Farm laws:10 वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने मोदी सरकार को लिखा खत, जानिए क्यों?
10 economists have written a letter to Narendra Singh Tomar: नए कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर लेकर पंजाब-हरियाणा के किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर डटे हुए हैं। सरकार सभी से बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रही है लेकिन किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को आठ पन्नों का खत लिखकर कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों से खास अपील भी की है, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर किसानों से कहा है कि वह कृषि मंत्री के खत को जरूर पढ़ें।
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वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने नरेंद्र सिंह तोमर को लिखा खत
तो वहीं देश के 10 जाने माने वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर कृषि कानून को निरस्त करने की मांग की है। इसके साथ ही इन सभी ने कारण भी बताए हैं कि क्यों ये बिल से किसी को फायदा नहीं होने वाला है।

जिन 10 अर्थशास्त्रियों ने मंत्री को पत्र लिखा है उनके नाम निम्नलिखित हैं
- प्रोफेसर डी. नरसिम्हा रेड्डी (retd), पूर्व में हैदराबाद विश्वविद्यालय
- प्रोफेसर कमल नयन काबरा (सेवानिवृत्त)पूर्व में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान और सामाजिक विज्ञान संस्थान (नई दिल्ली)
- प्रोफेसर के.एन. हरीलाल, प्रोफेसर (छुट्टी पर) सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज, तिरुवनंतपुरम, और केरल राज्य योजना बोर्ड के सदस्य
- प्रोफेसर राजिंदर चौधरी, एम। डी। विश्वविद्यालय, रोहतक में पूर्व प्रोफेसर;
- प्रोफेसर सुरिंदर कुमार सीआरआरआईडी, चंडीगढ़
- प्रोफेसर अरुण कुमार, सामाजिक विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली में मैल्कम एस
- प्रोफेसर रणजीत सिंह घुमन, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में प्रख्यात के प्रोफेसर और सीआरआईडीआईडी, चंडीगढ़ में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर
- प्रोफेसर आर। रामकुमार, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुंबई में नाबार्ड के अध्यक्ष प्रो।
- प्रोफेसर विकास रावल और हिमांशु, दोनों ही आर्थिक अर्थशास्त्र और योजना केंद्र (CESP), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अर्थशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

ये हैं नए कानून में कमी
- नया कृषि कानून छोटे किसानों के लिए सही नहीं है इससे उनको फायदा नहीं नुकसान होगा।
- नया कृषि कानून दो तरह के बाजारों की रूप रेखा दो नए नियमों के तहत तय कर रहा है, जो कि व्यवाहरिक रूप से सही नहीं होगा, नए कानून किसानों से ज्यादा कॉर्पोरेट हितों की सेवा करेंगे।
- ये कानून मंडी सिस्टम और पूरी खेती को प्राइवेट हाथों में सौंप देंगे, जिससे किसान को भारी नुकसान उठाना होगा।
- ये कानून contract farming को भी दो भागों में बांट रहे हैं इससे किसानों के हित की रक्षा नहीं की जा सकती है।
- बाजार भाव, किसानों की बेसिक समस्याओं की वजह से Agricultural Businesses प्रभावित होगा, जिससे किसान को ही नुकसान होगा इस वजह से नया कृषि निरस्त होना चाहिए।

सरकार से किया ये सवाल
इन सभी अर्थशास्त्रियों ने किसान संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने के लिए सरकार से आह्वान किया है और पूछा है कि क्या ये उपाय वास्तव में किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए समान और टिकाऊ लाभ लाएंगे।












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