दिल्ली चुनाव में हर पांच में से तीन युवाओं ने दिया AAP को वोट- सबसे ताजा सर्वे
नई दिल्ली- दिल्ली विधानसभा में समाज के हर वर्ग के लोगों ने आम आदमी पार्टी की सरकार दोबारा बनाने के लिए दिल खोलकर मतदान किया है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प रहेगा कि युवा वोटरों का अरविंद केजरीवाल और उनका पार्टी की तरह रुझान कैसा रहा? खासकर फर्स्ट टाइम वोटरों का रुख क्या रहा है? चुनाव के बाद जो एक विस्तृत सर्वे आया है, उससे जाहिर होता है कि युवा वोटरों के बीच आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच अंतर बहुत ज्यादा रहा और शायद यही वजह रही कि बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ने के बावजूद वह सिर्फ 8 सीटों पर सिमट गई। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्स्ट टाइम वोटरों में आम आदमी पार्टी का जादू सिर चढ़कर बोला और खासकर महिला फर्स्ट टाइम वोटरों ने तो जैसे सत्ताधारी दल के समर्थन में वोट का पिटारा ही खोल दिया।

हर पांच में से तीन युवा वोट 'आप' को- सर्वे
दिल्ली में चुनाव बाद हुए लोकनीति के एक सर्वे में दिल्ली चुनाव में वोटिंग पैटर्न को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इस सर्वे के मुताबिक कम उम्र के युवाओं में हर पांच में से तीन मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया है। मतलब, 18 से 25 साल के बीच के 59 फीसदी वोटरों ने सत्ताधारी दल की वापसी पर मुहर लगाई है। जबकि, इस आयु वर्ग के हर तीन में से सिर्फ एक यानि 33 फीसदी युवा वोटरों ने ही भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। इसका अर्थ ये भी है कि बीजेपी के ओवरऑल वोट शेयर से इस आयु वर्ग के मतदाताओं में उसके प्रति 7 फीसदी का आकर्षण कम रहा है। सर्वे के मुताबिक 18 से 25 आयु वर्ग में बीजेपी और आप के वोट में जो 26 फीसदी का अंतर दिख रहा है, वह अंतर वोटरों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ घटती गई है। यह 2019 के लोकसभा चुनाव के ट्रेंड से ठीक उलट है, जिसमें युवाओं ने भाजपा को दिल खोलकर समर्थन किया था। अगर इन आंकड़ों की तुलना 2015 के विधानसभा चुनावों से करें तो ऐसे वोटरों में 'आप' की तरफ दो फीसदी का रुझान बढ़ा है।

फर्स्ट टाइम वोटरों में भी रहा 'आप' का दबदबा
अगर बात फर्स्ट टाइम वोटरों की करें यानि 18 से 22 वर्ष के सिर्फ 29 फीसदी लोगों ने ही भाजपा को वोट दिया है। मतलब, 18-25 वाले आयु वर्ग से भी फर्स्ट टाइम वोटरों में उसका आंकड़ा 4 फीसदी कम हो गया। लेकिन, ऐसे 60 फीसदी वोटर आम आदमी पार्टी के साथ गए हैं। इस सेगमेंट में आम आदमी को सबसे बड़ी सफलता महिला फर्स्ट टाइम वोटरों में मिली है, जिसके 68 फीसदी महिला वोटरों ने 'आप' को वोट दिया है। जबकि, महिला फर्स्ट टाइम वोटरों में बीजेपी का हिस्सा सिर्फ 29 प्रतिशत रहा है। वैसे महिला फर्स्ट टाइम वोटरों में दोनों दलों के लिए एक अच्छी बात ये है कि 2015 के मुकाबले दोनों पार्टियों के वोट इस आयु वर्ग में 6-6 फीसदी बढ़े हैं।

26 से 35 आयु वर्ग के वोटरों में भी 'आप' आगे
सर्वे के अनुसार 26 से 35 वर्ष के 54 फीसदी मतदाताओं ने आप को और 40 फीसदी ने भाजपा को वोट दिया। यानि, 18 से 25 वर्ष के 26 फीसदी के मुकाबले इस आयु वर्ग में दोनों पार्टियों के वोट का अंतर घटकर सिर्फ 14 फीसदी रह गया। लेकिन, अगर इस आयु वर्ग में महिला और पुरुष मतदाताओं की बात करें तो सिर्फ 2 फीसदी पुरुषों ने बीजेपी के मुकाबले आप को ज्यादा वोट दिए, लेकिन महिलाओं से वह भाजपा से 29 फीसदी ज्यादा वोट लेकर आगे रही। जबकि, 2015 में इस आयु वर्ग में आम आदमी पार्टी को कुल 60 फीसदी वोट मिले थे और भाजपा को महज 29 फीसदी लोगों ने वोट डाले थे।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ युवा-सर्वे
सर्वे में युवा वोटरों से कुछ और सवाल पूछे गए। मसलन, हाल के दिनों में दिल्ली में पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों की हुई पिटाई को 18 से 25 वर्ष के दो-तिहाई यानि 64 फीसदी युवाओं ने गलत करार दिया। जब उनसे सीधे जामिया कैंपस में पुलिस के घुसने और छात्रों की पिटाई पर सवाल पूछा गया तो 71 फीसदी ने पुलिस कार्रवाई को गलत ठहराया। सर्वे का दावा है कि अगर युवाओं में से विशेष तौर पर छात्रों से ये सवाल पूछे गए तो इन घटनाओं को गलत बताने वालों की संख्या ज्यादा थी।

युवा चाहते हैं पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन रहे- सर्वे
सर्वे में दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार को देने की मांग को लेकर भी सवाल किए गए। दावे के मुताबिक 52 फीसदी युवा इस बात पर सहमत थे कि दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार की अधीन होनी चाहिए। यह आंकड़ा ओवरऑल आंकड़े से 5 फीसदी ज्यादा है। सर्वे के मुताबिक युवा फीस को लेकर जेएनयू के छात्रों के प्रदर्शन के भी समर्थक दिखे। यानि, सर्वे के मुताबिक दिल्ली में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत में युवा वोटरों का सबसे अहम योगदान रहा है और उनमें भी युवा महिला वोटरों की तादाद सबसे ज्यादा है। यह आलेख लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वे के दावों पर आधारित है।












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