पृथ्वी जैसे रहने योग्य 60 संभावित ग्रहों का पता चला, AI टूल से भारतीय खगोलविदों को मिली सफलता
बेंगलुरु, 10 फरवरी: भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के शोधार्थियों ने कमाल कर दिया है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित एक ऐसा टूल विकसित किया है, जिसकी मदद से वे कम से कम 60 ऐसे ग्रहों का पता लगाने में सफल हुए हैं, जिसके पृथ्वी की तरह ही रहने योग्य होने की संभावना है। इसके लिए जिस एआई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है उसे 'मल्टी स्टेज मेमेटिक बाइनरी ट्री एनोमेली आईडेंटिफायर' का नाम दिया गया है। इस शोध में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स और बिट्स पिलानी, गोवा कैंपस के शोधार्थियों ने मिलकर काम किया है।

पृथ्वी जैसी विशेषता प्रदर्शित करने वाले ग्रहों का पता लगाया
भारतीय खगोलविदों की एक टीम ने कुछ ऐसे ग्रहों का पता लगाया है, जो पृथ्वी जैसी ही विशेषताएं प्रदर्शित करती हैं। इसके लिए खगोलविदों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित अल्गोरिद्म का इस्तेमाल किया है। इसके लिए उन्होंने जीवन की संभावना नहीं दिखाई पड़ने वाले हजारों ग्रहों में से पृथ्वी को एक विसंगति के रूप में इस्तेमाल करते हुए, एक ऐसा नया तरीका ढूंढ़ा है, जिससे कि रहने योग्य उच्च संभावनाओं वाले ग्रहों की पहचान हो सके। इस खोज के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स ने बीआईटीएस पिलानी, गोवा कैंपस के खगोलविदों के साथ मिलकर काम किया है।

'हमारी आकाशगंगा में ही अरबों ग्रह हो सकते हैं'
वैज्ञानिकों के हिसाब से सिर्फ हमारी आकाशगंगा में ही अरबों ग्रह हो सकते हैं और शायद इनकी संख्या तारों से भी कहीं ज्यादा हो। इसलिए यह सवाल उठता रहा है कि क्या दूसरे ग्रह भी हैं, जहां जीवन की संभावना है और यदि है तो यह पता लगाने का तरीका क्या है, कि कहां जीवन हो सकता है? शोधकर्ताओं की ओर से बयान में कहा गया है, 'हजारों ग्रहों में पृथ्वी एकमात्र ग्रह है जो रहने योग्य है, जिसे एक विसंगति के रूप में परिभाषित किया गया। हमने पता लगाया कि क्या इसी तरह के 'अनोमली कैंडिडेट' विसंगति का पता लगाने वाले नए तरीके का इस्तेमाल करके पाए जा सकते हैं।'

रहने योग्य 60 संभावित ग्रहों का पता चला
शोध के अनुसार, पुष्टि किए जाए चुके लगभग 5,000 ग्रहों में से 60 संभावित ग्रह रहने योग्य हैं, जबकि लगभग 8,000 संभावित ग्रह प्रस्तावित हैं। इन ग्रहों को नहीं-रहने योग्य' एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल का बाहरी ग्रह) के विशाल समूह में से रहने योग्य संभावनाओं वाले विलक्षण ग्रहों रूप में देखा जा सकता है। यह शोध रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी की मासिक (एमएनआरएएस) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इस एआई तरीके पर आधारित तकनीक को मल्टी स्टेज मेमेटिक बाइनरी ट्री एनोमेली आईडेंटिफायर (एमएसएमबीटीएआई) नाम दिया गया है। ये एक नए मल्टी-स्टेज मेमेटिक अल्गोरिद्म (एमएसएमए) पर आधारित है। ये तरीका 'मीम' की सामान्य अवधारणा पर काम करता है। जिसमें ज्ञान या व्यक्ति के विचार एक-दूसरे के बीच उनका अनुकरण करते हुए या नकल के आधार पर ट्रांसफर होती हैं।

दो बड़े वैज्ञानिकों की देखरेख में तकनीक विकसित
इसमें उद्योगों की अवधारणा (इंडस्ट्रीयल ऐप्लिकेशन) को ही विसंगति की पहचान के लिए इस्तेमाल किया गया है। इसके बारे में टीम कहती है- यही तकनीक रहने लायक ग्रह का पता लगाने के लिए इसलिए सक्षम है, क्योंकि दोनों ही मामलों में विसंगति का पता लगाने वाले डिटेक्टर 'असंतुलित' डेटा से डील करता है। विसंगतियों को पता लगाने वाले यह नई आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित अल्गोरिद्म को बिट्स पिलानी गोवा कैंपस के प्रोफेसर स्नेहांशु साहा और आईआईए के डॉक्टर मार्गरीटा सफोनोवा की निगरानी में विकसित किया गया है।

खगोलविदों को उम्मीदों से बेहतर परिणाम मिले
इस शोध से कुछ ग्रहों की पहचान हुई, जो प्रस्तावित तकनीक के माध्यम से पृथ्वी के समान ही विषम विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं और खगोलविदों को उम्मीदों से बेहतर परिणाम मिले हैं। विज्ञान और तकनीक मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि यह तरीका एक्सोप्लैनेट के भविष्य के विश्लेषण को बहुत ही आसान बना देगा। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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