हिमाचल चुनाव: EC के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचीं विद्या स्टोक्स
शिमला। ठियोग चुनाव क्षेत्र से नामांकन रद्द होने से हो रही अपनी फजीहत से बचने के लिये आखिर सिंचाई मंत्री विद्या स्टोक्स बुधवार को चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गईं। स्टोक्स ने अदालत आज में अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को चुनौती दी है। दरअसल मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने ठियोग से कांग्रेस उम्मीदवार विद्या स्टोक्स का नामांकन पत्र रद्द कर दिया था। नामांकन रद्द होने का कारण जरूरी दस्तावेजों का पूरा नहीं होना पाया गया था जिसके चलते निर्वाचन आयोग ने उनके पर्चे पर मुहर नहीं लगाई और उसे खारिज कर दिया था। एसडीएम ने नामांकन रद्द होने की पुष्टि की थी। नामांकन के आखिरी दिन विद्या और दीपक राठौड़ ने कांग्रेस के निशान पर अपने-अपने नामांकन पत्र जमा करवाए थे।

विद्या के पास अधिकृत पत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू की तरफ से था न कि आस्कर फर्नाडिस की तरफ से। यहीं पर पेंच फंस रहा है कि क्या सुक्खू इसके लिए अधिकृत हैं या नहीं। मंगलवार को भाजपा और माकपा ने उनके आवेदन पर आपत्ति जताते हुए निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की। जिसे सही पाया गया। एसडीएम ताशी संडूप ने जांच में पाया कि विद्या स्टोक्स ने आधे-अधूरे कागजात जमा करवाए थे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद उनका नामांकन रद्द हो गया है। हालांकि विद्या स्टोक्स चुनाव तो नहीं लड़ सकतीं। लेकिन अपनी हो रही किरकिरी से बचने के लिये ही विद्या स्टोक्स आज अदालत में पहुंची। सारे प्रकरण में पार्टी अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू भी विवादों में फंस गये हैं। सवाल यही उठ रहा है कि क्या पार्टी अध्यक्ष विद्या स्टोक्स को पत्र जारी भी कर सकते थे कि नहीं।
उधर खुद सुखविन्दर सिंह सुक्खू विद्या स्टोक्स के बजाये दीपक राठौर को दोषी मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीपक राठौर ने जो किया वह गलत था। उन्होंने कहा कि दीपक राठौर को चुनाव लडऩे से मना किया गया था। उन्होंने कहा कि मैंने हाईकमान के कहने पर ही विद्या स्टोक्स को चुनाव लडऩे के लिये मनाया था। लेकिन दीपक राठौर ने किसी की भी बात नहीं मानी। जिससे यह मामला उलझा।












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