10 कारण जो 'आप' को दिल्ली चुनावों में पहुंचा सकते हैं नुकसान

दिल्ली में विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद सभी पार्टियों ने प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी है। लेकिन आम आदमी पार्टी इस मामले में सभी पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए ताबड़तोड़ जनसभाए कर रही है। आप के सभी शीर्ष नेता एक के बाद एक जनसंपर्क के कार्यक्रम में जुटे हुए हैं।

arvind kejriwal

लेकिन आम आदमी पार्टी की मौजूदा हाल और दिल्ली के लोगों की के रुख को देखे तो कई ऐसे पहलू भी हैं जो आम आदमी पार्टी के विरोध में जाते हुए दिख रहे हैं। आइये डालते हैं उन दस वजहों पर जिनकी वजह से आम आदमी पार्टी को नुकसना उठाना पड़ सकता है।

1-अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में आने की मुख्य वजह राजनीति को बदलने को बताया था, लेकिन धीरे-धीरे पार्टी सभी पार्टियों की तरह आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में फंसती नजर आ रही है।

2-आम आदमी पार्टी ने जिन विधायकों को पिछले चुनाव में टिकट दिये थे उनमें से कई विधायकों को यह कहकर टिकट नहीं दिया गया कि उनमें क्षमता की कमी है। पार्टी के इस तर्क को माने तो क्या पार्टी इन अक्षम विधायकों के दम पर दिल्ली में शासन चलाना चाहती थी।

3-आम आदमी पार्टी की राजनीति भी अन्य पार्टियों की तर एक नेता अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है। भाजपा में नरेंद्र मोदी और कांग्रेस में राहुल गांधी की तर्ज पर अरविंद केजरीवाल एकमात्र पार्टी के सर्वेसर्वा बनते नजर आ रहे हैं।

4-आम आदमी पार्टी ने हर उस कार्यकर्ता या बागी नेता को यह कहते हुए उसकी शिकायत को सुनने से इनकार कर दिया कि उस व्यक्ति की व्यक्तिगत अभिलाषा है। जोकि पार्टी के भीतर स्वराज पर बड़ा सवाल उठाती है।

5-अरविंद केजरीवाल ने वोटरों को लुभाने के लिए जिस तरह से बयान दिये हैं वह निसंदेह उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करती है। एक तरफ केजरीवाल जहां भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात कर रहे हैं वहीं वोटरों को पैसों को इनकार करने की बजाए उसे लेने की बात कर रहे हैं।

6-आम आदमी पार्टी में कुछ चेहरे ही पार्टी पर पूरी तरह से हावी हैं जैसे मनीष सिसोदिया, कुमार विश्वास, संजय सिंह आशुतोष इन नेताओं के अलावा अन्य नेताओं को मुश्किल से ही लोग जानते हैं। वहीं ये सभी नेता केजरीवाल की अपेक्षा कहीं कमतर नजर आते हैं।

7-आम आदमी पार्टी का दिल्ली में ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो लोग अभी भी पूरी तरह से पार्टी पर विश्वास करने को तैयार नहीं हैं कि यह पार्टी पूरी तरह से अपने वायदों पर खरा उतरेगी। पिछली बार 49 दिनों की सरकार ने दिल्लीवासियों के भीतर पार्टी की विश्वसनीयता को कम किया है।

8-आप के पुराने नेता शाजिया इल्मी, विनोद कुमार बिन्नी और केजरीवाल की पुरानी सहयोगी किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने से भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर ये नेता आप की अंतर्कलह को खोलते हैं तो पार्टी इसे सिरे से खारिज नहीं कर सकती है।

9- अाम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिस तरह से किरण बेदी पर व्यक्तिगत हमला कर रहा है वह पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

10-आम आदमी पार्टी ने 49 दिन की सरकार से इस्तीफा लोकपाल के मुद्दे पर दिया था लेकिन इस बार के चुनाव प्रचार में यह मुद्दा पूरी तरह से गायब है।

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