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हिमाचल: हड़ताल पर गए 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी, सरकार ने की एस्मा लगाने की घोषणा

शिमला। हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा पिछले तीन दिनों से ठप पड़ी है, जिससे मरीज बेहाल हैं। इस सेवा से जुड़े कर्मचारी किसी भी तरह झुकने को तैयार नहीं है। हालात बिगड़ते देख सरकार ने चार जिलों में हड़ताली कर्मचारीयों पर एस्मा लगा दिया है। एस्मा लागू होने के बाद यदि ये कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं तो इन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा।

नेशनल एंबुलेंस सर्विस कर्मचारी यूनियन जीवीके कम्पनी के खिलाफ सडक़ पर उतर आई है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। पिछले तीन साल से कोई इंक्रीमेंट भी नहीं मिला है और ना ही पीएफ मिला है। गाड़ियों की मैंटीनेंस की ओर भी ध्यान नहीं दिया जाता। 12 से 48 घंटों की डयूटी के बाद भी बस 6 से 7 हजार रुपए वेतन मिलता है, जिसका कोई फिक्स टाइम नहीं है। कर्मचारियों की मांग है कि प्रदेश सरकार कम्पनी को हटाने को लेकर सख्त कदम उठाए और सभी कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग के दायरे में ला कर स्थायी नीति बनाये। यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा है कि जब तब प्रदेश सरकार कम्पनी को नहीं हटाती या स्थायी नीति नहीं बनाती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

108 and 102 ambulance authorties goes on strike in Shimla

शिमला, सोलन, चम्बा तथा सिरमौर जिलों में 108 और 102 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। चारों जिलों में 108 की 92 तथा 102 के 125 रोगी वाहन खड़े हैं। हड़ताल के चलते रोगी वाहनों के खड़े होने से रोगियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं आवश्यक सेवा अधिनियम के दायरे में आती हैं। प्रदेश में आपातकालीन सेवा पूरी तरह ठप्प है। हालात बेकाबू हो गए हैं। राज्य सरकार ने संबंधित जिलाधीशों को 108 और 102 एंबुलेंस को सुचारू तौर पर चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है।

स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने बताया कि इस दौरान लोगों को दिक्कतें न हों, इसके लिए संबंधित जिलाधीशों व जेवीके कंपनी को पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। एंबुलेंस में अस्पतालों से फार्मासिस्ट लगाने को कहा गया है। इसके अलावा कंपनी को दूसरे राज्यों से एंबुलेंस के लिए ड्राइवर बुलाने के निर्देश दे दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यदि गुरुवार तक कर्मी काम पर नहीं लौटते हैं तो कंपनी को उन्हें बर्खास्त कर दूसरे लोगों को काम पर रखने को कह दिया गया है। इसके साथ ही इन पर एंबुलेंस वाहनों को रोकने की स्थिति में भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

108 and 102 ambulance authorties goes on strike in Shimla

सरकार की तरफ से पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज राय ने इन हड़ताली कर्मचारियों से बात की। बातचीत में कर्मचारियों से सरकार ने 10 दिन का वक्त मांगा। मिशन निदेशक से बातचीत के बावजूद कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हड़ताली कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुधावार को बुलाया था। मुलाकात के बाद हड़ताली कर्मियों ने आश्वासन तो दिया लेकिन सचिवालय से बाहर निकलते ही फिर से नारेबाजी करते हुए हड़ताल जारी रखने की घोषणा कर दी।इसके बाद हड़ताल पर अड़े कर्मचारियों पर सरकार ने एस्मा लगाने की घोषणा कर दी है।

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