झारखंड में 53 परिवारों का कराया गया धर्म परिवर्तन

झारखंड में 53 ईसाई परिवारों को हिंदू धर्म में परिवर्तित कराया गया, आरएसएस और अन्य एनजीओ चला रही है जड़ो में वापसी का अभियान

नई दिल्ली। झारखंड के एक अरकी में आरएसएस ने पिछले एक महीने के भीतर 53 ईसाई परिवारों को हिंदू धर्म में परिवर्तित करने में सफलता पाई है, आरएसएस ने अपने अभियान क्रिस्टियानिटी फ्री के तहत 53 ईसाई परिवारों को हिंदू परिवार में परिवर्तित कराया है आरएसएस कार्यकर्ता ने दावा किया कि जिस जगह पर यह धर्म परिवर्तन कराया गया है वह सिंदरी पंचायत के तहत आता है। आरएसएस कार्यकर्ता का कहना है कि यह इलाका मुख्य रुप से खनिज के लिए जाना जाता है इस पर पिछले 10 सालों में इसाई मिशनरियों ने कब्जा कर रखा है।

धर्म परिवर्तन नहीं जड़ो में वापसी है

धर्म परिवर्तन नहीं जड़ो में वापसी है

आरएसएस संयोजक लक्ष्मण सिंह मुंडा का कहना है कि आप इसे धर्म परिवर्तन नहीं कह सकते हैं, हम अपने बिछड़े भाई-बहनों को उनके धर्म में वापस ला रहे हैं। मुंडा यहां इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं, उनका कहना है कि हम क्रिस्चियन फ्री ब्लॉक चाहते हैं, जल्द ही यहां के ग्रामीण अपने जड़ों में वापस लौट आएंगे। यहां के आदिवासियों को ईसाई मिशनरी ने अपने ओर लालच देकर शामिल किया था। लक्ष्मण मुंडा जोकि यहां खूंटी जिले के के भाजपा उपाध्यक्ष भी हैं

जबरन बनाया गया था ईसाई

जबरन बनाया गया था ईसाई

आरएसएस सहित इसकी अन्य सहयोगी संस्थाओं ने आरोप लगाया है कि यहां के लोगों को डरा धमकाकर उनका धर्म बदलवाया गया है। 7 अप्रैल को कम से कम 7 ईसाई परिवारों ने अपना शुद्धिकरण कराया। इन लोगों के माथे पर चंदन का लेप लगाया गया, इनके पैरों को धुलवाया गया और स्थानीय पंडित ने इनका तिलक करवाया। गौरतलब है कि झारखंड में 26.2 फीसदी आदिवासी हैं, यहां की कुल आबादी 3.3 करोड़ है, जिसमें से 4.5 फीसदी लोग ईसाई धर्म के हैं।

राज्य सरकार ने भी जताई चिंता

राज्य सरकार ने भी जताई चिंता

पिछले कुछ सालों में कई लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया है, इस पर राज्य सरकार ने भी चिंता जाहिर की थी, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उन लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी जो लोग जबरन धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। यहां आरएसएस वह एनजीओ वनवासी कल्याण केंद्र आदिवासियों के घर-घर जाती है, लोगों के साथ बैठकें करती है, इसके जरिए वह यहां के लोगों को मिशनरीज के एजेंडे से सचेत करते हैं। यहां एक परिवार के मुखिया दशरथ मुंडा का कहना है कि आरएसएस हम लोगों को जबरन धर्म बदलने को नहीं कह रहा है, जबकि वह हम लोगों को जानकारी मुहैया करा रहा है, वह हमें बता रहा है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने का क्या महत्व है। उनका कहना है कि किसी भी परिवार पर दबाव नहीं बनाया गया, जिन परिवारों ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार किया था उनपर दबाव नहीं बनाया गया।

आरएसएस दबाव नहीं बना रहा

आरएसएस दबाव नहीं बना रहा

सरन समुदाय के धर्मगुरु बंधन तिग्गा का कहना है कि आरएसएस को इस बात की चिंता है कि आदिवासियों को ईसाई धर्म में बदलवाया जा रहा है, जोकि हिंदुओं के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि घर वापसी अभियान ने भाजपा सरकार के दौरान तेजी पकड़ी है, जब खुद मुख्यमंत्री धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे को लोगों के बीच कहते हैं तो जाहिर है कि आरएसएस की गतिविधि बढ़ेगी।

आदिवासी खुद की पहचान चाहते हैं

आदिवासी खुद की पहचान चाहते हैं

सरन संप्रदाय के लोग प्रकृति की पूजा करते हैं और वह खुद को गैर हिंदू मानते हैं, वह खुद को गैर मुस्लिम, गैर ईसाई भी मानते हैं, जिसकी वजह से उन्हें हिंदू माना जाता है, जनगणना और अन्य सर्वे में भी उन्हें हिंदू ही माना जाता है। लेकिन इस आदिवासी समूह ने सरकार से खुद की पहचान को स्वीकार करने की गुहार लगाई है। हालांकि तिग्गा घर वापसी का विरोध नहीं करते हैं लेकिन कहते हैं कि इसे जबरन नहीं कराना चाहिए।

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