हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्त मोर्चा से किया किनारा, कही ये बात
हिसार, 8 अगस्त: केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ टिकरी और सिंघू बार्डर पर चल रहा किसान संगठनों का आंदोलन बिखराव के कगार पर पहुंच गया है। दरअसल, हरियाणा के किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने संयुक्त मोर्चा से किनारा करते हुए मोर्चा से अलग होने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने किसान नेताओं योगेंद्र यादव और शिवकुमार कक्का पर निशाना साधा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने पंजाब के चार संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है।
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चढ़ूनी ने भेदभाव का लगाया आरोप
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम चढ़नी ने संयुक्त किसान मोर्चे से अलग होने का ऐलान किया है। साथ ही अपने साथ भेदभाव करने का भी आरोप भी लगाया। दरअसल, पंजाब के ही चार संगठनों द्वारा चढूनी के नेतृत्व में सक्रियता दिखाना संयुक्त किसान मोर्चे के कुछ नेताओं को रास नहीं आया तो इन चारों संगठनों के खिलाफ कार्रवाई से चढूनी बिफर गए।
सोशल मीडिया पर संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं की आलोचना की
चढ़ूनी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान जारी करते हुए संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा में पहले दिन से मेरे साथ भेदभाव हो रहा है। कई घटनाएं ऐसी हुई, जब मुझे बाहर करने की कोशिश की गई। लेकिन जब वही गतिविधि किसी और ने की तो उनके खिलाफ मोर्चा ने कोई एक्शन नहीं लिया। पंजाब की चार जत्थेबंदी हमारे साथ जुड़ी थीं, जो डेरा बाबा नानक से बड़ा जत्था लेकर आए थे। बता दें, संयुक्त किसान मोर्चा के अन्य नेताओं के खिलाफ आरोप लगाते हुए गुरनाम सिंह चढूनी ने शनिवार की बैठक का बहिष्कार किया था। चढ़ूनी से मोर्चा पर उनकी शिकायतों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। 'मिशन पंजाब' के बारे में सार्वजनिक रूप से घोषणा करने, लोगों से मिलने और किसानों को चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पहले ही जुलाई में निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, गुरनाम सिंह चढूनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बैठकों में लिए गए सभी निर्णयों का पालन करना जारी रखेंगे और उनका इरादा आंदोलन को कमजोर करने का नहीं है।












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