Rabia Kidwai कौन हैं? मुस्लिम बहुल नूंह के चुनावी दंगल में पहली महिला कैंडिडेट, कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती
Who is Rabia Kidwai: हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर 2024 के चुनाव (Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024) 5 अक्टूबर को होने हैं। चुनावी बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी शतरंज पर अपने-अपने मोहरों को तैनात कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) राज्य में वापसी के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) भी करारी टक्कर देने के लिए तैयार है।
खास बात यह है कि मुस्लिम बहुल हरियाणा के नूंह जिले में आप ने राज्य के पूर्व राज्यपाल डॉ. अखलाक-उर-रहमान किदवई की पोती 34 वर्षीय राबिया किदवई पर दांव लगाया है। यह पहली बार है, जब इस सीट से कोई पहली महिला उम्मीदवार चुनावी दंगल में कूदी हो।

नूंह, जो अपने रूढ़िवादी सामाजिक मानदंडों के लिए जाना जाता है, वहां महिलाओं का राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेना एक असामान्य बात मानी जाती है। राबिया किदवई, जो गुरुग्राम की एक व्यवसायी हैं, इन पुरानी धारणाओं को चुनौती देते हुए एक नया इतिहास रचने की ओर बढ़ रही हैं।
आसान नहीं राबिया की चुनावी डगर!
राबिया किदवई का राजनीतिक सफर आसान नहीं है, क्योंकि वह कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिसमें एक बाहरी व्यक्ति के रूप में देखा जाना और लिंग आधारित पूर्वाग्रह शामिल है। लेकिन राबिया का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी एक बड़े बदलाव का प्रतीक है और यह हरियाणा के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को प्रभावित करेगी।
उनके मुकाबले में अनुभवी राजनेता हैं, जिनमें कांग्रेस के अफताब अहमद और इंडियन नेशनल लोकदल के ताहिर हुसैन शामिल हैं। इसके बावजूद, राबिया अपने परिवार की राजनीतिक विरासत और महिला होने की अपनी अलग पहचान पर भरोसा करके जनता का समर्थन हासिल करने की उम्मीद कर रही हैं।
नूंह में राजनीतिक स्थिति
नूंह, जिसे 2005 में गुरुग्राम और फरीदाबाद के कुछ हिस्सों से अलग करके बनाया गया था, तीन विधानसभा क्षेत्रों नूंह, फिरोजपुर: झिरका और पुन्हाना में बंटा हुआ है। यह इलाके विकास के मामले में पीछे रहे हैं, खासकर गुरुग्राम और सोहना जैसे क्षेत्रों की तुलना में। राबिया का मानना है कि वह एक बाहरी व्यक्ति हो सकती हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण नूंह के विकास में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
अपने दादा अखलाक-उर-रहमान किदवई के योगदान का जिक्र करते हुए राबिया ने बताया कि कैसे उनके परिवार ने शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज की स्थापना की, जो इस क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा कदम था। हालांकि, उनका कहना है कि नूंह अभी भी अन्य विकसित क्षेत्रों से काफी पीछे है।
महिला होने की चुनौती
चुनाव प्रचार के दौरान, राबिया ने महसूस किया कि नूंह में लिंगानुपात उनकी सोच से भी अधिक गहरा है। उन्होंने बताया कि यहां की महिलाएं शायद ही किसी राजनीतिक समस्या के समाधान के लिए राजनीतिक कार्यालयों का रुख करती हैं। हालांकि महिलाओं में कुछ जागरूकता आई है, लेकिन फिर भी चुनाव लड़ना या राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना यहां की महिलाओं के लिए असामान्य माना जाता है।
नूंह में महिला उम्मीदवारों का इतिहास
हालांकि, राबिया नूंह से चुनाव लड़ने वाली पहली महिला हैं, लेकिन नूंह के आसपास के अन्य क्षेत्रों में पहले भी महिलाएं चुनाव लड़ चुकी हैं। 1977 में, फीरोजपुर झिरका से शमशाद पहली महिला प्रत्याशी थीं। इसके बाद, 1987 में ललिता देवी और 1999 में ममता ने चुनाव लड़ा था। पुन्हाना से 2019 में नौकशम चौधरी भाजपा की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ी थीं, हालांकि वे जीत नहीं पाईं।
नूंह जिले के किसी भी विधानसभा क्षेत्र से आज तक कोई महिला चुनाव नहीं जीत सकी है। हरियाणा के गठन के बाद से केवल 87 महिलाओं को ही विधानसभा में चुना गया है और राज्य ने अभी तक कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं देखा है।
नूंह में किन-किन के बीच दंगल?
| AAP | राबिया किदवई |
| भाजपा | संजय सिंह |
| कांग्रेस | आफताब अहमद (मौजूदा विधायक) |
| जेजेपी | बीरेंद्र सिंह गंगोली |
| इनेलो | ताहिर हुसैन |
चुनौतियों पर एक नजर
- लिंगानुपात के मामले में राज्य में खराब स्थिति
- एक बाहरी व्यक्ति के रूप में देखा जाना
- अनुभवी राजनेताओं से मुकाबला
- परिवार की राजनीतिक विरासत
- महिला होने की चुनौती
- महिला होने की अपनी अलग पहचान को कायम रखना
राबिया किदवई की उम्मीदें
राबिया का दावा है कि 2023 के नूंह दंगों के बाद लोग बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि चाहे महिला हो या पुरुष, सभी मतदाता बदलाव चाहते हैं और उनका अभियान इसी उम्मीद पर टिका है। राबिया का यह भी कहना है कि सांप्रदायिक हिंसा राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल की गई थी, और लोग अब नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
5 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में राबिया किदवई को एक बड़े बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। परिणाम 8 अक्टूबर को आने की उम्मीद है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि नूंह की जनता इस ऐतिहासिक महिला उम्मीदवार को किस प्रकार से स्वीकार करती है।
कितनी संपत्ति की मालकिन हैं राबिया?
- कुल संपत्ति- 20 लाख रुपए से ज्यादा।
- FD - 50 हजार रुपए की।
- देनदारी- शून्य।
- पिता का नाम- अमीक उर किदवई












Click it and Unblock the Notifications