लॉकडाउन से 10 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान, कई राज्यों के पास सैलरी के लिए फंड नहीं
नई दिल्ली: भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मोदी सरकार ने 25 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। इसके साथ ही सभी उद्योग-धंधे, दुकानें बंद हो गई थीं। दो महीने चले इस लॉकडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था पटरी से उतर गई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक कोरोना वायरस की वजह से सरकार को 10 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। कुछ दिन पहले हालात इतने बुरे हो गए थे कि कई राज्यों के पास कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए फंड नहीं था।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को नागपुर से बीजेपी जन संवाद वर्चुअल रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत की जीडीपी 200 लाख करोड़ की है। इसमें से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा कर दी। वहीं 10 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। ऐसे में 30 लाख करोड़ तो ऐसे चले गए। उन्होंने कहा कि अब आप सोचिए की 30 लाख करोड़ इस तरह जाने से स्थिति कितनी गंभीर होगी। कई राज्यों में अगले महीने का वेतन देने के लिए फंड नहीं है। उन्होंने स्थिति से सकारात्मकता से निपटने पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि हम एक संकट का सामना कर रहे हैं। हम इसका सामना नकारात्मकता, हताशा और भय से नहीं कर सकते। हमें आत्मविश्वास और सकारात्मकता के साथ कोरोना वायरस से लड़ना होगा।
नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई कि जल्द ही कोरोना की दवा बाजार में आ जाएगी, लेकिन तब तक हम मजबूती से इस बीमारी से लड़ेंगे। उन्होंने कोरोना काल में जीवन जीने की पद्धति सीखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब लोग खुद को बदल रहे हैं। कोरोना की वजह से आज हमने भी तकनीकी को अपनाया है और डिजिटल सभा कर रहे हैं, ताकी भीड़ को इकट्ठा होने से रोका जा सके।












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