Himachal Temple Funds Row: मंदिरों से पैसे मांग कर कैसे बुरी फंसी कांग्रेस सरकार? 5 प्वाइंट में नुकसान समझिए

Himachal Temple Funds: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने अपने दो प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं - 'सुख आश्रय योजना' और 'सुख शिक्षा योजना'के लिए प्रदेश के हिंदू मंदिरों से योगदान मांगकर एक नया विवाद पैदा कर दिया है। यह मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ चुका है और बीजेपी ने इस संवेदनशील सियासी मुद्दे को लपकने में जरा भी देर नहीं की है।

कांग्रेस पार्टी पहले से ही पूरे देश में अपने हिंदू-विरोधी छवि के आरोपों से जूझ रही है, और यह नया विवाद उसे और गहरे संकट में डाल सकता है। आइए 5 बिंदुओं में समझने की कोशिश करते हैं कि कैसे कांग्रेस पार्टी के लिए यह नया विवाद राजनीतिक तौर पर नुकसानदेह साबित हो सकता है।

himachal temple

Himachal Temple Funds Row: मंदिरों से चंदा मांगने का मुद्दा क्या है?

हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने राज्य के मंदिर ट्रस्टों से आग्रह किया है कि वे अनाथों और वंचित बच्चों के लिए संचालित 'सुख आश्रय' और 'सुख शिक्षा' योजनाओं में अपने खजानों से योगदान दें। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार का कहना है कि यह एक स्वैच्छिक दान की अपील है, न कि इसके लिए कोई अनिवार्य निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन, विपक्षी बीजेपी ने इसे मंदिरों के धन को सरकारी खजाने में डालने की कांग्रेसी चाल बताया है।

Himachal Temple row:कांग्रेस सरकार के खिलाफ बीजेपी ने खोला मोर्चा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि कांग्रेस सरकार मंदिरों का धन राज्य की वित्तीय समस्याओं का हल करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। हिमाचल विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन योजनाओं के प्रचार के लिए पानी की तरह पैसे तो बहा रही है, लेकिन उनके क्रियान्वयन में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि जब बजट में पहले से ही इन योजनाओं के लिए 272.27 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, तो सरकार इसके लिए मंदिरों से धन क्यों मांग रही है?

Himachal Temple News: कांग्रेस सरकार अपने बचाव में क्या कह रही है?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुक्खू सरकार की ओर से सफाई देते हुए मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर ने कहा है कि यह मंदिर ट्रस्टों के लिए एक स्वैच्छिक योगदान की अपील है, जो पहले से ही अन्य धर्मार्थ कार्यों में जुड़े रहे हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन निधियों का उपयोग केवल अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए किया जाएगा, न कि सरकारी खर्चों को पूरा करने के लिए।

लेकिन, सवाल उठता है कि क्या सरकार के लिए धार्मिक संस्थाओं से अपनी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसे मांगना उचित है? क्या एक लोकतांत्रिक सरकार को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए किसी धार्मिक संस्था के भरोसे रहना जायज है? ऐसे में इन योजनाओं के अस्तित्व पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

Himachal Temple controversy: कांग्रेस के लिए कहीं राजनीतिक रूप से घातक न बन जाए ये कदम!

कांग्रेस पर लंबे समय से हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगता रहा है। महाकुंभ में गांधी परिवार और खासकर राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने विरोधियों के इस धारणा को और भी मजबूत करने का मौका दिया है।

इसके अलावा, बीजेपी और संघ पहले से ही कांग्रेस को हिंदू-विरोधी और मुस्लिम तुष्टिकरण की पार्टी के रूप में पेश करते रहे हैं। इस विवाद से कांग्रेस की स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर भी और कमजोर हो सकती है और हिमाचल सरकार का यह कदम उसके लिए राजनीतिक रूप से घातक साबित हो सकता है।

Himachal Temple fund controversy: मंदिर ट्रस्टों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए पहले ही हो रही है मांग

हिमाचल प्रदेश में 35 प्रमुख मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं, जिनके पास करीब 400 करोड़ रुपए जमा हैं। देश भर में हिंदू संगठनों की ओर से इन मंदिर ट्रस्टों को पहले ही सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग हो रही है। ऐसे में इन संगठनों को नया मुद्दा हाथ लग सकता है और सबसे पहले कांग्रेस शासित सरकारों की ही परेशानियां बढ़ने की खतरा है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+