कोटखाई केस में CBI की रडार पर शिमला के तीन बैंक, जांच के दायरे में लेन-देन
सीबीआई के वकील अशुंल बंसल का दावा है कि सीबीआई जल्दी ही बड़ा खुलासा करेगी। इस मामले पर 20 दिसंबर को स्टेट्स रिर्पोट पेश की जानी है। तब तक जांच पूरी कर ली जाएगी और पुख्ता सबूतों पर कर्रवाई की जाएगी।
शिमला। हवालात में हत्या के आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दायर करने के बाद सीबीआई ने कोटखाई में दसवीं की छात्रा से दुराचार और हत्या मामले की ओर अपनी जांच को मोड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि जल्द ही अब स्कूली छात्रा से रेप व मर्डर करने वाले दरिंदे भी बेनकाब होंगे और असली कातिल सलाखों के पीछे होंगे। सीबीआई के वकील अशुंल बंसल का दावा है कि सीबीआई जल्दी ही बड़ा खुलासा करेगी। इस मामले पर 20 दिसंबर को स्टेट्स रिर्पोट पेश की जानी है। तब तक जांच पूरी कर ली जाएगी और पुख्ता सबूतों पर कर्रवाई की जाएगी। हिमाचल हाईकोर्ट ने भी सीबीआई को निर्देश दिए हैं कि वो स्कूली छात्रा के कातिलों को पकड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर हिमाचल के लोगों की नजरें हैं और लोगों को पूरा भरोसा है कि सीबीआई कातिलों को जरूर पकड़ लेगी। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए। जिससे अब सीबीआई पर दवाब बढ़ा है। अपनी जांच में तेजी लाते हुए सीबीआई ने शिमला के तीन नामी बैंकों का रिकॉर्ड कब्जे में लिए हैं।

CBI को लगता है लेन-देन से खुलेगा राज
चार्जशीट में भले ही लेनदेन का उल्लेख नहीं है पर बैंक अफसरों को गवाह बनाने और अब रिकॉर्ड कब्जे में लेने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। कोटखाई मामला बीते 6 जुलाई को सामने आया था। इसीलिए सीबीआई ने जुलाई से सितंबर महीने का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर इन तीन महीनों के दौरान हुए ट्रांजेक्शन को खंगालना शुरू कर दिया है। सीबीआई सूत्रों की मानें तो पैसे के लेनदेन से संबंधित कुछ तथ्य हाथ लगे हैं। लेन-देन किस तरह का है, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। चार्जशीट में एक नामी बैंक के मैनेजर और दो बैंकों के डिप्टी मैनेजरों को गवाह बनाया गया है। इनके अलावा 81 और लोग गवाह बनाए गए हैं।

बैंक का नाम सामने आने से और उलझ गया है मामला
हवालात हत्याकांड से जुड़े आरोपियों में सभी पुलिस वाले हैं। ऐसे में बैंक का नाम सामने आने से गुत्थी और उलझ रही है। बड़ा सवाल ये है कि क्या इस मामले में कोई लेनदेन इन बैंकों के माध्यम से हुआ है, जिसका खुलासा होना बाकी है। सच्चाई गुड़िया प्रकरण में दाखिल होने वाली चार्जशीट से साफ होगी, लेकिन बैंकों से कनेक्शन है ये अभी तक हुई सीबीआई जांच से साबित हो चुका है।
सीबीआई कोटखाई और हवालात में हत्या के मामले की कड़ियां जोड़ रही है। स्कूली छात्रा से दुराचार और हत्या मामले के बाद ही पुलिस हिरासत में सूरज का कत्ल हुआ था। स्थानीय लोगों और गवाहों के सहयोग से सीबीआई कोटखाई मामले की जांच को आगे बढ़ा रही है। हवालात में हत्या मामले में सामने आ चुका है कि जिन 6 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, उनसे जबरन जुर्म कबूल करवाया गया था। उनके नार्को, पॉलीग्राफ टेस्ट में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगा।

जांच में की जा रही है जल्दबाजी!
सीबीआई के वकील अंशुल बंसल बताते हैं कि पुलिस हवालात में आरोपी सूरज की हत्या राजू ने नहीं की थी, बल्कि पुलिस हिरासत में उसकी मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रताड़ना के चलते सूरज की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि कोटखाई प्रकरण और हवालात में हत्या मामले में करीब 600 पन्नों की चार्जशीट के अलावा स्टेट्स रिपोर्ट हाइकोर्ट में पेश की गई। चार्जशीट में सामने आए साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि सूरत की हत्या राजू ने नहीं की थी।
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर गुड़िया मामला सीबीआई के सुपुर्द करने के एलान के बाद हिरासत में बंद आरोपियों से पुलिस सख्ती से क्यों पूछताछ करती रही? क्या सिर्फ पुलिस इन पांच आरोपियों से गुड़िया का गुनाह जबरदस्ती कबूल करवाना चाह रही थी? अगर वो कबूल करवा भी लेते तो जब सीबीआई जांच होती तो भी ये आरोपी बेदाग निकल जाते। ये जानते हुए भी कि मामला सीबीआई को जा रहा है तो गुड़िया प्रकरण में इतनी दिलचस्पी क्यों ली जा रही थी।

CBI पर भी लोगों का गुस्सा नहीं है कम!
सीबीआई जांच में साफ हो गया है कि स्कूली छात्रा से रेप व कत्ल के जुर्म को कबूलने के लिए इनसे ये जबरदस्ती की जा रही थी लेकिन जांच में अब तक ये साफ नहीं हो पाया है कि इसकी असल वजह क्या थी। क्या पुलिस के अफसर किसी के दबाव में काम कर रहे थे या माजरा ही कुछ और था। इन सवालों के साफ और स्पष्ट जवाब आज भी आम जनता को नहीं मिल पाए हैं। ये केस पूरी तरह से पहेली बन चुका है। सीबीआई को केस देने के ऐलान के बाद शिमला से गए एसआईटी के सदस्य लौट आए थे। वहां स्थानीय पुलिस अफसर ही मौजूद थे और वही आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रहे थे।

डंडे के बल पर जुर्म कबूलवाने की हुई कोशिश!
आम तौर पर इस तरह के मामले में पुलिस जांच से अपने हाथ पीछे खींच लेती है, जब उन्हें पता हो कि अब मामले की जांच सीबीआई करेगी लेकिन इस केस में उल्टा हुआ। एसआईटी के कुछ सदस्य लगातार आरोपियों से पूछताछ करते रहे और लॉकअप में एक आरोपी सूरज की मौत भी हो गई। इससे केस और भी ज्यादा उलझ गया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आम जनता का संदेह और पक्का हो गया। सीबीआई जांच में भी संबंधित पुलिस अफसर गिरफ्तार किए गए और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है। लेकिन इन सबके पीछे पुलिस क्या सिर्फ अपनी खाल बचाने के लिए संदिग्ध आरोपियों से डंडे के जोर पर अपराध कबूल करवाना चाहती थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी साजिश है? इसका खुलासा अब तक सीबीआई भी नहीं कर पाई है।
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