चेतावनी देने के लिए एप्पल से नाराज थी भारत सरकारः रिपोर्ट

अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट और मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक संयुक्त पड़ताल के बाद कहा है कि भारत सरकार प्रमुख पत्रकारों की जासूसी कर रही है, जिसके लिए पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है.
वॉशिंगटन पोस्ट ने गुरुवार को एक रिपोर्ट छापी है जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार प्रमुख पत्रकारों की जासूसी कर रही है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ मिलकर की एक पड़ताल के बाद यह रिपोर्ट प्रकाशित की गई है.
पेगासस एक इस्राएली सॉफ्टवेयर है जिस पर पहले भी खासा विवाद हुआ है. इसे इस्राएली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने बनाया है और दुनियाभर की सरकारों ने इसे खरीदा था. इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी भी फोन पर नियंत्रण पाने के लिए किया जा सकता है.
इसके जरिए फोन के मैसेज और ईमेल पढ़े जा सकते हैं, उसमें मौजूद तस्वीरें देखी जा सकती हैं, लोकेशन ट्रैक की जा सकती है और फोन कॉल भी सुनी जा सकती हैं. यहां तक कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए फोन से तस्वीरें भी ली जा सकती हैं.
निगरानी का खतरा बढ़ा
गुरुवार को एमनेस्टी ने कहा कि भारतीय मीडिया संस्थान 'द वायर' के सिद्धार्थ वरदराजन और 'द ऑर्गजाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट' के आनंद मंगनाले को हाल ही में पेगासस के जरिए निशाना बनाया गया. रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों के आईफोन पर सबसे ताजा हमला अक्टूबर में हुआ था.
एमनेस्टी इंटरनेशनल की सिक्यॉरिटी लैब की प्रमुख डोंचा ओ सियर्बहेल ने कहा, "हमारी ताजा पड़ताल दिखाती है कि सिर्फ अपना काम करने के लिए भारत में पत्रकारों पर अवैध निगरानी का खतरा बढ़ रहा है. यह कई तरह से हो रहे दमन में से बस एक है."
भारत में मीडिया की आजादी को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चिंता जताती रही हैं. पिछले महीने ही भारतीय मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि जांच एजेंसियां कुछ विपक्षी नेताओं की शिकायतों पर जांच कर रही हैं जिन्हें फोन बनाने वाली कंपनी एप्पल की ओर से ऐसे संदेश मिले हैं किउनके फोन पर 'सरकार समर्थित हमले' हुए हैं.
एप्पल से नाराज थी भारत सरकार
गुरुवार को द वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इन नेताओं की शिकायतों के बाद "भारत सरकार बहुत सक्रिय हो गई थी, एप्पल के खिलाफ."
अखबार लिखता है कि उसे मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों से यह सूचना मिली है कि मोदी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने एप्पल के भारत में प्रतिनिधि को फोन किया था और "मांग की थी कि कंपनी चेतावनियों के राजनीतिक प्रभाव कम करने में मदद करे."
रिपोर्ट कहती है, "उन्होंने एप्पल के सिक्यूरिटी एक्सपर्ट को भी विदेश से भारत में मीटिंग के लिए बुलाया जहां भारतीय अधिकारियों ने इस बात का दबाव बनाया कि कंपनी चेतावनी जारी करने की कोई वैकल्पिक वजह बताए."
एक व्यक्ति ने द वॉशिंगटन पोस्ट से कहा, "वे बहुत ज्यादा गुस्से में थे."
अक्टूबर में जिन 20 लोगों को एप्पल की तरफ से ये चेतावनियां मिली थीं, वे सभी सार्वजनिक रूप से मोदी सरकार या भारतीय प्रधानमंत्री के सहयोगी उद्योगपति गौतम अदाणी के आलोचक हैं.
भारत सरकार ने फोन पर किसी तरह के हैकिंग अटैक में शामिल होने से इनकार किया था और कहा था कि ऐसे अलर्ट दुनिया के कई देशों में लोगों को मिले हैं. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने यह भी कहा था कि सरकार हैकिंग के इन आरोपों की जांच कर रही है.
क्या था पेगासस कांड?
2021 में 17 मीडिया संस्थानों की एक साझी जांच के बाद यह दावा किया गया था कि इस्राएल के सर्वेलांस सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए फोन नंबरों की जासूसी की गई. इन संस्थानों में भारत का मीडिया संस्थान द वायर भी शामिल था. द वायर ने लिखा कि इस जांच के तहत कुछ फोनों की फॉरेंसिक जांच की गई जिससे "ऐसे स्पष्ट संकेत मिले कि 37 मोबाइलों को पेगासस ने निशाना बनाया, जिनमें 10 भारतीय थे."
वेबसाइट द वायर ने खबर दी थी कि इस्राएल की निगरानी रखने वाली तकनीक के जरिए भारत के तीन सौ से भी ज्यादा लोगों के मोबाइल नंबरों की जासूसी की गई, जिनमें देश के मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से लेकर पत्रकार, जाने-माने वकील, उद्योगपति, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, मानवाधिकार कार्यकर्ता आदि शामिल हैं. इस्राएल की कंपनी एनएसओ ग्रुप पेगासस सॉफ्टवेयर बेचती है जिस पर कांड के बाद अमेरिका ने प्रतिबंधलगा दिया था.
विवेक कुमार (एएफपी)
Source: DW
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