इसरो साजिश केस: पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज को केरल HC से झटका, सेशन कोर्ट से मिली राहत की खत्म
तिरुवनंतपुरम, 16 नवंबर: 1994 के इसरो जासूसी मामले में पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज को केरल हाईकोर्ट से झटका लगा है। केरल हाईकोर्ट ने सिबी मैथ्यूज को गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए सेशन कोर्ट की ओर से दी गई 60 दिनों की समय सीमा को रद्द कर दिया। मैथ्यूज की याचिका पर विचार करते हाईकोर्ट ने हुए इसे खारिज कर दिया। इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन से जुड़े इस मामले में पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज चौथे आरोपी हैं। नंबी नारायणन के मामले में मैथ्यूज ने ही जांच की थी, उन पर गलत तरह से पूर्व वैज्ञानिक को फंसाने का मामला है।

एक और मामले में नंबी नारायणन को राहत
केरल हाईकोर्ट ने इसी मामले में पुलिस के एक पूर्व अधिकारी एस विजयन की याचिका भी सोमवार को खारिज कर दी। एस विजयन ने याचिका में आरोप लगाया था कि नांबी नारायणन ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के तत्कालीन जांच अधिकारियों के साथ करोड़ों रुपए का भूमि सौदा कर एजेंसी की जांच को प्रभावित किया था। न्यायमू्र्ति आर नारायण पिशारदी ने एस विजयन की याचिका खारिज कर दी।
1994 में केरल पुलिस ने साल तिरुवनंतपुरम में इसरो के टॉप साइंटिस्ट और क्रायोजनिक इंजन प्रॉजेक्ट के डायरेक्टर नंबी नारायणन समेत दो अन्य वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और डेप्युटी डायरेक्टर के चंद्रशेखर को अरेस्ट किया था। इन पर जासूसी के आरोप लगे थे। बाद में ये जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने अपनी जांच में इंटेलिजेंस ब्यूरो और केरल पुलिस के आरोप सही नहीं पाए। 1996 में सीबीआई ने चीफ जूडिशल मजिस्ट्रेट की अदालत में फाइल एक रिपोर्ट में बताया कि पूरा मामला फर्जी है और लगाए गए आरोपों के पक्ष में कोई सबूत नहीं है।
ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 2018 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नांबी नारायणन को करीब 70,000 डॉलर मुआवजा अदा करने का फैसला किया। साल 2019 में नांबी नारायणन को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।












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