जयराम सरकार में सातवें मुख्य सचिव बने आरडी धीमान, बदले जा चुके हैं चार डीजीपी, दो मंत्री और पार्टी अध्यक्ष
शिमला, 15 जुलाई। हिमाचल प्रदेश में चुनावी साल में सत्तारूढ दल भाजपा में सब अच्छा नहीं चल रहा। एक ओर पार्टी में असंतोष और गुटबाजी हावी है। तो दूसरी ओर जय राम ठाकुर सरकार में अफसरशाही में भी अजीब सा माहौल है। सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों ने पार्टी को मुसीबत में डाल दिया है। इसी के चलते सरकार को अब मुख्य सचिव राम सुभग सिंह को हटाना पड़ा है और उनकी जगह आरडी धीमान को नया मुख्य सचिव तैनात किया गया है। धीमान प्रदेश सरकार के चार साल आठ महीने के कार्यकाल में सातवें चीफ सेक्रेटरी बने हैं। सवाल उठ रहा है कि ऐसा क्या हो रहा है कि मात्र साढ़े चार साल में सात मुख्य सचिव , चार डीजीपी , दो मंत्री और पार्टी अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश में बदले जा चुके हैं। आम तौर पर सरकार चुनाव से ठीक चार महीने पहले अपने चीफ सेक्रेटरी को कम ही हटाती है। या तो तबादला होता है या इस्तीफा देते हैं। यहां पहली बार हटाया गया है।

लेकिन हिमाचल में ऐसा हुआ तो सरकार के इस निर्णय पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर किस वजह से राम सुभग सिंह को तबादले के बजाये हटाया गया है। हैरानी की बात है कि हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने अपने साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में छह मुख्य सचिव बदल दिए हैं। रामसुभग सिंह सहित वीसी फारका, बीके अग्रवाल और अनिल खाची बतौर मुख्य सचिव अपना कार्यकाल पूरा भी नहीं कर सके। विनीत चौधरी और डॉ. श्रीकांत बाल्दी ही मुख्य सचिव रहते हुए समय पर सेवानिवृत्त हुए। अब आरडी धीमान प्रदेश सरकार के सातवें मुख्य सचिव बनाए गए हैं।
दिसंबर 2017 में जब जयराम सरकार सत्ता में आई थी, तब कांग्रेस सरकार के समय के मुख्य सचिव वीसी फारका थे। सरकार बदलते ही मुख्य सचिव वीसी फारका को हटाकर प्रधान सलाहकार के पद पर नियुक्ति दी गई। विनीत चौधरी को सुपरसीड कर फारका को कांग्रेस सरकार ने मुख्य सचिव बनाया था। चौधरी को कांग्रेस सरकार ने प्रधान सलाहकार लगाया था। सरकार बदलते ही भाजपा ने विनीत चौधरी को मुख्य सचिव लगाया। विनीत चौधरी ने अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे बीके अग्रवाल को मुख्य सचिव लगाया गया। अग्रवाल अपने कार्यकाल के बीच में ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिल्ली लौट गए। इसके बाद डॉ. श्रीकांत बाल्दी को मुख्य सचिव बनाया गया। इन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। बाल्दी आजकल रेरा के चेयरमैन हैं। इसके बाद अनिल खाची को मुख्य सचिव लगाया गया। इन्हें बीच कार्यकाल में ही बदल दिया गया। खाची वर्तमान में राज्य चुनाव आयोग को संभाल रहे हैं। खाची के बाद रामसुभग सिंह जुलाई 2021 में मुख्य सचिव बने थे और उन्हें एक साल बाद जुलाई 2022 में चुनाव से ठीक चार महीने पहले ही पद से हटाना पडा है।
मुख्य सचिव रामसुभग सिंह को पद से हटाए जाने के बारे में कई चर्चाएं चल रही थीं। पिछले दिनों पर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठे थे, और उन पर लगे आरोपों पर प्रदेश सरकार ने कार्यवाही तो नहीं की। लेकिन जब उनके खिलापफ शिकायत पीएमओ पहुंची, तो उनका बचाव करने वाली सरकार खुद पीदे हट गई। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय उनकी कार्यशैली से नाखुश था। पीएमओ ने उनके खिलाफ हुई एक शिकायत उपयुक्त कार्रवाई करने के लिए सरकार को भी भेजी थी। हाल ही में धर्मशाला में हुई मुख्य सचिवों की कॉन्फ्रेंस में भी रामसुभग सिंह डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाए। माना जा रहा है कि यह भी उन्हें बदले जाने का कारण हो सकता है। इसके पीछे कथित तौर पर उनके एक रिशतेदार की ओर से गुरूग्राम में संपत्ति की खरीद का मामला प्रमुख है।
अब वर्ष 1988 बैच के आईएएस अधिकारी आरडी धीमान राज्य के नए मुख्य सचिव बनाये गये हैं। सरकार ने आरडी धीमान की नियुक्ति वरीयता सूची को दरकिनार करके की है क्योंकि निशा सिंह उनसे सीनियर हैं। सरकार इससे पहले भी वरीयता सूची को दरकिनार करके मुख्य सचिव के पद पर नियुक्ति देती रही है। इससे पहले पूर्व कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वीरभद्र सिंह ने वीसी फारका को मुख्य सचिव नियुक्त किया था। मुख्य सचिव पद के लिए निशा सिंह के अलावा संजय गुप्ता भी प्रमुख दावेदार थे। संजय गुप्ता भी वर्ष 1988 बैच के अधिकारी है तथा उनका नाम वरीयता सूची में आरडी.धीमान से आगे था।
इस बीच, सरकार ने राम सुभग सिंह को मुख्य सचिव पद से हटाने के बाद उनको प्रधान सलाहकार प्रशासनिक सुधार लगाया है। इसी तरह निशा सिंह को प्रधान सलाहकार प्रशिक्षण एवं विदेश मामले व संजय गुप्ता को प्रधान सलाहकार जन शिकायत निवारण लगाया है। आईएफएस सुशील कुमार सिंगला नई दिल्ली में मुख्यमंत्री के ओएसडी होंगे। प्रतिनियुक्ति से लौटीं आईएएस मीरा मोहंती आवासीय आयुक्त नई दिल्ली होंगी। उधर, राम सुभग सिंह के राज्य का नया मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) लगाए जाने की संभावना है। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की सहमति से ही फैसला होगा। इस बारे में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी ही निर्णय करेगी।
जय राम ठाकुर सरकार में अगर पुलिस महकमे की बात करें तो संजय कुमार सरकार बदलते ही डीजीपी पद से हटे और उनकी जगह सोमेश गोयल डीजीपी बने और बाद में उन्हें हटाया गया। उसके बाद सीता राम मरडी डीजीपी बने। उनके बाद संजय कुंडू डीजीपी बने। कुंडू भी कुछ दिनों में अपने पद से हट रहे हैं। यही नहीं , प्रशासनिक मामलों के अलावा भाजपा में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सरकार के दो मंत्री हटाए गए, विधानसभा अध्यक्ष बदले गये । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा देना पड़ा था। महिला मोर्चा के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया।












Click it and Unblock the Notifications