OPINION: बेसहारा महिलाओं की सहारा बनी हरियाणा सरकार
हरियाणा सरकार ने इस साल के बजट में विधवा पेंशन योजना के तहत मिलने वाली राशि भी बढ़ाई है। इसका परिणाम ये हुआ है कि लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लाखों का कल्याण हो रहा है।

हरियाणा सरकार नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए अनेकों कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। इसी का परिणाम है कि राज्य की सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के मुताबिक रविवार यानि 14 मई, 2023 तक इसके लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 31 लाख 11 हजार 194 हो चुकी थी।

लाभार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी
प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के इन लाभार्थियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस साल फरवरी में जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 का बजट पेश किया था, तब हरियाणा में इन कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या 29.71 लाख से अधिक थी। मतलब तीन महीने से भी कम समय में लाभार्थियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है।

विधवा पेंशन बढ़ाकर 2,750 रुपए की गई है
इस साल के बजट में सीएम खट्टर ने सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए मासिक पेंशन बढ़ा दी है। पहले राज्य में विधवा, बेसहारा या परित्यक्ता स्त्रियों को हर महीने 2,500 रुपए पेंशन मिलती थी। लेकिन, खट्टर सरकार ने 1 अप्रैल, 2023 से इसकी रकम बढ़ाकर 2,750 रुपए महीने कर दी है।

8,31,845 हुई लाभार्थियों की संख्या
हरियाणा में विधवा, निराश्रित या परित्यक्ता महिलाओं की पेंशन के लिए चालू वित्त वर्ष में 2621.20 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। 14 मई, 2023 तक इस योजना की लाभार्थी महिलाओं की संख्या बढ़कर 8 लाख 31 हजार 845 हो चुकी है। राज्य सरकार जितनी भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन देती है उसमें वृद्धावस्था सम्मान भत्ता के बाद सबसे अधिक हिस्सा यानि 26.74% विधवा पेंशन की ही है।

लाभार्थियों की योग्यता
यह पेंशन योजना उन विधवा, बेसहारा या परित्यक्ता स्त्रियों के लिए है, जिनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है। इसके लाभार्थी हरियाणा के निवासी होने चाहिए और कम से कम 15 वर्षों से हरियाणा में रहने वाली होनी चाहिए।
इसके अलावा इसका लाभ लेने के लिए आवश्यक है कि लाभार्थी की निजी आय सभी स्रोतों से सालाना 2,00,000 रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसका लाभ उन महिलाओं को मिलता है, जो विधवा हों या जो बेसहारा हों यानि जिन्हें पति, माता-पिता और पुत्र का सहारा न हो; या परित्यक्ता हो या विवाहित महिला के मामले में पति शारीरिक/मानसिक रूप से दुर्बल हो, अन्य महिलाओं के मामले में माता-पिता की यही स्थिति हो।
मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता
सामाजिक सुरक्षा पेंशन तो अपनी जगह है, राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ऐसी महिलाओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता के भी उदाहरण दिए जाते हैं। एक बार एक बुजुर्ग महिला एक कार्यक्रम में सीएम तक पहुंच गई और अपना दुख बयां किया। कुछ तकनीकी वजहों से उसका विधवा पेंशन नहीं बहाल हो पा रहा था। मुख्यमंत्री ने तत्काल अपनी जेब से उसे 2500 रुपए दिए और अफसरों को हिदायत दी कि इनकी जो भी समस्या है, उसका तत्काल निदान करें और आगे से किसी महिला को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।












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