मूसेवाला की हत्या में शामिल था ये 19 साल का शार्प शूटर, सबसे करीब जाकर दोनों हाथों से चलाई थीं गोलियां
नई दिल्ली, 04 जुलाई: पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के मर्डर केस में दिल्ली की स्पेशल पुलिस ने सोमवार को एक अहम गिरफ्तारी की है। दिल्ली पुलिस ने मूसेवाला की हत्या में शामिल शार्प शूटर अंकित सिरसा और उसके दोस्त सचिन भिवानी को गिरफ्तार किया है। दिल्ली के अंतरराज्यीय बस अड्डे (आईएसबीटी) से अरेस्ट हुआ अंकित सिरसा मात्र 19 साल है। अंकित की कई तस्वीरे सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रही हैं।

अंकित ने सबसे करीब से गोली चलाई थीं
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल ने कहा कि, स्पेशल सेल का प्रयास असल शूटरों को पकडने का है जिन्होंने सिद्धू मूसेवाला पर गोलियां चलाई थीं। इसी कड़ी में हमने कल देर रात करीब 11 बजे ISBT से शूटर अंकित सीरसा और सचिन भिवानी को गिरफ़्तार किया। अंकित ने सबसे करीब से गोली चलाई थीं। सचिन भिवानी और इसका एक और साथी कपिल पंडित ने वारदात से पहले और वारदात के बाद इनको सारी सहायता दी थी
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पंजाब पुलिस की वर्दी पहन भागा था अंकित
दिल्ली पुलिस ने बताया कि, 19 साल के अंकित ने ही मूसेवाला को सबसे करीब से गोली मारी थी। पुलिस के अनुसार, अंकित का यह पहला मर्डर है। उसने दोनों हाथों से गोलियां चलाई थीं। प्रियव्रत फौजी और अंकित सिरसा ने सिद्धू मूसेवाला पर हमले के वक्त पंजाब पुलिस की वर्दी पहन रखी थी ताकि उन पर कोई शक नहीं कर सके और मर्डर के बाद मौके से भागने में भी मदद मिले।

मूसेवाला की हत्या पहला मर्डर था अंकित का
पुलिस ने बताया कि, अंकित राजस्थान में हत्या के प्रयास के दो अन्य जघन्य मामलों में भी शामिल था। लेकिन मर्डर उसने पहली ही बार किया था। अंकित लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य है। जानकारी के अनुसार, वह केवल नौवीं पास है। पुलिस ने बताया कि, सिद्धू मूसेवाला को निशाना बनाया तब उसके साथ प्रियव्रत फौजी भी गोलियां बरसा रहा था। दोनों हत्या के बाद गुजरात जाकर छिप गए थे और 7 जून तक वहीं रहे।

मूसेवाला की हत्या के बाद लगभग हर दिन नए ठिकाने पर रहा अंकित
मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, सचिन भिवानी ने सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों को छिपाया, गाड़ियां दीं, हथियार दिए। उसने हत्यारों को छह राज्यों में छिपाए। उनके आने-जाने की व्यवस्था की। पुलिस के मुताबिक, 29 मई से 3 जुलाई तक उन्होंने लगभग 34-35 ठिकाने बदले थे, क्योंकि कई टीमें उनके पीछे थीं। उन्होंने भागने के लिए पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल किया था, लेकिन उन्हें यह सोचकर वर्दी को नहीं फेंका नह कि उन्हें फिर से उनकी आवश्यकता पड़ सकती है।












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