15 करोड़ की एक किताब और अनगिनत सवाल! पटना बुक फेयर में आई दुनिया की सबसे रहस्यमयी बुक, क्या छिपा है इसमें राज?
15 Crore Book: किताबों की दुनिया में आमतौर पर कुछ सौ या कुछ हजार रुपये की कीमत सुनने को मिलती है। कभी किसी खास संस्करण या दुर्लभ पांडुलिपि के लिए कीमत लाखों में पहुंच जाती है, लेकिन अगर कोई किताब 15 करोड़ रुपये की हो तो स्वाभाविक है कि हर कोई ठिठककर पूछेगा - आखिर इसमें ऐसा क्या खास है।
पटना पुस्तक मेले में इस बार ठीक ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां एक किताब ने न सिर्फ साहित्यप्रेमियों बल्कि आम लोगों को भी चौंका दिया। 41वें पटना बुक फेयर में 'मैं' नाम की पुस्तक चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गई। इस किताब की कीमत 15 करोड़ रुपये रखी गई है और दावा किया जा रहा है कि पूरी दुनिया में इसकी केवल तीन ही प्रतियां मौजूद हैं।

मेले में इसे भव्य तरीके से प्रदर्शित किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि किसी को भी इसके पन्ने पलटने की इजाजत नहीं दी गई। यही रहस्य लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ाता चला गया।
लेखक का दावा: 3 घंटे 24 मिनट में पूरी किताब लिखी गई
इस अनोखी किताब ''मैं'' के लेखक रत्नेश्वर हैं, जिनका दावा है कि 408 पन्नों की इस किताब को उन्होंने सिर्फ 3 घंटे 24 मिनट में लिखा। उनके मुताबिक 6 और 7 सितंबर 2006 की दरम्यानी रात, ब्रह्ममुहूर्त में लिखते समय उन्हें आध्यात्मिक जागरण और 'ब्रह्मलोक यात्रा' का अनुभव हुआ। उसी अनुभव को शब्दों में ढालकर यह ग्रंथ तैयार हुआ। किताब में कुल 43 अध्याय हैं और लेखक का कहना है कि यह इंसान की 'मानने से जानने' की यात्रा को समझाती है।
ज्ञान की परम अवस्था या प्रचार का तरीका?
रत्नेश्वर इस किताब को साधारण पुस्तक नहीं बल्कि 'ज्ञान की परम अवस्था का आविष्कार' बताते हैं। उनका कहना है कि यह ग्रंथ दुखों के अंत, ईश्वर-दर्शन और आत्मबोध के मार्ग को समझाने वाला है। लेखक के मुताबिक, उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान ही तय किया कि इस किताब की कीमत 15 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
हालांकि, मेले में मौजूद कई लोग इसे महज एक पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं। सवाल यही है कि जब किताब पढ़ने ही नहीं दी जा रही तो लोग इसके कंटेंट पर कैसे भरोसा करें।
सिर्फ 11 लोगों तक पहुंचेगी किताब
लेखक का कहना है कि फिलहाल इस पुस्तक की सिर्फ तीन प्रतियां तैयार की गई हैं और उनका इरादा इसे केवल 11 विशेष लोगों को सौंपने का है। वे ऐसे लोगों की तलाश में हैं, जो इस ज्ञान को समझ सकें। यह किताब हिंदी में लिखी गई है और इसका अंग्रेजी संस्करण भी लॉन्च किया गया है। अंग्रेजी अनुवाद कनिष्का तिवारी ने किया है और हिंदी या अंग्रेजी, दोनों संस्करणों की कीमत समान रूप से 15 करोड़ रुपये रखी गई है।
क्या यह वाकई दुनिया की सबसे महंगी किताब है?
पटना बुक फेयर में भले ही 'मैं' को दुनिया की सबसे महंगी किताब बताया जा रहा हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह रिकॉर्ड किसी और के नाम है। दुनिया की अब तक की सबसे महंगी किताब लियोनार्डो दा विंची की 'द कोडेक्स ऑफ लीसेस्टर' मानी जाती है।
इसे माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने 1994 में 30.8 मिलियन डॉलर में खरीदा था, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 270 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जाती है। यह किताब विज्ञान से जुड़ी एक दुर्लभ जर्नल है, जिसमें चंद्रमा, पानी और जीवाश्मों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विचार खुद दा विंची ने लिखे थे।
साहित्य का चमत्कार या मार्केटिंग की चाल?
पटना पुस्तक मेले में 15 करोड़ की किताब ने लोगों को जितना आकर्षित किया है, उतने ही सवाल भी खड़े कर दिए हैं। क्या 'मैं' वाकई ज्ञान की परम अवस्था को समेटे कोई अद्भुत ग्रंथ है, या फिर यह सिर्फ चर्चा बटोरने का एक अलग तरीका। फिलहाल सच जो भी हो, इतना तय है कि इस किताब ने किताबों की दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है।












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