कर्नाटक बाढ़: हम्पी साइट पर बने द्वीप से रेस्क्यू किए गए 500 टूरिस्ट, अलर्ट की अनदेखी की
बेंगलुरु। कर्नाटक में बारिश के बाद कई इलाकों में भयावह हालात बने हुए हैं। इस बीच एनडीआरएफ की टीम ने विश्व धरोहर स्थल हम्पी के पास वीरुपपुरा गद्दे (द्वीप) पर फंसे 500 पर्यटकों को रेस्क्यू किया है। वहीं कर्नाटक सरकार ने बाढ़ की चेतावनी की अनदेखी के लिए द्वीप पर बने होटल और रिसॉर्ट के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। कोप्पल के डिप्टी कमिश्नर सी सुनील कुमार ने कहा, हम होटल और गेस्ट हाउस के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेंगे।

सुनील कुमार ने कहा कि, हम होटल और गेस्ट हाउस मालिकों से एनडीआरएफ टीम को भुगतान की गए शुल्क की वसूली पर भी विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन का आरोप हैं कि, होटल मालिकों में ट्वीप पर ठहरे हुए पर्यटकों की संख्या को लेकर अधिकारियों को गुमराह किया। उन्होंने कहा था कि चार या पांच विदेशियों सहित लगभग 200 पर्यटक द्वीप पर हैं। लेकिन उस जगह से से अधिक लोग रेस्क्यू किए गए हैं।
प्रशासन ने बताया कि, द्वीप पर 16 अधिकृत होटल हैं, जिनमें कुछ अवैध भी हैं। घाटे के डर से, होटल व्यवसायियों ने जिला प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया और मेहमानों को द्वीप छोड़ने के लिए नहीं कहा। बेंगलुरु से लगभग 350 किलोमीटर दूर कोप्पल जिले में तुंगभद्रा नदी के टापू पर बाढ़ आने के बाद 27 विदेशी सहित लगभग 544 पर्यटक फंसे गए थे। शिवमोगा जिले में भारी बारिश के बाद होसपेट में टीबी डैम से नदी में पानी छोड़े जाने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने शनिवार को अलर्ट जारी किया था।
लेकिन होटल व्यवसायियों ने अलर्ट को अनदेखा कर पर्यटकों होटलों में ठहराए रखा, यही नहीं होटल मालिकों ने उन्हें आश्वासन दिलाया था कि बाढ़ आने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा। डीसी ने बताया कि, दरअसल वीक एंड था, वे नहीं चाहते थे कि, उनके बिजनेस को नुकसान हो। वे जानते थे कि, द्वीप पर बाढ़ आने वाली है इसके बावजूद भी पर्यटकों को ठहराते रहे। जो कि एक बहुत बड़ी गलती है। एनडीआरएफ और अन्य बचाव दलों को पर्यटकों को बचाने के लिए खराब मौसम में तुंगभद्रा नहीं में काम करना पड़ा। इस दौरान एक समय पर तो बचाव दल की नाव ही पलट गई जिसमें पांच कर्मी बह गए। हालांकि उन्हें बचा लिया गया।












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