OPINION: हरियाणा में सरकारी नौकरियों और रोजगार के मामले में कैसे हुआ चमत्कार?
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार 26 अक्टूबर, 2023 को अपने कार्यकाल के 9 वर्ष पूरे करने जा रही है। इतने वर्षों में प्रदेश ने लगभग हर क्षेत्रों में प्रगति की है। लेकिन, जब बात युवाओं को रोजगार देने या सरकारी नौकरियों की आती है तो हरियाणा जैसे छोटे राज्य की प्रगति बड़े प्रदेशों के लिए भी किसी मिसाल से कम नहीं है।
बीते 9 वर्षों में हरियाणा में सिर्फ सरकारी नौकरियों में 30% की वृद्धि हुई है। लेकिन, अगर रोजगार की बात करें तो हरियाणा में एक दशक से भी कम में 47 लाख से ज्यादा युवाओं को निजी क्षेत्रों में भी जॉब मिली है।

हरियाणा में रोजगार के क्षेत्र में अकल्पनीय बदलाव
एक झटके में लगेगा कि हरियाणा जैसे राज्य में यह उपलब्धि सपने की तरह है। लेकिन यह सफलता सिर्फ सपने देखकर नहीं, बल्कि खट्टर सरकार की अथक कोशिशों की वजह से ही मिल सकी है। सबसे बड़ी बात ये है कि भाजपा सरकार के दो कार्यकालों में राज्य शासन पर लगा पर्ची-खर्ची वाला दाग भी मिट चुका है और खासकर सरकारी नौकरियां देने में पूरी तरह से पारदर्शिता कायम हुई है।

पारदर्शिता से युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है
जब कोई कल्याणकारी सरकार पारदर्शिता के साथ काम करती है तो जनता में विश्वास का माहौल पैदा होता है, जिससे युवाओं को अपनी क्षमता पर भरोसा बढ़ जाता है। उन्हें यकीन हो जाता है कि अगर हम में मेरिट है, हमने मेहनत की है तो कामयाबी हमारे कदम चूमेगी।

हरियाणा में 9 वर्षों में सरकारी नौकरियों की आई बहार
यह सिर्फ कहने की बातें नहीं हैं। जरा विस्तार में चलते हैं। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार 2014 के अक्टूबर महीने से ही सत्ता में है। इस दौरान राज्य में युवाओं को 1 लाख 14 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियां मिली हैं। आने वाले कुछ समय में 41 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां देने की प्रक्रिया चल रही है।
हरियाणा में लद गया पर्ची-खर्ची वाला जमाना
अगर हरियाणा में इससे पहले की सरकारों के कार्यकाल से इसकी तुलना करेंगे तो अंदाजा लग जाएगा कि सरकार अगर सिर्फ जनहित वाली सोच रखती हो तो परिणाम अच्छे होने तय रहते हैं। सरकारी नौकरियां पूरे देश में एक बड़ा मुद्दा रहती है। एक जमाना था, जब हरियाणा सिफारिशी (पर्ची) या रिश्वत देकर (खर्ची) नौकरियां देने के लिए कुख्यात था। आज सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है तो पर्ची-खर्ची का जमाना बीते दिनों की बात हो गई है।

पर्ची-खर्ची वाले हथकंडे की एक बड़ी वजह ग्रुप सी और डी नौकरियों के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया भी थी। क्योंकि, इसके चलते धांधली करने वालों की दुकान चल पड़ती थी। लेकिन, अब इन नौकरियों के लिए साक्षात्कार की व्यवस्था ही खत्म कर दी गई है। इसके साथ ही युवाओं को सरकारी नौकरियों के लिए बार-बार आवेदन फीस भरने की आवश्यकता भी हटा दी गई है। एक कॉमन फॉर्म से ही काम चल जा रहा है। इन सबके अलावा युवाओं को इन भर्ती परीक्षाओं के लिए राज्य सरकार अलग से कई तरह की सुविधाएं भी मुहैया करवा रही है।
निजी क्षेत्रों में भी लाखों रोजगार दे रहा है हरियाणा
अगर सरकारी नौकरियों से अलग सोचें तो हरियाण ऐसा राज्य है, जो निजी क्षेत्र में युवाओं को रोजगार देने में अपनी एक दमदार प्रतिष्ठा कायम कर चुका है। बीते 9 सालों में यहां करीब 47 लाख युवा निजी क्षेत्रों के रोजगारों से जुड़े हैं।

मतलब हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार के 9 वर्षों में राज्य में लगभग 50 लाख लोगों को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार मिले हैं। अभी मौजूदा कार्यकाल में एक साल और बचा हुआ है। इस हिसाब से अगले साल अक्टूबर तक 5 से 6 लाख युवाओं के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों में और रोजगार मिल सकता है। रोजगार के फ्रंट पर खट्टर सरकार जो कर रही है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी नजीर है।












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