यूक्रेन युद्ध: मदद के लिए हाथ बढ़ाते भारत और पाकिस्तान

नई दिल्ली, 09 मार्च। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे अरसे से रिश्ते सामान्य नहीं हैं लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से दोनों देश विदेशी धरती पर एक दूसरे के नागरिकों की मदद के लिए आगे बढ़े हैं. भारतीय अधिकारी युद्धग्रस्त यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिकों को निकालने में मदद कर रहे हैं. विदेशी छात्र बचाव के बाद भारतीय दूतावास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद कर रहे हैं. पाकिस्तानी छात्रा असमा शफीक भी युद्ध के दौरान कीव में फंस गईं थीं. भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने असमा को कीव से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है.
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भारतीय मीडिया के मुताबिक असमा शफीक पश्चिमी यूक्रेन के रास्ते अपनी मातृभूमि पाकिस्तान के लिए रवाना हो गई हैं और जल्द ही अपने परिवार के साथ फिर से मिल जाएंगी.
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सोशल मीडिया पर असमा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें वह कह रही हैं, "मेरा नाम असमा शफीक है. मैं कीव में स्थित भारतीय दूतावास की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने हमें हरसंभव मदद की. हम यहां बहुत कठिन हालात में फंस गए थे. मैं भारत के प्रधानमंत्री की भी शुक्रगुजार हूं कि उनकी बदौलत हम यहां से निकल पाए, मदद करने के लिए आपका धन्यवाद. भारतीय दूतावास की बदौलत हम घर सुरक्षित जा रहे हैं."
यूक्रेन में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिक मोअज्जम खान का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. मोअज्जम ने यूक्रेन में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन पिछले 11 सालों से वहां बस टूर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे हैं. उन्होंने भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए निशुल्क अपनी सेवा दी. मोअज्जम ने बताया कि वह यूक्रेनी और रूसी भाषा बोल सकते हैं और भारतीय छात्र वह भाषा नहीं बोल पा रहे थे जिससे उन्हें दिक्कत हो रही थी.
मोअज्जम ने बताया कि उर्दू और हिंदी मिलती जुलती भाषा है और वे आपस में आसानी से संवाद कर पा रहे थे. मोअज्जम का कहना है कि भारतीय छात्रों के माता-पिता उन्हें व्हॉट्सऐप पर मैसेज कर दुआएं दे रहे हैं जो उनके लिए सबसे बड़ी बात है.
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मोअज्जम खान कहते हैं, "एक इंसान के रूप में हम सभी इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार करना चाहते हैं जो प्यार और करुणा की भावना दे. मैं अपने सभी भारतीय नागरिकों को गले लगाता हूं. एक-दूसरे को गले लगाने से सुकून मिलता है."
एक और पाकिस्तानी नागरिक हुसैन की भी तारीफ हो रही है, जो खेरसन इलाके को इसलिए नहीं छोड़ना चाहते हैं क्योंकि वहां पांच भारतीय भी फंसे हुए हैं. रविवार को हुसैन और उनके परिवार को शहर छोड़ने का एक मौका मिला था लेकिन उन्होंने भारतीयों को छोड़कर जाने से इनकार कर दिया.
Source: DW
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