रिंकू सिंह राही : UPSC क्रैक करने से पहले शूटरों ने मारी 7 गोलियां, ₹ 83 Cr का घोटाला करने वालों ने छीनी आंख

हाथरस, 27 जुलाई। ये शख्‍स कमाल का है। इसे ना अफसलताएं तोड़ पाईं और ना ही भ्रष्‍ट अफसर। इसे मारने के लिए शूटर बुलाए गए। सात गोलियां दागी गईं। हमले में एक आंख तक खो दी, मगर हौसला बरकरार रखा। हिम्‍मत का अंदाजा इस बात से लगा लो कि इन्‍होंने अपने 16वें प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास कर डाली और बड़े अफसर बन गए।

रिंकू सिंह राही, AIR 683, UPSC 2021

रिंकू सिंह राही, AIR 683, UPSC 2021

हम बात कर रहे हैं उत्‍तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी ब्‍लॉक के गांव उसवा के रहने वाले रिंकू सिंह राही की। इन्‍होंने आईएएस बनने के लिए 17 साल तक प्रयास किया। हालांकि साल 2021 में यूपीएससी पास कर डाली, मगर रैंक 683वीं मिलने पर आईएएस कैडर मिलना मुश्किल है। वर्तमान में रिंकू सिंह राही उत्‍तर प्रदेश के हापुड़ में बतौर पीसीएस अफसर तैनात हैं।

रिंकू सिंह राही का इंटरव्‍यू

रिंकू सिंह राही का इंटरव्‍यू

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में पीसीएस अफसर रिंकू सिंह राही ने अपनी शिक्षा, परिवार, घोटाले उजागर करना, जानलेवा हमला और फिर पीसीएस अफसर से यूपीएससी परीक्षा पास करने का पूरा सफर बयां किया जो उन अफसरों के लिए भी मिसाल है, जो भ्रष्‍ट सीनियर अधिकारियों और दबंगों से डर जाते हैं। रिंकू सिंह की सक्‍सेस स्‍टोरी युवाओं को असफलताओं से कभी हार नहीं मानने की भी सीख देने वाली है।

 2004 में बन गए PCS अफसर

2004 में बन गए PCS अफसर

रिंकू सिंह ने बताया कि कक्षा चौथी तक की पढ़ाई गांव से पूरी की। फिर अलीगढ़ आ गए थे। 12वीं कक्षा अलीगढ़ से पास करने के बाद जमशेदपुर चले गए और वहां साल 2002 में एनआईटी से बीटेक किया। फिर रिंकू सिंह ने साल 2004 में उत्‍तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास और 2008 में पहली पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्‍याण अधिकारी पद पर मिली।

पहली ही पोस्टिंग में उजागर किया करोड़ों का घोटाला

पहली ही पोस्टिंग में उजागर किया करोड़ों का घोटाला

बतौर पीएससी अफसर रिंकू सिंह के पहली ही पोस्टिंग जानलेवा साबित हुई। नवंबर 2008 में मुज्‍जफनगर में ज्‍वाइन करने के बाद रिंकू सिंह की जानकारी में आया कि यहां पर कर्मचारी, अधिकारी और नेताओं की मिलीभगत से स्‍कॉलरशिप, विवाह योजना, ओल्‍डऐज होम, पेंशन, पारिवारिक लाभ योजना व नलकूप योजना आदि में घोटाला हो रहा है। रिंकू सिंह ने जांच करवाई तो एक साल में 50 करोड़ से अधिक का घोटाला उजागर हुआ। चार साल के मामलों को मिलाने पर तो घोटाला 83 करोड़ को पार कर गया।

 हाथ, पैर, सिर व छाती पर लगीं गोलियां

हाथ, पैर, सिर व छाती पर लगीं गोलियां

मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्‍याण अधिकारी के पद पर रहते हुए रिंकू सिंह राही करोड़ों का घोटाला उजागर करने के बाद 26 मार्च 2009 का दिन कभी नहीं भूल पाएंगे। सुबह साढ़े छह बजे रिंकू सिंह अपने सरकारी आवास के सामने बैंडमिंटन खेल रहे थे। तभी इन पर आफिस अकाउंटेंट, नेता व शूटरों ने हमला किया। शूटरों ने सात गोली मारी, जो सिर, आंख, व हाथ-पैर पर लगी। हमले में रिंकू सिंह की एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई, मगर जान बच गई थी।

फिर तबादले दर तबादले

फिर तबादले दर तबादले

गोली लगने के बाद रिंकू सिंह चार माह अस्‍पताल में भर्ती रहे। फिर लौटकर मुजफ्फरनगर नहीं गए। अस्‍पताल से ही इनका तबादला लखनऊ समाज कल्‍याण निदेशालय में कर दिया गया। साल 2009 में इन्‍हें अलीगढ़ स्थित आईएएस पीसीएस कोचिंग सेंटर में कोर्स कोर्डिनेटर पद पर लगाया। फरवरी 2013 का इनका तबादला बदौही में हुआ। कुछ समय बाद इन्‍हें श्रावस्ती में जिला समाज कल्‍याण विकास अधिकारी पद पर पोस्टिंग मिली। फिर ललीतपुर रहते हुए इन्‍हें निलंबित किया गया। यहां पर इन्‍होंने ओल्‍ड ऐज होम घोटाला उजागर किया था।

रिंकू सिंह राही का परिवार

रिंकू सिंह राही का परिवार

रिंकू सिंह का जन्‍म 20 मई 1982 को आटा चक्‍की चलाने वाले सौदान राही व किरण राही के घर हुआ। ये दो भाई व एक बहन है। रिंकू राही सबसे बड़े हैं। छोटा भाई दिनेश कुमार राही दादरी की एक फैक्‍ट्री में काम करते हैं। बहन अर्चना राही हाउसवाइफ है। रिंकू सिंह की शादी साल 2013 सुलेखा प्रधान के साथ हुई। सुलेखा पहले कस्‍तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय अलीगढ़ में टीचर थीं। फिर जॉब छोड़ दी। इनके एक बेटा कुशाग्र है।

रिंकू सिंह राही का यूपीएससी का सफर

रिंकू सिंह राही का यूपीएससी का सफर

रिंकू सिंह का यूपीएससी सफर करीब 17 साल का रहा। साल 2003 में पहली बार भाग्‍य आजमाया और मुख्‍य परीक्षा परीक्षा पहुंचे। फिर 2008 में पीसीएस अफसर बनने के बाद पढ़ने को समय नहीं म‍िल पाता था। ऐसे में प्री भी पास नहीं पाई। यूपीएससी में 16 बार प्रयास के सवाल पर रिंकू सिंह कहते हैं कि वे एससी जाति से ताल्‍लुक रखते हैं और उनकी एक आंख चली जाने के कारण दिव्‍यांग की श्रेणी में भी आ गए। ऐसे में उन्‍हें यूपीएससी परीक्षा देने में सामान्‍य अभ्‍यर्थी से अधिक मौके मिले। आखिरी अवसर में पास भी हो गए। अभी कैडर अलॉट हुआ नहीं है।

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