हिमाचल में अब इस हाई पावर कमेटी के हवाले 37 दिन रहेगी सरकार
शिमला। हिमाचल प्रदेश में चुनाव संपन्न हो गये हैं तो उम्मीदवारों का भागय ईवीएम मशीनों में कैद होकर रह गया है जो कि 18 दिसंबर को होने वाले मतगणना तक बंद ही रहेगा। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि अगले 37 दिन तक प्रदेश का क्या होगा। हालांकि वीरभद्र सिंह अगली सरकार के गठन होने तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। लेकिन उनकी सरकार अब कोई अहम फैसला नहीं ले पायेगी यानी बस नाम के ही वह सीएम होंगे। इस बीच इस संवैधानिक संकट के समाधान के लिये चुनाव आयोग ने कुछ हद कर प्रयास किया है। जिससे अब आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते विकास कार्य चलते रहेंगे। लेकिन इस दौरान न तो कोई भर्ती होगी ना ही कोई इंटरव्यू। प्रदेश में कामकाज देखने के लिये चुनाव आयोग के निर्देश पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है जिसके चेयरमैन मुख्य सचिव वीसी फारका को नियुक्त किया गया है। इस समिति के सदस्य सचिव आईएएस अधिकारी सुनील चौधरी और जिस भी विभाग से संबंधित कार्य होगा उसका सचिव इसका तीसरा सदस्य माना जाएगा। कोई भी ऐसा निर्णय जो लाभ की दृष्टि से देखा जाता हो उसकी सिफारिश यह कमेटी करेगी जिसका अंतिम फैसला चुनाव आयोग करेगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अब तक इस कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं। इसमें उद्योग विभाग से संबंधित माइनिंग से जुड़ा एक मामला निपटाया गया है जिसके लिए अदालती आदेश भी थे। दूसरा बड़ा मामला खाद्य आपूर्ति विभाग से संबंधित था। इसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्य वस्तुओं के लिए टेंडर व खरीद की अनुमति थी।
जानकारी के मुताबिक आदर्श चुनाव आचार संहिता के दौरान रूटीन के कार्य तो संबंधित महकमें चलाते रहेंगे, मगर लाभ से जुड़ा कोई भी कार्य इसी कमेटी के जरिए सिरे चढ़ाना होगा। न तो इस दौरान नौकरी से जुड़ी कोई परीक्षा होगी और न ही कोई इंटरव्यू। यही नहीं, जारी विकास योजनाओं पर तो कोई असर नहीं होगा, मगर नई योजनाएं शुरू नहीं की जा सकेगी। अलबत्ता जनहित से जुड़ी योजनाओं के लिए यह कमेटी सिफारिश कर सकती है। हिमाचल में 20 दिसंबर तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुष्पेंद्र राजपूत ने आचार संहिता लागू रहने की पुष्टि की है। इस दौरान कोई शिलान्यास, उद्घाटन भी नहीं हो पाएगा।
ऐसे कार्य जो राज्यहित में करने लाजिमी होंगे या फिर किसी आकस्मिक परिस्थिति में कोई फैसला लेना आवश्यक होगा तो मुख्य सचिव की अध्यक्षतायुक्त यह कमेटी सिफारिश के उपरांत उसे सिरे चढ़ाने का कार्य करेगी। हालांकि इस बाबत भी चुनाव आयोग ही अंतिम निर्णय लेगा। वेतन अदायगी पर इसका कोई असर नहीं होगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यह रूटीन के कार्यों में आता है, जिस पर अलग से किसी भी तरह की स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं होगी। 37 दिन तक हिमाचल में कोई नई योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाएंगी। न ही नौकरी से जुड़ी परीक्षाएं व इंटरव्यू हो सकेंगे।












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