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Himachal Elections 2022: वोटिंग में अब 10 दिन बाकी, भाजपा-कांग्रेस का प्रचार युद्ध चरम पर

Himachal Elections 2022: हिमाचल प्रदेश में वोटिंग के लिए अब दस दिन ही बचे हैं। चुनाव प्रचार चरम पर है। भाजपा सत्ता बरकरार रखने के लिए जी-जान लगाये हुए है तो कांग्रेस वापसी के लिए। दोनों दलों के शीर्ष नेता सघन चुनाव प्रचार में जुटे हैं। लोकिन इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है बागियों से निबटना। भाजपा के चार पूर्व विधायक समेत करीब 20 नेता निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

Himachal Elections 2022 BJP and congress election campaign step up in himachal

कांग्रेस के 14 विक्षुब्ध नेता भी मैदान में हैं। हालांकि भाजपा ने बगावत करने वाले चार पूर्व विधायकों को निलंबित कर दिया है। लेकिन विरोध के राजनीतिक असर से इंकार नहीं किया जा सकता। अनुमान है कि भाजपा को 14 सीटों पर और कांग्रेस को 7 सीटों पर बागी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कांग्रेस ने भी तीन पूर्व विधायकों समेत छह बागियों को पार्टी से निकाल दिया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक ने पार्टी पर टिकट बेचने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने गगरेट विधानसभा सीट का टिकट 14 करोड़ रुपये में बेचा है।

राम-रहीम को लेकर भाजपा निशाने पर

राम-रहीम को लेकर भाजपा निशाने पर

भाजपा पर आरोप लगा रहा है कि वह चुनावी फायदे के लिए गुरमीत राम-रहीम का इस्तेमाल कर रही है। डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख राम-रहीम हत्या और रेप के जुर्म में उम्र कैद की सजा काट रहा है। वह 15 अक्टूबर को 40 दिनों के पैरौल पर रिहा हुआ है। ऐसे दागी व्यक्ति से भाजपा के नेता जीत का आशीर्वाद ले रहे हैं। राम-रहीम को लेकर भाजपा में भी विवाद शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के स्टार चुनाव प्रचारक शांता कुमार ने राम-रहीम के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध किया है। जब कि दूसरी तरह कुछ नेता चुनावी जीत के लिए इसके आशीर्वाद को जरूरी बता रहे हैं। हरियाणा के रहनेवाले राम-रहीम का हिमाचल प्रदेश में भी असर है। हरियाणा के तीन जिलों (पंचकुला, अंबाला, यमुना नगर) की सीमा हिमाचल के दो जिलों (सोलन, सिरमौर ) से मिलती है। इसलिए हिमाचल में भी राम-रहीम के अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है।

“राम-रहीम अपने लिए चमत्कार क्यों नहीं करते ?”

“राम-रहीम अपने लिए चमत्कार क्यों नहीं करते ?”

शांता कुमार ने अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा है, बलात्कार और हत्या के दोषी को बार-बार पैरोल देना दुर्भाग्य की बात है। कुछ नेता ही ऐसे अपराधी को पेरौल दिला रहे हैं। सत्ता और वोट के लिए इसे जेल से बाहर निकाल रहे हैं। देश का कानून बदलना चाहिए। दोष साबित अपराधियों को पैरोल नहीं मिलना चाहिए। उससे जीत का आशीर्वाद लेना अंधविश्वास की पराकाष्ठा है। अगर वह इतना ही चमत्कारी होता तो पहले अपना कल्याण करता। जेल में नहीं होता। वोट की लालच में नेता (भाजपा) ऐसा कर रहे हैं। शांता कुमार के इस रुख से भाजपा को झटका लग सकता है।

अमित शाह की तीन रैली, फीडबैक के लिए बैठक

अमित शाह की तीन रैली, फीडबैक के लिए बैठक

भाजपा के चुनाव प्रचार की बागडोर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनावी चेहरा हैं। भाजपा मोदी सरकार और जयराम सरकार के कामकाज पर वोट मांग रही है। मंगलवार को अमित शाह ने हिमाचल प्रदेश में तीन चुनावी रैलियां कीं। शाम को उन्होंने शिमला में चुनाव की जमीनी हकीकत को समझने के लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र कश्यप, प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना समेत कई सीनियर लीडर शामिल थे। जिन सीटों पर उम्मीदवार बदले गये हैं, उन पर खास चर्चा हुई। फीडबैक के बाद नाराज नेताओं को साथ लेकर चलने पर सहमति बनी। यानी भाजपा भी मान रही है कि अगर विक्षुब्ध गतिविधियों को काबू में नहीं किया गया तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।

नड्डा के समर्थक भी बागी

नड्डा के समर्थक भी बागी

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले हैं। इस चुनाव में उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। बिलासपुर जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं। पिछले चुनाव में चार में तीन सीटों पर भाजपा जीती थी। एक सीट कांग्रेस को मिली थी। 2022 के चुनाव में नड्डा के करीबी नेता भी बागी हो गये हैं। नड्डा समर्थक सुभाष शर्मा का टिकट कट गया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। जिले की झनदत्त सीट पर भी भाजपा बगवात झेल रही है। नड्डा की राह आसान नहीं दिख रही। दूसरी तरफ कांग्रेस जयराम सरकार के मंत्रियों के खिलाफ आरोप पत्र लेकर चुनावी मैदान में है। इस आरोप पत्र में कई घोटालों का जिक्र है। कांग्रेस के इस आक्रामक चुनाव प्रचार से भाजपा की चुनौती बढ़ गयी है।

पहली कैबिनेट में 1 लाख रोजगार को मंजूरी

पहली कैबिनेट में 1 लाख रोजगार को मंजूरी

कांग्रेस की तरफ से अभी प्रियंका गांधी ही चुनाव प्रचार की अगुवाई कर रही हैं। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना और एक लाख नौकरी को चुनावी मुद्दा बना रखा है। सोनिया गांधी भी स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल हैं। लेकिन अभी तक उनका कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। राहुल गांधी फिलहाल भारत जोड़ो यात्रा पर हैं। प्रियंका गांधी ने मंगलवार को चुनावी सभा में अपने वादों को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में ही एक लाख रोजगार और पुरानी पेंशन योजना को मंजूरी दे दी जाएगी। प्रियंका ने जयराम सरकार की रोजगार नीति पर हमला किया और पूछा कि राज्य में 63 हजार सरकारी पद क्यों खाली हैं ? हर पांच साल पर बदलाव कीजिए तभी सरकार का दिमाग ठीक रहता है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनाव प्रचार की जोरदार टक्कर चल रही है।

यह भी पढ़ें: भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आसान नहीं है हिमाचल विधानसभा चुनाव

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