MP में 20 और कांग्रेसी विधायक टूटने को तैयार, बागियों ने बंधक बनाए जाने का किया दावा
नई दिल्ली- मध्य प्रदेश में जो सियासी हालात बन रहे हैं उससे लगता है कि कमलनाथ सरकार का बचना मुश्किल है। अबतक कांग्रेस के नेता दावा कर रहे थे कि पार्टी के 22 बागी विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखा गया है। लेकिन मंगलवार को उन बागी विधायकों ने कांग्रेस के इन आरोपों का न सिर्फ खंडन किया बल्कि आरोप लगाया गया कि 20 और विधायकों को बंधक बनाकर नहीं रखा गया होता तो आज बागियों की संख्या पार्टी के औपचारिक विभाजन के पूरी हो जाती। बागी विधायकों का कहना है कि 20 और विधायक कांग्रेस छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं और वे सब भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
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20 और कांग्रेसी विधायक टूटने को तैयार-बागी विधायक
मंगलवार को कमलनाथ सरकार पर संकट उस वक्त और गहराया गया, जब 22 बागी कांग्रेसी विधायकों ने न सिर्फ सिंधिया के साथ रहने की बात कही, बल्कि यहां तक दावा किया कि उनके अलावा भी कांग्रेस में 20 और विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार बैठे हैं। कांग्रेस के बागी विधायकों ने मीडिया वालों से कहा है कि बाकी विधायक भी उनके साथ आना चाहते हैं और वे आने वाले दिनों में भाजपा में शामिल होने की भी सोच रहे हैं। कांग्रेस से बगावत करने वाले विधायकों ने यहां तक आरोप लगाया है कि उनके साथ आने को तैयार बैठे पार्टी के बाकी 20 विधायकों को बंधक बनाकर रखा गया है। उनके मुताबिक अगर वे लोग भी इस वक्त बागी विधायकों के साथ होते तो कांग्रेस औपचारिक तरीके से टूट गई होती और कानून के तहत इस ग्रुप को मान्यता भी मिल जाती। कांग्रेस के बागी विधायकों ने किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार होने की बात कही है और उन्हें भरोसा है कि उनके विधानसभा क्षेत्र के लोग उनके फैसले में उनके साथ खड़े हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस के बागी विधायकों ने पार्टी के इन आरोपों का भी साफ खंडन कर दिया गया है कि बेंगलुरु में वो किसी के दबाव में या बंधक बनाकर रखे गए हैं। उन्होंने कहा है कि वो अपनी मर्जी से बेंगलुरु आए हैं।

बागियों का कमलनाथ पर आरोप
भोपाल से बेंगलुरु आने और मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा देने के बाद मंगलवार को ये बागी कांग्रेस विधायक पहली बार मीडिया के सामने आए। इस दौरान एक महिला विधायक ने कहा कि, 'ज्योतिरादित्य सिंधिया हमारे नेता हैं, हम वर्षों से उनके साथ राजनीति कर रहे हैं, हम में से ज्यादातर लोग उन्हीं की वजह से राजनीति में हैं....हम लोग भाजपा में शामिल होने के बारी में अभी भी सोच रहे हैं। अगर हमें केंद्रीय पुलिस बल की सुरक्षा मिलती है तो हम मध्य प्रदेश जाएंगे और इसके बारे में सोचेंगे।' एक और बागी विधायक ने कहा, 'जब हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो हम लोग शांत थे। कमलनाथ जो मुख्यमंत्री बन गए तो उन्होंने हमारे क्षेत्रों के लिए फंड नहीं दिया, जबकि लगभग हर कैबिनेट मीटिंग में छिंदवाड़ा (कमलनाथ का सियासी गढ़) के लिए मंजूरी दी गई।' बागियों का आरोप है कि जब हमारे क्षेत्रों में विकास ही नहीं हो रहा तो विधायक रहने का क्या मतलब? बागियों ने आरोप लगाया कि मंत्री बनाने में भी वरिष्ठता और क्षमता का ध्यान नहीं रखा गया और राहुल गांधी से कहने पर भी कुछ नहीं हुआ।

कबतक बचेगी कमलनाथ सरकार ?
बता दें कि कमलनाथ सरकार के 6 मंत्रियों समेत 22 कांग्रेसी विधायकों ने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जबकि, स्पीकर ने सिर्फ 6 मंत्रियों का ही इस्तीफा स्वीकार किया है। अगर सभी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो बिना किसी संदेह के कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी। इसीलिए कमलनाथ सरकार राज्यपाल के दो बार के निर्देशों के बावजूद विश्वास मत हासिल करने से कन्नी काट रही है। भाजपा इस मामले में बहुमत परीक्षण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है, जिसपर अदालत ने गुरुवार को सुनवाई की बात कही है। उधर राज्यपाल लालजी टंडन भी संवैधानिक तौर पर कड़े कदम उठाने के संकेत दे रहे हैं। बहरहाल जो हालात बन रहे हैं उससे साफ लग रहा है कि कमलनाथ सरकार ज्यादा दिनों की मेहमान नहीं है।
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