सत्येंद्र जैन और मूसेवाला प्रकरण से हिमाचल में आप को झटका, क्या ले पाएगी कांग्रेस की जगह?
शिमला, 3 जून। पहाड़ी राज्य हिमाचल में चुनावी तैयारियों में जुटी आम आदमी पार्टी की धमक चंद दिनों में ही घटती नजर आ रही है। पहाड़ की राजनीति में शिद्दत से पैर जमाने में जुटी आम आदमी पार्टी को लगातार झटके मिल रहे हैं। जिससे पार्टी के यहां पैर नहीं जम पा रहे हैं। यही वजह है कि तमाम कोशिशों के बाद दो महीनों में आम आदमी पार्टी यहां संगठन स्थापित करने में कामयाब नहीं हो पा रही है जिससे आप के कार्यकर्ताओं में अब जोश ठंडा पड़ने लगा है।

हिमाचल में पैर जमाने की कोशिश में आप
हालांकि, दो माह पहले पंजाब में भगवंत मान की सरकार बनने के बाद हिमाचल प्रदेश में आप की एंट्री हूई तो प्रदेश में नये राजनीतिक समीकरण उभरने लगे थे। मंडी में केजरीवाल व भगवंत मान के रोड शो और कांगड़ा में केजरीवाल की रैली में लोगों की भारी भीड़ देखकर प्रदेश के पारंपरिक दलों कांग्रेस व भाजपा के नेताओं के पसीने छूटने लगे थे। लेकिन भाजपा ने इससे पहले ही आप के प्रदेश अध्यक्ष अनूप केसरी और उनके साथियों को अपने खेमे में मिलाकर आप को झटका दिया। लेकिन इसके बाद आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में संगठन का ढांचा तैयार करने के मकसद से कई नियुक्तियां कीं। दिल्ली के स्वास्थय मंत्री सत्येंद्र जैन को हिमाचल चुनाव का प्रभारी बनाया गया है। उनके साथ बिपन राय को तैनात किया गया है। जबकि दुर्गेश पाठक प्रभारी होंगे। रतनेश गुप्ता और करमजीत सिंह रिंटू व कुलवंत बाथ सह प्रभारी बनाये गये हैं। दीपक बाली पार्टी मीडिया प्रभारी होंगे। दिल्ली के इन नेताओं ने प्रदेश में अपने वालंटियर के साथ आउटरीच कार्यक्रम भी चलाया।

आप कार्यकर्ताओं के उत्साह पर पड़ा असर
इससे पहले कि उनके प्रयास कोई असर दिखाते पार्टी के हिमाचल प्रभारी दिल्ली के स्वास्थय मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हो गई। अभी पार्टी इस मामले से उभरी भी नहीं थी कि पंजाब में सिद्धू मूसेवाला का कत्ल हो गया। मूसेवाला की हत्या से आप नेता बैकफुट पर आ गये हैं। लोगों में आप के प्रति गुस्सा बढ़ा है। और लोग आप नेताओं को जमकर लताड़ रहे हैं। हिमाचल के तीन जिले पंजाब से सटे हैं। व यहां मूसेवाला की लोकप्रियता रही है। इसी इलाके में आप में अपनी संभावनायें तलाश रही थी। आम आदमी पार्टी की ओर से खासतौर पर ऊना और कांगड़ा जिलों पर फिलहाल फोकस किया जा रहा था, जो पंजाब से सटे हुए हैं। कांगड़ा में सबसे ज्यादा 15 विधानसभा सीटें हैं। लेकिन अब हालात बदल गये हैं। आप के नेताओं के कदम थम गये हैं। यही वजह है कि अब महौल में पहले जैसा उत्साह नजर नहीं आ रहा है।

हिमाचल में संकट में पड़ गई है आप
आम आदमी पार्टी हिमाचल में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव पर नजर गड़ाए हुए हैं। इस पहाडी प्रदेश में अब तक कांग्रेस और भाजपा ही मुख्य दल रहे हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी की कोशिश इस प्रदेश में तीसरे दल के तौर पर उभरने की है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी ने हिमाचल प्रदेश की सभी 68 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी शुरू कर रखी है। लेकिन पार्टी को मिल रही चुनौतियों के चलते अब तक यही तय नहीं हो पा रहा है कि पार्टी की कमान किसे सौंपी जाये व किस नेता को आगे लाकर चुनाव लडा जाये। पार्टी को कांग्रेस व भाजपा नेताओं की ओर से पहले जैसा रिस्पांस अब नहीं मिल रहा है। दोनों ही दलों के नेताओं के अपनी पार्टी छोडने के प्रयास ठंडे पड़ गये हैं। माना जा रहा है कि जैन की गिरफ्तारी और मूसेवाला की मौत ने पार्टी को संकट में डाल दिया है।
दरअसल, कांग्रेस और भाजपा ही मुख्य दल हैं। ऐसे में कमजोर होती कांग्रेस की जगह लेने पर नजर रख रही आम आदमी पार्टी ऐसी जगहों पर अपने लिए संभावना देखती है। बता दें कि हिमाचल में लंबे समय से तीसरे मोर्चे की कमी रही है। यहां 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस नाम की पार्टी उभरी थी और उसने भाजपा के साथ मिलकर सरकार भी बनाई थी, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकी थी। ऐसे में अब आप इसकी कमी पूरी करने की कोशिश में जुटी है।












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