारत में वायु की गुणवत्ता में सुधार देखा गया था। भारत में घातक और सूक्ष्म पीएम 2.5 प्रदूषक का स्तर 58.1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों से 10 गुना अधिक है। वायु प्रदूषण को लेकर भारत का कोई भी शहर डब्ल्यूएचओ के मानकों पर खरा नहीं उतरा।
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उत्तर भारत की हालत सबसे बदतर
सबसे बदतर हालत उत्तर भारत की है। वहीं दिल्ली लगातार दूसरे वर्ष दुनिया की सबसे प्रदूषति राजधानी बनी हुई है, पिछले वर्ष की तुलना में दिल्ली में प्रदूषण लगभग 15 प्रतिशत बढ़ा है। यहां वायु प्रदूषण का स्तर पीएम 2.5 के 96.4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होने के साथ डब्ल्यूएचओ की सुरक्षा सीमा से लगभग 20 गुना अधिक था।
वायु प्रदूषण में किस स्थान पर दिल्ली
दिल्ली का वायु प्रदूषण विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर है। वहीं दुनिया का सबसे प्रदूषित स्थान राजस्थान का भिवाड़ी है। इसके बाद दूसरे स्थान पर है गाजियाबाद। दुनिया के शीर्ष 15 सबसे प्रदूषित शहरों में से 10 अकेले भारत में हैं, और इनमें से ज्यादातर शहर दिल्ली के आसपास हैं।
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ज्यादातर प्रदूषित शहर यूपी-हरियाणा के
वहीं अगर दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों की बात करें तो इनमें से 63 अकेले भारत में हैं और इनमें से ज्यादातर शहर उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हैं। शिकागो विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक वायु गुणवत्ता सूचकांक बताता है कि यदि दिल्ली और लखनऊ का वायु गुणवत्ता का स्तर डब्ल्यूएचओ के मानकों को पूरा करे तो यहां के निवासी की आयु एक दशक और बढ़ सकती है।
ये है वायु प्रदूषण के प्रमुख कारक
वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहन उत्सर्जन, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र, औद्योगिक अपशिष्ट, खाना पकाने के लिए बायोमास जलाना और निर्माण क्षेत्र शामिल है। बता दें कि पिछली साल नवंबर में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर के कारण दिल्ली के आसपास के कई बड़े बिजली संयंत्रों के साथ-साथ कई उद्योगों को पहली बार बंद किया गया था। वायु प्रदूषण की वजह से भारत को हर साल लगभग 150 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। ह्रदय और फेफड़ों की बीमारियों और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों के अलावा वायु प्रदूषण की वजह से अनुमानत: प्रति मिनट तीन लोगों की मौत हो रही है।
सभी मेट्रो शहरों में बढ़ा प्रदूषण
चेन्नई को छोड़कर सभी छह मेट्रो शहरों में पिछले साल वायु प्रदूषण के स्तर में वृद्धि देखी गई। दिलचस्प बात यह है कि 2021 के सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में हवा की गुणवत्ता और खराब हुई है। संसद में हाल ही में एक लिखित नोट में बताया गया कि पिछले साल दिल्ली में खराब से गंभीर वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या 168 थी, जबकि इससे पिछले साल यह संख्या 139 दिन थी। यानी खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों में 21 प्रतिशत का उछाल देखा गया है।
केंद्र ने पहली रिपोर्ट को कर दिया था खारिज
गौरतलब है कि साल 2020 में केंद्र ने वायु गुणवत्ता को लेकर इस रिपोर्ट के पहले संस्करण को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से उपग्रह और अन्य माध्यमिक डेटा पर आधारित है और इसका जमीनी हकीकत से कोई लेना देना नहीं है।












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