कोरोना से पिता की मौत का सदमा नहीं सहन कर सकी बेटी, 2 साल पहले खोई थीं आंखें अब हुआ निधन
चंड़ीगढ़। देश में कोरोना का कहर लगातार जारी है। देश में 22 लाख से अधिक लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते सैंकड़ों पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। पंजाब के लुधियाना में पुलिस लाइन में तैनात एएसआइ जसपाल सिंह की सोमवार को कोरोना से मौत हो गई। उनकी मौत के कुछ घंटे बाद सदमें के चलते उनकी 24 साल की बेटी का भी देहांत हो गया। परिवार ने कहा कि पिता के अंतिम संस्कार के कुछ घंटों बाद नवप्रीत की सदमे से मौत हुई।

पुलिसकर्मी पिता की कोरोना से हुई मौत, सदमा नहीं सह सकी बेटी
लुधियाना पुलिस लाइन में तैनात एएसआई जसपाल सिंह पिछले 24 जुलाई को रूटीन चेकअप के बाद कोरोना पॉजिटिव पाए गए और यहां के प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवा रहे थे। हालत बिगड़ने पर सात अगस्त को उन्हें पीजीआई रेफर किया गया था। सोमवार को उनकी मौत हो गई। पैतृक क्षेत्र पायल के ही श्मशानघाट में उनका संस्कार किया गया है। पुलिस अफसर के बेटे शरणदीप सिंह ने सोमवार को अपने पिता का अंतिम संस्कार किया और फिर अगले दिन अपनी बड़ी बहन नवप्रीत का अंतिम संस्कार करना पड़ा।

2 साल पहले खोई थी आंख अब हुआ निधन
शरणदीप ने नवप्रीत से अपने पिता की मृत्यु को छिपा दिया क्योंकि वह पहले से ही बीमार और कमजोर थी। जुवेनाइल डायबिटीज़ से पीड़ित नवप्रीत की 2 साल पहले आंखों की रोशनी चली गई थी। शरणदीप ने बताया कि, जब हम अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद लौटे, तो नवप्रीत को कुछ गलत होने का एहसास हुआ। उसने अपने पिता के कुशलक्षेम के बारे में पूछा और रोने लगी। हम अवाक रह गए और उससे समझाने की कोशिश करन लगे। लेकिन सारी कोशिशें बेकार साबित हुई।

बेटी से गहरा लगाव था जसपाल का
परिवार के सदस्यों के अनुसार, वह हर कुछ मिनटों में 'डैडी जी' चिल्ला रही थी। कुछ देर बाद वह बेहोश हो गई। सोमवार देऱ रात उसका निधन हो गया। परिवार के मुताबिक, दोनों के बीच गहरा रिश्ता था। जसपाल सिंह अपनी बेटी को दर्द में एक मिनट भी नहीं देख पाते थे। जब नवप्रीत 8 साल थी तब उन्हें उसकी बीमारी के बारे में पता चला था। उन्होंने बेटी के इलाज के लिए हर अस्पताल के चक्कर लगाए। ताकि उनकी बेटी ठीक हो सके।

कर्ज लेकर करवाया था बेटी की इलाज
शरणदीप ने बताया कि, पिता जी ने बहन का इलाज कराने के लिए अपनी सारी कमाई खर्च कर दी थी और कभी-कभी कर्ज भी लेना पड़ा, लेकिन उसकी हालत समय के साथ बिगड़ती चली गई। दो साल पहले जुवेनाइल डायबिटीज़ की वजह से उसकी आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई। जसपाल को अपनी बेटी का दर्द देखा नहीं जाता था। वे एक दिन भी एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे और उनका अंत भी एक साथ हुआ था।












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