हिमाचल चुनाव 2017: भरमौर (आरक्षित अनूसूचित जनजाति ) विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानिये
हिमाचल प्रदेश के आखिरी छोर में पीर पंजाल पहाडियों और धौलाधार पर्वतमाला के मध्य बसा भरमौर विधानसभा क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दो नंबर सीट है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के आखिरी छोर में पीर पंजाल पहाडियों और धौलाधार पर्वतमाला के मध्य बसा भरमौर विधानसभा क्षेत्र हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दो नंबर सीट है। चंबा जिले में स्थित यह निर्वाचन क्षेत्र मंडी लोक सभा क्षेत्र में आता है और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस क्षेत्र में 21 गैर-जनजातीय पंचायत है यानि कि एक ही इलाके में दो कानून। 2012 में इस क्षेत्र में कुल 63,710 मतदाता थे।

भरमौर की पहचान है गद्धी जनजाति
भरमौर विधानसभा, गद्धी जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है। गद्धी बहुल स्थान होने के कारण भारमौर को गद्देरण भी कहा जाता है। भेड़-बकरी पालन गद्धी जनजाति के लोगों की जीवन प्रणाली की अहम् हिस्सा रहा है इसलिए ये लोग भेड़-बकरियों के चराने के लिए भरमौर से दुसरे स्थानों पर ले जाते थे। पहाड़ों को पार करने वाले बहुत से गद्धी लोगों ने समय के साथ-साथ धीर-धीरे पहाड़ों के दोनों ओर अपने घर बना लिए। इनकी बस्ती को गद्देरन कहा जाता है, जिसका अर्थ गद्दियों का घर है। अब यह जाति अपने मूल स्थान को छोडक़र मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा आदि स्थानों में भी जा बसी है। भरमौर चुनाव किसी प्रत्याशी की जीत-हार तय करने में इस जनजाति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

बिजली परियोजना ने भरमौर को पूरी दुनिया से जोड़ा
एक समय ऐसा भी था, जब भरमौर भारी बर्फबारी की वजह से पूरी दुनिया से छह महीने के लिये कट जाता था लेकिन पिछले कुछ सालों से इलाके में हाईडल प्रोजेक्ट आने से सरकार का इस तरफ ध्यान गया। अब भरमौर की तरफ आने वाले सभी रास्ते 12 महीनों खुले रहते है जिससे इलाके के लोगों को काफी फायदा मिला। मुख्यत: चार भागों, पांगी, होली, मंहला और भरमौर में बंटा यह विधानसभा क्षेत्र मणिमहेश की धार्मिक यात्रा और 84 मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। इस यात्रा से भरमौर निवासियों को अच्छी खासी आमदन हो जाती है। इसके अलावा स्थानीय लोगों की आमदनी का जरिया सेब के बगीचे व खेती बाड़ी है। भरमौर में साक्षरता दर अच्छी है लेकिन कठिन भागौलिक परिस्थितयों की वजह से लोग अपने पारंपरिक काम धंधों पर ही ज्यादा निर्भर हैं।

भरमौर विधानसभा क्षेत्र एक नजर में
यह विधानसभा सीट नंबर 2 है।
जिला: चंबा
लोकसभा क्षेत्र: मंडी
जनसंख्या: 81639
साक्षरता: 71 प्रतिशत
शहरीकरण: नहीं, होली व भरमौर छोटे कस्बे बाकी इलाका पहाड़ी व ग्रामीण

आज तक भरमौर से चुने गये विधायक
वर्ष चुने गये विधायक पार्टी कुल वोट
2012 ठाकुर सिंह भरमौरी कांग्रेस 63,710
2007 तुलसी राम भाजपा 55,174
2003 ठाकर सिंह कांग्रेस 48,298
1998 तुलसी राम भाजपा 41,965
1993 ठाकुर सिंह निर्दलीय 39,486
1990 तुलसी राम भाजपा 36,846
1985 ठाकुर सिंह कांग्रेस 28,768
1982 ठाकुर सिंह कांग्रेस 28,004
1977 राम चन्द जनता पार्टी 25,347

एक भेड़ पालक का बेटा है यहां का विधायक
भरमौर विधानसभा क्षेत्र से इस समय ठाकुर सिंह भरमौरी विधायक है। पांचवी बार विधायक बने ठाकुर सिंह को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने कैबिनेट में वन मंत्री का पद दिया। एक भेड़ पालके के बेटे से वन मंत्री तक का सफर करने वाले ठाकुर सिंह की कहानी किसी को भी प्रेरित कर सकती है। ठाकुर सिंह को नाचने गाने का पूरा शौक है और वह सार्वजनिक तौर पर भी ठुमके लगाने से कभी गुरेज नहीं करते। इनकी इस आदत की वजह से वह हमेशा सुर्खियों में भी बने रहते हैं। यूं तो ठाकुर सिंह का राजनीतिक कैरियर काफी अच्छा रहा है लेकिन इस बार वन मंत्री बने तो उनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद उभरे जिससे उनकी काबिलियत पर सवाल उठते रहे हैं। इस बीच इलाके में यह चर्चा जोरों पर है कि जनता के गुस्से को भांपते हुये इस बार ठाकुर सिंह खुद चुनाव लडने के बजाये अपने बेटे अमित को चुनावी मैदान में उतार सकते हैं।












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