जुलाई में 50 लाख वेतनभोगी कर्मचारियों ने गंवाईं नौकरी, जानिए, कितनों के सिर पर लटकी है तलवार?

नई दिल्ली। कोरोनावायरस प्रेरित लॉकडाउन से पैदा हुए कारोबारी संकट का असर ही कहेंगे कि अकेले जुलाई महीने में 50 लाख वेतनभोगी कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। यह दावा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमनी यानी CMIE द्वारा किया गया है। CMIE का कहना है कि जुलाई महीने में देश के कई राज्यों में नए सिरे से लॉकडाउन लागू होने की वजह से लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी हैं।

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महामारी संकट में अब तक करीब 1.9 करोड़ लोगों का रोजगार छिना है

महामारी संकट में अब तक करीब 1.9 करोड़ लोगों का रोजगार छिना है

CMIE डेटा कहती है कि महामारी संकट के चलते अब तक करीब 1 करोड़ 90 लाख लोगों का रोजगार छिना है, जिनमें से 50 लाख वेतनभोगी कर्मचारियों को अकेले जुलाई में नौकरी से निकाला गया है। वहीं, अप्रैल महीने में 1.8 करोड़ लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी थी। हालांकि मई में यह आंकड़ा कम हो गया था और मई महीने में यह आंकड़ा 1 लाख पर आ गया था।

जून में स्थितियों में सुधार आया था,करीब 39 लाख लोगों को नौकरी मिली

जून में स्थितियों में सुधार आया था,करीब 39 लाख लोगों को नौकरी मिली

CMIE डेटा के मुताबिक जून महीने में स्थितियों में सुधार आया था और करीब 39 लाख लोगों को नौकरियां वापस मिली थीं, लेकिन जुलाई महीने में नए मामलों की संख्या बढ़ने के साथ कई राज्यों द्वारा दोबारा लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने और प्रतिबंधों को लागू करने से 50 लाख लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ गया। यानी जुलाई माह में लॉकडाउन की शुरुआत से लेकर 31 जुलाई के बीच कोरोना महामारी करीब 1.9 करोड़ लोगों का रोजगार खा चुकी है

जून में सुधार के बाद जुलाई में नौकरी की बढ़ने की संभावना बढ़ी, लेकिन...

जून में सुधार के बाद जुलाई में नौकरी की बढ़ने की संभावना बढ़ी, लेकिन...

हालांकि जून महीने में 39 लाख लोगों के दोबारा रोजगार होने से संभावना बढ़ गई थी कि जुलाई में और सुधार होगा, लेकिन नए मामलों में तेजी ने रोजगाररत लोगों तुषारापात करते हुए बड़े पैमाने पर नौकरियां वापस छीन ली।

वेतनभोगी वर्ग में नौकरी जाने के बाद दोबारा मौका मिलना मुश्किल होता है

वेतनभोगी वर्ग में नौकरी जाने के बाद दोबारा मौका मिलना मुश्किल होता है

वेतनभोगी वर्ग में नौकरियां जाने पर चिंता जताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वर्ग में नौकरियां आमतौर पर नहीं जाती हैं, लेकिन रोजगार छिनने के बाद दोबारा अवसर मिलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में इस वर्ग में नौकरियां जाना अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता का सबब है।

पहले कहा गया कि कोरोना संकट में 12.1 करोड़ नौकरियां जा सकती थी

पहले कहा गया कि कोरोना संकट में 12.1 करोड़ नौकरियां जा सकती थी

CMIE ने अप्रैल के अपने डेटा में खुलासा किया था कि कोरोना संकट के चलते 12.1 करोड़ लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है। मई में यह आंकड़ा कम होकर 10 करोड़ पर आ गया था और उसके बाद जून में यह गिरकर 2.9 करो़ड़ ही रह गया था। अब जुलाई में यह 1.1 करोड़ ही रह गया है।

अप्रैल महीने में 30 % नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ी

अप्रैल महीने में 30 % नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ी

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में 30 फीसदी नौकरीपेशा लोगों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ी थीं, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा 3 फीसदी रह गया है। हालांकि अब भी यह बड़ा आंकड़ा है। लॉकडाउन खुलने के बाद अर्थव्यवस्था में रिकवरी की उम्मीद की जा रही है, ऐसे में वेतनभोगी वर्ग को झटका चिंता का कारण बन रहा है।

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