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कोटखाई केस: 20 तारीख को असली गुनहगारों का खुलासा करेगी CBI, सूरज के दोबारा पीएम ने बताया खून से सने हैं पुलिसवालों के हाथ

जांच एजेंसी को लगता है कि सूरज कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस का राजदार था। जिसके चलते ही उसकी हवालात में पुलिस वालों ने हत्या कर दी।

शिमला। कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस में आरोपी सूरज की हत्या से सीबीआई जांच में जिस तरीके से पुलिस महकमें के नौ कर्मी फंसे, उसको लेकर अब ये बहस लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है कि आखिर ये कैसे संभव हुआ। हिमाचल पुलिस ने तो अपनी ओर से पूरा इंतजाम कर दिया था कि हवालात में सूरज की हत्या को किसी दूसरे के मत्थे मढ़ कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाए। यही वजह है कि सीबीआई अब भी मान कर चल रही है कि सूरज की हवालात में हत्या के मामले से होकर कोटखाई मामले का रास्ता जाता है। जांच एजेंसी को लगता है कि सूरज कोटखाई गैंगरेप मर्डर केस का राजदार था। जिसके चलते ही उसकी हवालात में पुलिस वालों ने हत्या कर दी। सीबीआई ने दावा किया है कि वो 20 दिसंबर को कोटखाई के असली आरोपियों को बेनकाब कर देगी लेकिन जांच एजेंसी अब उस कड़ी को जोड़ने की जद्दोजहद में लगी है, जिसमें पुलिस के आईजी से लेकर एसपी तक अपराध करने को मजबूर हुए।

20 तारीख को खुल जाएगा राज

20 तारीख को खुल जाएगा राज

पूरे मामले पर नजर दौड़ाई जाए तो सूरज हत्याकांड में आईजी जहूर एच जैदी समेत आधा दर्जन से ज्यादा पुलिस वाले एम्स की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की वजह से ही पकड़े गए। इससे साबित हो गया कि इनके हाथ खून से सने हैं। हालांकि इन्हीं पुलिस वालों ने इस हत्याकांड में दर्ज एफआईआर में दावा किया कि हाथापाई के दौरान सूरज की मौत हो गई। खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी ऐसा ही बयान उस दिन दिया था लेकिन आईजीएमसी शिमला की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी सूरज की मौत को स्पष्ट नहीं कर पाई थी। इसीलिए आईजीएमसी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सीबीआई ने विश्वास ही नहीं किया। अगर हिमाचल मिडिया व लोगों का दवाब ना होता और हाईकोर्ट का आदेश एक दिन बाद भी आता तो सूरज का दाह संस्कार कर दिया गया होता और उसके हत्यारों का पता ही नहीं चलता।

एम्स में डाक्टरों व सीबीआई के बीच पोस्टमॉर्टम के वक्त क्या हुआ?

एम्स में डाक्टरों व सीबीआई के बीच पोस्टमॉर्टम के वक्त क्या हुआ?

हिमाचल हाईकोर्ट से जांच का आदेश मिलते ही सीबीआई ने सबसे पहले आईजीएमसी प्रशासन को शव को सुरक्षित रखने को कहा। इसके बाद नई दिल्ली से एम्स के डॉक्टरों का दल शिमला पहुंचा। इस दल ने नए सिरे से सूरज के शव का पोस्टमॉर्टम किया। आईजीएमसी चिकित्सकों की रिपोर्ट में सूरज सिंह की मौत का कारण ट्रॉमैटिक शॉक बताया गया। लेकिन एम्स के मेडिकल बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सूरज की मौत पुलिस के डंडे, छड़ी जैसी किसी चीज के मारने से हुई है। जब दूसरी पोस्टमॉर्टम रिर्पोट सीबीआई के हाथ लगी तो जांच एजेंसी ने सबसे पहले सूरज की हत्या के मामले की जांच करना ही उचित समझा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स के बाद कोटखाई थाना के संतरी के कबूलनामें ने पुलिस वालों की पोल खोल कर रख दी।

एम्स के मेडिकल बोर्ड से सीबीआई के सवाल

एम्स के मेडिकल बोर्ड से सीबीआई के सवाल

1. सूरज की मौत का संभावित समय क्या था?

मेडिकल बोर्ड - पहली ऑटोप्सी रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम फोटो पर गौर करें तो सूरज की मौत पहले पोस्टमॉर्टम से 18 घंटे पहले हुई। ये समय पहली रिपोर्ट में दिए गए मृत्यु के समय से मेल खाता है।

2. मृतक के शरीर पर किस तरह के घाव पाए गए?
मेडिकल बोर्ड - मृतक के पूरे शरीर पर बहुत सारे घाव थे, मांसपेशियों में बहुत गहरे तक खून रिसा हुआ था।

3. मृतक के शरीर में चोटें आने और उसकी मृत्यु के बीच में कितनी अवधि रही?
मेडिकल बोर्ड : सभी घाव मरने से पहले के हैं। घाव की समयावधि को पहली ऑटोप्सी के दौरान लिए गए फोटो को आधार बनाते हुए ही तय किया गया।
इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह घाव अलग-अलग समय में शरीर पर घटित हुए। इनकी अवधि मृत्यु से 2 दिन पहले से लेकर दो घंटे तक की है।

पूछे गए गंभीर सवाल

पूछे गए गंभीर सवाल

4. क्या मृतक के शरीर पर जो घाव पाए गए, वह मौत के लिए काफी थे?
मेडिकल बोर्ड : मृतक की पीठ, हिप, जांघों और टांगों में मांसपेशियों के बीच खून काफी गहरा फैला हुआ पाया गया। सूरज की मौत कई घावों के बाद शॉक से हुई। सामान्य स्थिति में मौत के लिए इस तरह के घाव काफी हैं।

5. मृतक के शरीर पर चोटों और घावों का कारण क्या है ?
मेडिकल बोर्ड : मृतक की पीठ और हिप में गहरी चोटें पाई गईं जोकि किसी कुंद हथियार के मारने से लगी हैं। दाहनी जांघ पर यू आकार के घाव का निशान है, दोनों जांघों पर ट्राम ट्रैक की तरह घाव पाया गया। पैर के तलवे पर भी चोटों के गंभीर निशान हैं। ये घाव किसी कुंद, छड़ी आकार के सख्त वस्तु या हथियार से किए गए हैं। यह लाठी, रॉड या कुछ और भी हो सकता है।

6. इस तथ्य को जानते हुए कि सूरज सिंह की मौत पुलिस हिरासत में हुई है, कोई और राय ?
मेडिकल बोर्ड : जिस तरह की चोटें सूरज सिंह पर की गई हैं, वह हिरासत में ही प्रताडऩा को पुष्ट करती हैं। हम इस संभावना से इनकार करते हैं कि सूरज सिंह की मौत हाथापाई में हुई है।

ये थे मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर

ये थे मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टर

एम्स के प्रोफेसर डॉ. सुधीर के गुप्ता, डॉ. मिल्लो, डॉ. अभिषेक यादव, डॉ. अंतारा देव वर्मा, डॉ. अर्जित डे। सूरज की गर्दन पर था हरा और लाल रंग का टैटू बना हुआ था, 169 सेंटीमीटर लंबे 70 किलो वजन वाला 29 वर्षीय सूरज सिंह हष्ट-पुष्ट था। पोस्टमॉर्टम में उसके दाहिने गर्दन पर ड्रेगन टैटू बना हुआ पाया गया जोकि हरा और लाल रंग में था। उसकी दाहिनी बाजू में हिंदी में सूरज लिखा हुआ था। उसने गोल गले की ग्रे टी-शर्ट और काला नाइलॉन का लोअर पहन रखा था।

असली कातिल होगा बेनकाब

असली कातिल होगा बेनकाब

अब सीबीआई दावा कर रही है कि कोटखाई की स्कूली छात्रा के असली कातिल जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। 20 दिसंबर तक सीबीआई की पड़ताल में असली गुनाहगारों के चेहरे बेनकाब होंगे। सीबीआई के वकील अंशुल बंसल का दावा है कि 20 दिसंबर तक सीबीआई मामले की तह तक पहुंचेगी। बंसल ने कहा सीबीआई किसी भी कीमत पर असली आरोपी को आजाद नहीं घूमने देगी और ना ही पुलिस वालों की तरह हर किसी को गुनहागार बनाकर और थर्ड डिग्री देकर गुनाह कबूल करवाएगी। अंशुल बंसल के अनुसार, सबीआई पुख्ता सुबूतों के आधार पर कार्रवाई करती है और उसी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाती है। ऐसे में किसी निर्दोष को दोषी नहीं बनाया जाएगा और दोषी को बख्शा भी नहीं जाएगा।

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