दुनिया भर में मची उथल-पुथल के बीच सागर अदाणी ने बताया भारत के लिए 'सुरक्षा कवच'
मिडल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ग्लोबल फ्यूल मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है। इस बीच, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा है कि बाहरी एनर्जी झटकों से निपटने के लिए भारत के पास सबसे कारगर लॉन्ग-टर्म रास्ता यही है कि वह अपनी इकोनॉमी का तेजी से इलेक्ट्रिफिकेशन करे और बड़े पैमाने पर घरेलू बिजली क्षमता विकसित करे।

नई दिल्ली में आयोजित एक ग्लोबल समिट में बोलते हुए सागर अदाणी ने कहा कि आज के दौर में किसी भी देश की मजबूती काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि वहां ऊर्जा की पहुंच, उसकी कीमत और सप्लाई कितनी सुरक्षित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हालिया अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी एक हिस्से में होने वाली उथल-पुथल कैसे शिपिंग रूट्स, कमोडिटी की कीमतों, सप्लाई चेन और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को पल भर में प्रभावित कर सकती है।
उनके मुताबिक, अब देशों के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि वे कितनी तेजी से आर्थिक विकास कर सकते हैं, बल्कि यह है कि वे अचानक आने वाली बाधाओं का कितनी मजबूती से सामना कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनौती भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि आने वाले दशकों में देश की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं, औद्योगिक विस्तार और बेहतर जीवन स्तर के लिए बड़े पैमाने पर भरोसेमंद बिजली आपूर्ति की जरूरत होगी।
सागर अदाणी ने कहा कि भारत की विकास प्राथमिकताएं सीधे तौर पर ऊर्जा की उपलब्धता से जुड़ी हैं। वॉटर सिक्योरिटी के लिए ट्रीटमेंट, पंपिंग और डिसेलिनेशन हेतु बिजली चाहिए। फूड सिक्योरिटी के लिए सिंचाई, खाद उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स के लिए ऊर्जा की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल लीडरशिप भी डेटा सेंटर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेलीकॉम नेटवर्क और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलने वाली निर्बाध बिजली पर टिकी है।
उन्होंने गौर किया कि भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत अभी भी कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक औसत से काफी कम है। इसका मतलब है कि जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, शहरीकरण तेज होगा और औद्योगिक गतिविधियां फैलेंगी, भविष्य में ऊर्जा की मांग में भारी बढ़ोतरी होगी।
सागर अदाणी ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने का अपना लक्ष्य हासिल करना है, तो देश को बिजली उत्पादन में सिर्फ मामूली बढ़ोतरी से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और स्टोरेज के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगानी होगी। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले दो दशकों में भारत को लगभग 2,000 गीगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता की आवश्यकता हो सकती है, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बिजली सस्ती, सुलभ और स्वच्छ हो।
एक व्यावहारिक और संतुलित नीति की वकालत करते हुए सागर अदाणी ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) का विस्तार तेजी से जारी रहेगा और यह भारत के भविष्य के केंद्र में होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जमीन की कमी और रिन्यूएबल सोर्सेज की अनिश्चितता (जैसे धूप या हवा का हमेशा न होना) के कारण केवल इसी से सारी चुनौतियां हल नहीं हो सकतीं। इसलिए, भारत को सोलर और विंड के साथ-साथ हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी, कुशल थर्मल जनरेशन, न्यूक्लियर पावर और स्टोरेज टेक्नोलॉजी जैसे विविध ऊर्जा विकल्पों को अपनाना होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और घरों का बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिफिकेशन ही भारत के लिए आयातित जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर अपनी निर्भरता कम करने का सबसे भरोसेमंद रास्ता है। उनकी राय में, बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता देश को अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाएगी।
भारत के पॉलिसी एनवायरमेंट का जिक्र करते हुए सागर अदाणी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर रिफॉर्म्स, मंजूरी की तेज प्रक्रिया, बेहतर ट्रांसमिशन नेटवर्क और रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहे समर्थन ने लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। उन्होंने कहा कि नीतियों में निरंतरता और काम को जमीन पर उतारने वाला गवर्नेंस ही देश को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है।
एनर्जी ट्रांजिशन में अदाणी ग्रुप की भूमिका पर उन्होंने कहा कि ग्रुप का ध्यान अलग-थलग संपत्तियां बनाने के बजाय एक इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम तैयार करने पर है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज, ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रीन हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स, पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में ग्रुप का 100 अरब डॉलर से अधिक का निवेश भारत में मौजूद बड़े अवसरों और तेजी से काम करने की जरूरत को दर्शाता है।
सागर अदाणी ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि असली मुद्दा अब यह नहीं है कि भारत को और अधिक ऊर्जा चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि वह कितनी जल्दी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत बड़े पैमाने पर प्रचुर, सस्ती और स्वच्छ बिजली देने में सफल रहता है, तो यह न केवल 140 करोड़ लोगों का भविष्य सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी एक बड़ी स्थिरता लाने वाली भूमिका निभाएगा।












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