धूमल ने स्वीकार की हार, कहा- CM बनने की नहीं अब कोई इच्छा
धूमल ने कहा कि हमीरपुर छोड़ सुजानपुर सीट से चुनाव लड़वाना पार्टी नेतृत्व का फैसला था। उन्हीं के चेले रहे राजेंद्र राणा ने उन्हें हरा दिया है।
शिमला। बीजेपी के सीएम उम्मीदवार रहे प्रेम कुमार धूमल ने सुजानपुर सीट से चुनाव हारने के बाद स्पष्ट किया कि वो अब मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं है और ना ही उनकी कोई इच्छा है। इसका फैसला अब पार्टी नेतृत्व को करना है कि हिमाचल प्रदेश में कौन अगला मुख्यमंत्री होगा? पार्टी ने केंद्रीय पर्यवेक्षक हिमाचल भेजने का फैसला लिया है, इसके बाद ही सारी स्थिति स्पष्ट हो होगी। धूमल ने कहा कि हमीरपुर छोड़ सुजानपुर सीट से चुनाव लड़वाना पार्टी नेतृत्व का फैसला था। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को लगा होगा कि शायद सुजानपुर सीट जीतना जरूरी है, इसलिए मुझे वहां से लड़ने को कहा गया। धूमल ने कहा कि उनके मुकाबले जो जीता है, शायद वो उनसे बेहतर होगा। उन्होंने अपनी हार पर कहा कि इसके पीछे कई कारण हैं। जिन पर पार्टी संगठन में मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व व चुने हुए विधायक अगले मुख्यमंत्री का चयन कर लेंगे। इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी।

'पार्टी ने लड़ने के लिए बदली थी सीट'
प्रदेश की सबसे हॉट सीट माने जाने वाली सुजानपुर सीट से धूमल चुनाव हार चुके हैं। उन्हें उनके ही चेले राजेंद्र राणा ने पटखनी देते हुए हिमाचल की राजनीति की तस्वीर ही बदल दी है। भाजपा के दो बार मुख्यमंत्री रहे एवं इस बार भी भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल को कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र राणा ने 1919 मतों से पराजित किया है। राणा को 25,288 और धूमल को 23,369 वोट मिले। ये दूसरा मौका है, जब हिमाचल में दूसरी बार 25 साल बाद हिमाचल में कोई मुख्यमंत्री उम्मीदवार हारा है। भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी धूमल के साथ उनके करीबी नेता भी चुनाव हारे हैं। इससे पहले भाजपा के ही शांता कुमार चुनाव हारे थे।

उन्हीं के चेले राजेंद्र राणा ने दी शिकस्त
जिससे भाजपा में जश्न के महौल में भी उदासी का आलम है। दरअसल धूमल अपने गृह जिला हमीरपुर और साथ लगते ऊना सहित अन्य जिलों में उनके समर्थक चुनाव हार गए हैं। वो पहली बार विधानसभा चुनाव हारे हैं जबकि इससे पहले वो वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में रिटायर मेजर जनरल विक्रम सिंह से हार गए थे। धूमल के समर्थकों में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती भी शामिल हैं। संगठन में उनके नेतृत्व में पार्टी तो चुनाव जीत गई लेकिन वे स्वयं चुनाव हार गए।

नए नवेले ने हरा दिया दिग्गज
सत्ती सबसे अधिक समय तक भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं लेकिन इस बार वो चुनाव नहीं जीत पाए हैं। उन्हें राजनीति में नए नवेले आए सतपाल रायजादा ने चुनाव हराया दिया है। हालांकि सत्ती एक मंझे हुए राजनेता रहे हैं। विद्यार्थी परिषद से लेकर भाजपा में आने तक उनका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है।












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