जयराम ठाकुर: कैसे हिमाचल प्रदेश में बन गए भाजपा के सबसे भरोसेमंद चेहरा
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर महज पांच वर्षों में राज्य में बीजेपी के सबसे विश्वसनीय चेहरा बन चुके हैं। विपक्षी दल की ओर से खूब शिगूफा छोड़ा गया था कि बीजेपी उत्तराखंड की तरह हिमाचल में भी विधानसभा चुनावों से पहले नेतृत्व परिवर्तन करेगी। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का नाम भी बखूबी उछाला जा रहा था। लेकिन, जयराम ठाकुर पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा बरकरार रहा। पार्टी ने उन्हीं की अगुवाई में अगला चुनाव लड़ने का भी ठान लिया है। पार्टी को कहीं ना कहीं ठाकुर के नेतृत्व क्षमता को लेकर पक्का यकीन है, तभी उनकी अगुवाई में ही चुनाव मैदान में उतरना तय किया है। क्योंकि, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी हिमाचल प्रदेश के हैं और उनसे राज्य की जमीनी स्थिति छिपी हुई नहीं है।

जयराम ठाकुर: हिमाचल प्रदेश में भाजपा के सबसे भरोसेमंद चेहरा
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को कभी पूर्व सीएम शांता कुमार का भरोसेमंद माना जाता था। लेकिन, आज वे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे विश्वसनीय चेहरा बन चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में अगर दो बार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की अप्रत्याशित हार नहीं हुई होती तो शायद जयराम ठाकुर पार्टी नेतृत्व की नजरों में और हिमाचल प्रदेश की जनता के दिलों में वह जगह नहीं बना पाते, जो इस समय उनकी लोकप्रियता देखकर अनुमान लगाया जा सकता है। 57 वर्षीय ठाकुर में कई विशेषताएं है, जो उन्हें बीजेपी के अंदर भी और बाकी दलों के नेताओं से भी अलग करते हैं। उन्हें ऐसे 'विनम्र नेता' के तौर पर जाना जाता है, जो बहुत ही निचले तबके से अपने संघर्ष के दम पर उठे हैं और जो हमेशा लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं। उनकी मजबूती का आधार उनका लो-प्रोफाइल होकर काम करना और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भरोसा हासिल करना भी रहा है। पार्टी संगठन पर 2017 से पहले भी उनकी अच्छी पकड़ रही है और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कभी उनके खिलाफ पार्टी विधायकों की ओर से किसी तरह की बगावत देखने को नहीं मिली है।
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जयराम ठाकुर ने एबीवीपी से शुरू की छात्र राजनीति
जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी, 1965 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मुरहाग पंचायत के तांदी गांव में हुआ था। जयराम ठाकुर पांच बार के एमएलए हैं। उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ है। वे कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे। वे 1986 तक प्रदेश एबीवीपी के संयुक्त सचिव रहे। 1989 से लेकर 1993 तक उन्हें जम्मू-कश्मीर में इसका संगठन मंत्री बनाकर भेजा गया। 1993 के बाद वे वापस हिमाचल प्रदेश लौटे और प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के 1995 तक सचिव रहे। फिर 2000-2003 तक भाजपा युवा मोर्चा के मंडी जिलाध्यक्ष रहे। 2003 से वे भाजपा के प्रदेश संगठन में चले गए और 2005 तक प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर कार्य किया। 2006 से लेकर 2009 तक वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।

जयराम ठाकुर पांच बार के एमएलए हैं
एबीवीपी में रहने का असर ऐसा हुआ कि उन्होंने अपना पहला विधानसभा का चुनाव सिर्फ 28 साल की उम्र में लड़ा। यह 1993 था, लेकिन मंडी की चच्योट विधानसभा क्षेत्र से वह ये चुनाव हार गए। लेकिन, सिर्फ 33 की उम्र में उन्होंने 1998 में बीजेपी के टिकट पर यहीं से पहला चुनाव जीत लिया और यह सिलसिला आजतक कायम है। हालांकि, बाद में परिसीमन के बाद यह सिराज विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाने लगी (2003,2007 तक चच्योट से एमएलए रहे और 2012 और 2017 में सिराज सीट से जीत दर्ज की)। यहां से उन्होंने लगातार पांच बार जीत दर्ज की है और 27 दिसंबर, 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले राज्य में पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारियों के अलावा बीजेपी सरकारों में कैबिनेट मंत्री की भूमिका निभाई।

जयराम ठाकुर की शिक्षा
छात्र राजनीति में कदम रखने से पहले जयराम ठाकुर की प्रारंभिक शिक्षा गांव के पास ही कुरनाई स्कूल में हुई थी; और हाई स्कूल की पढ़ाई उन्होंने थुनाग के पास बगस्याड़ हाई स्कूल से पूरी की। लेकिन, ग्रैजुएशन की पढ़ाई के लिए उन्होंने मंडी के वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज में दाखिला लिया। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद एमए की पढ़ाई के लिए उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी को चुना।

जयराम ठाकुर का परिवार
कहते हैं कि जब जयराम ठाकुर ने 1993 में अपना पहला चुनाव लड़ा था तो उनके पास इसके लिए जरा भी पैसे नहीं थे। लेकिन, फिर भी उन्होंने उस चुनाव में जिस तरह से संघर्ष किया,पार्टी ने उससे प्रभावित होकर 1998 में उन्हें फिर मौका दिया। इसके बाद से उन्होंने भाजपा को कभी निराश होने का मौका नहीं दिया। जयराम ठाकुर का बचपन बहुत ही तंगहाली में कटा है। खेतीबाड़ी करके परिवार का गुजारा करने वाले उनके पिता जेठूराम ठाकुर और मां ब्रिकु देवी पर तीन बेटे और दो बेटियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी थी। जयराम भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनकी शादी डॉक्टर साधना ठाकुर से हुई है और दोनों की दो बेटियां हैं। जयराम ठाकुर का पेशा कृषि और बागवानी है।

जयराम ठाकुर की प्रॉपर्टी
2017 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्होंने चुनाव आयोग को जो हलफनामा दिया था, उसके मुताबिक तब उनके पास 1.31 करोड़ रुपए से ज्यादा की चल संपत्ति थी। जबकि, उनकी पत्नी के पास 50.71 लाख रुपए से अधिक की चल संपत्ति थी। वहीं, उस समय जयराम ठाकुर ने अपने पास 1.3 करोड़ रुपए से अधिक की अचल संपत्ति बताई थी और पत्नी के पास 35 लाख रुपए की अचल संपत्ति होने की बात की थी। इसके अलावा ठाकुर के नाम 18.19 लाख रुपए से अधिक की देनदारी थी। लेकिन, उनकी पत्नी पर कोई भी देनदारी बाकी नहीं थी।












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