हिमाचल प्रदेश चुनाव 2017: सीट नंबर 14 सुलह (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
शिमला। सुलह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सीट नंबर 14 है। कांगड़ा जिला में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र अनूसूचित जाति के लिये आरक्षित है। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 89,293 मतदाता थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में जगजीवन पाल इस क्षेत्र के विधायक चुने गए। सुलह चुनाव क्षेत्र ने एक जमाने में प्रदेश को मुख्यमंत्री दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार की कर्मभूमि सुलह रही है। सुलह से दो बार वह चुनाव जीते। हिमाचल के मुख्यमंत्री भी बने। जिससे एक समय सुलह खासा चर्चित भी रहा।


सुलह (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र एक नजर में
जिला: कांगड़ा
लोकसभा चुनाव क्षेत्र : कांगड़ा
मतदाता: 91,341
जनसंख्या (2011) : 1,37,735
साक्षरता : 68 प्रतिशत
अजिविका: खेती बाड़ी,परंपरागत काम धंधा
शहरीकरण: ग्रामीण

सुलह में राजपूत मतदाता अधिक
बाद में उन्होंने पालमपुर को अपना कर्मक्षेत्र बना लिया। सुलह में राजपूत मतदाता अधिक हैं। दूसरे स्थान पर ओबीसी मतदाता आते हैं। उसके बाद अनूसूचित जाति व जनजाति के मतदाता आते हैं। सुलह में ब्राहम्ण व राजपूत मतदाता एक हुये तो प्रत्याशी राजपूत ही जीता। जब दोनों जातियों में मत विभाजन हुआ, तो प्रत्याशी ओबीसी समुदाय से जीता। सारा इलाका ग्रामीण ही है। जिसे सही मायनों में चंगर कहा जा सकता है। स्थानीय लोगों की आजिविका का साधन खेती बाड़ी ही है। पलम बैल्ट में धान की अच्छी खेती होती है। सिंचाई के लिये यहां खेतों में पानी की कोई कमी नहीं है।

सुलह से अभी तक चुने गये विधायक
वर्ष -चुने गये विधायक -पार्टी संबद्धता
2012 -जगजीवन पॉल -कांग्रेस
2007 -विपिन सिंह परमार -भाजपा
2003- जगजीवन पॉल -कांग्रेस
1998- बिपन सिंह परमार -भाजपा
1993- मान चंद राना -कांग्रेस
1990 -शांता कुमार- भाजपा
1985- मान चंद- कांग्रेस
1982- शांता कुमार -भाजपा
1977 -शांता कुमार -जनता पार्टी

सुलह के विधायक जगजीवन पाल
साधारण परिवार में जन्में सुलह के विधायक जगजीवन पाल के पास लंबा चौड़ा राजनैतिक अनुभव नहीं है। न ही उनके परिवार का कोई सदस्य सक्रिय राजनिति में रहा है। कृषक परिवार के जगजीवन स्नात्तक हैं व उन्होंने फार्मेसी में ऐलोपेथी में डिप्लोमा भी किया है। 63 वर्षीय जगजीवन का एक बेटा व एक बेटी है। मार्च 2003 में पहली बार विधायक चुने गये। उसके बाद 2012 में दोबारा चुनाव जीतने के बाद मौजूदा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बने।












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