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    जानिए तीन तलाक के खिलाफ बिल की 10 बड़ी बातें

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    नई दिल्ली। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार आज संसद में इसके खिलाफ बिल को पेश कर दिया है। इस बिल को लेकर शुरुआत से ही हंगामा हो रहा है, एक तरफ जहां ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कानून को क्रिमिनल एक्ट बताया है तो दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस कानून के खिलाफ अपनी असहमति जाहिर करते हुए इसके खिलाफ सदन में नोटिस दिया था। इस बिल को लेकर काफी विवाद हो रहा है, इस कानून के तहत सजा का जो प्रावधान रखा गया है उसको लेकर भी काफी विवाद चल रहा है। तीन तलाक देने वाले व्यक्ति पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। एक साथ तीन तलाक कहने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की सजा हो सकती है। आईए इस बिल के बारे में 10 बड़ी बातों को जानते हैं। 

    पेश हुआ बिल

    पेश हुआ बिल

    1-तीन तलाक के खिलाफ विधेयक को गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में अंतर मंत्रीस्तरीय समूह ने तैयार किया है, जिसके मुताबिक अब मौखिक, लिखित, एसएमस, व्हाट्सए या किसी अन्य तरीके से एक साथ तीन तलाक कह देने से तलाक को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बिल को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद लोकसभा में पेश किया।

    2- इस कानून के तहत पीड़ित महिला को अधिकार दिया गया है कि वह मजिस्ट्रेट के पास जा अपनी व अपने नाबालिग बच्चों के समर्थन में अपील कर सकती हैं। महिला अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी को मांग सकती हैं और मजिस्ट्रेट का फैसला ही अंतिम होगा।

    3- अगस्त माह में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस बाबत कानून बनाने का आदेश दिया था, जब कई महिलाओं ने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। महिलाओं ने कोर्ट से अपील की थी कि वह 1400 साल पुरानी इस प्रथा को खत्म करे।

    पीएम ने बचाने का दिया था वचन

    पीएम ने बचाने का दिया था वचन

    4- याचिका का मोदी सरकार ने समर्रथन किया था और तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था और इसे महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण बताया था। इससे पहले पीएम मोदी ने इस प्रथा के खिलाफ अपनी राय आगे रखी थी और मुस्लिम महिलाओं को इससे बचाने का वचन दिया था।

    5- तीन तलाक के खिलाफ याचिका पर पांच अलग-अलग धर्मों के जस्टिस ने सुनवाई की थी और यह बात रखी की तीन तलाक धार्मिक मामला नहीं है और यह संविधान के खिलाफ है। तीन जजों ने यह कहा कि तीन तलाक कुरान की मूल भावना के खिलाफ है।

    6- तीन तलाक को 18 करोड़ मुसलमान वैधानिक मानते हैं, लेकिन कई देशों में यह गैरकानूनी है, जिसमे पाकिस्तान भी शामिल है।

    7- भाजपा लंबे समय से यूनीफॉर्म सिविल कोड की वकालत कर रही है, वह शादी, तलाक और संपत्ति के कानून को एक समान करने के पक्ष में है। तमाम धर्म के मानने वालों को आजादी के बाद अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की इजाजत दी गई थी।

    कोर्ट के आदेश के बाद नहीं रुका तीन तलाक

    कोर्ट के आदेश के बाद नहीं रुका तीन तलाक

    8- मुस्लिम संगठनों ने इस कानून को खत्म किए जाने का विरोध किया था। लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध को मानने से इनकार कर दिया और तीन तलाक को खत्म करने की वकालत की।

    9- तीन तलाक की प्रथा उस समय विवाद में आई जब व्हाट्सएप, फेसबुक, स्काइप, एसएमस के अलावा अन्य माध्यमों से तलाक देने के मामले सामने आए।

    10- यहां गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तीन तलाक के मामले बंद नहीं हो रहे हैं, हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अपनी पत्नी को टेक्स्ट मैसेज के जरिए तलाक दिया था।

    इसे भी पढ़ें- तीन तलाक के खिलाफ विधेयक आज संसद में होगा पेश, कांग्रेस ने समर्थन का किया ऐलान

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    English summary
    10 big facts about triple talaq ahead of its proposal in Parliament. This bill has strong punishment clause.
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